
बेंगलुरु। कर्नाटक में मानसून की विदाई के साथ ही जल संकट की आशंका बढ़ने लगी है। राज्य के 13 प्रमुख बांधों में पानी का स्तर लगातार गिर रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 1 अक्टूबर से इन बांधों में प्रतिदिन औसतन 3.38 टीएमसी (TMC) पानी कम हो रहा है। फिलहाल जलाशयों में कुल 533.84 टीएमसी पानी मौजूद है, लेकिन इनमें से केवल 274 टीएमसी पानी ही लाइव स्टोरेज यानी सामान्य परिचालन के तहत उपयोग के लिए उपलब्ध जल भंडारण में है। पिछले वर्ष इसी अवधि में प्रमुख जलाशयों का लाइव स्टोरेज 444 टीएमसी था। इस तरह एक वर्ष में उपयोग योग्य जल भंडारण में 170 टीएमसी की कमी दर्ज हुई है। पानी की उपलब्धता में यह गिरावट आने वाले महीनों में पेयजल आपूर्ति, सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए चुनौती बन सकती है।
अक्टूबर की शुरुआत से लगातार गिर रहा जलस्तर
कर्नाटक के प्रमुख जलाशयों में अक्टूबर की शुरुआत के बाद से पानी की मात्रा लगातार घट रही है। आंकड़ों के अनुसार, 13 बांधों के जल भंडारण में प्रतिदिन औसतन 3.38 टीएमसी की कमी सामने आई है।
बारिश का मौसम समाप्त होने के साथ बांधों में नए पानी की आवक कम होने लगती है। दूसरी ओर पेयजल, कृषि और औद्योगिक जरूरतों के लिए जलाशयों से पानी की निकासी जारी रहती है।
ऐसे में जल भंडारण का स्तर बनाए रखना महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होती, तो पानी की उपलब्धता पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
पिछले साल के मुकाबले 38 प्रतिशत कम पानी
वर्तमान जल भंडारण के आंकड़े पिछले वर्ष की तुलना में चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं।
पिछले वर्ष इसी समय राज्य के प्रमुख जलाशयों में 444 टीएमसी लाइव स्टोरेज मौजूद था। इस वर्ष यह घटकर 274 टीएमसी रह गया है।
इस तरह 170 टीएमसी पानी की कमी दर्ज की गई है, जो लगभग 38.3 प्रतिशत की गिरावट दर्शाती है।
इतनी बड़ी कमी से राज्य के जल प्रबंधन पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि वास्तविक जल संकट की गंभीरता प्रत्येक बांध की क्षमता, पानी की मांग और आगामी बारिश पर निर्भर करेगी।
क्या होता है लाइव स्टोरेज?
बांधों में मौजूद कुल पानी और उपयोग के लिए उपलब्ध पानी में अंतर होता है।
किसी जलाशय में जमा कुल पानी को ग्रॉस स्टोरेज कहा जाता है। इसमें वह पानी भी शामिल हो सकता है, जिसे सामान्य बांध संचालन के माध्यम से निकालना मुश्किल होता है।
वहीं, लाइव स्टोरेज वह पानी होता है जिसे निर्धारित परिचालन सीमा के अंतर्गत पेयजल, सिंचाई, उद्योग और अन्य आवश्यकताओं के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
कर्नाटक के 13 प्रमुख बांधों में वर्तमान कुल भंडारण 533.84 टीएमसी बताया गया है। इसमें 274 टीएमसी लाइव स्टोरेज है।
इसका मतलब है कि कुल मौजूदा जल भंडारण का लगभग 51.3 प्रतिशत हिस्सा लाइव स्टोरेज के अंतर्गत आता है।
कावेरी बेसिन में भी पानी की कमी
कर्नाटक में कावेरी नदी से जुड़े जलाशयों की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है।
3 अक्टूबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, कावेरी बेसिन के चार प्रमुख जलाशयों—हारंगी, हेमावती, कृष्णराज सागर और काबिनी—में 1 अक्टूबर को कुल 58.89 टीएमसी पानी मौजूद था।
पिछले वर्ष इसी तारीख को इन जलाशयों में 108.54 टीएमसी पानी था। इस तरह करीब 46 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई थी।
कावेरी बेसिन के जलाशय बेंगलुरु सहित कई क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति और कृषि के लिए महत्वपूर्ण हैं।
किसानों के सामने बढ़ सकती है सिंचाई की समस्या
जलाशयों में पानी की कमी का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है।
कर्नाटक के कई जिलों में किसान सिंचाई के लिए बांधों और नहरों से मिलने वाले पानी पर निर्भर हैं।
यदि जलाशयों में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं रहता, तो रबी सीजन में फसलों की सिंचाई प्रभावित हो सकती है।
विशेष रूप से गन्ना, धान और अन्य अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों के लिए किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पानी की सीमित उपलब्धता की स्थिति में किसानों को फसल चयन और सिंचाई व्यवस्था की योजना सावधानी से बनानी चाहिए।
बेंगलुरु की पेयजल आपूर्ति पर भी नजर
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में बड़ी आबादी पेयजल आपूर्ति के लिए कावेरी नदी प्रणाली पर निर्भर है।
कावेरी बेसिन के जलाशयों में पानी कम होने से आने वाले महीनों की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ सकती है।
हालांकि केवल जलाशयों के वर्तमान आंकड़ों के आधार पर शहर में पानी की कटौती होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
इसके लिए जलापूर्ति एजेंसियों के पास उपलब्ध पानी, मांग, अन्य जल स्रोतों और आगामी मौसम की स्थिति का आकलन करना आवश्यक होगा।
बांधों की भंडारण क्षमता बढ़ाने की तैयारी
कर्नाटक सरकार जल प्रबंधन को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी कर रही है।
16 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कावेरी और तुंगभद्रा जलाशयों में गाद हटाने का काम शुरू करने की योजना की जानकारी दी थी।
इसका उद्देश्य बांधों की जल भंडारण क्षमता में सुधार करना और पानी की बर्बादी कम करना है।
लंबे समय तक जलाशयों में गाद जमा होने से उनकी प्रभावी भंडारण क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में गाद हटाने की परियोजनाएं भविष्य में जल प्रबंधन को बेहतर बनाने में उपयोगी साबित हो सकती हैं।
गर्मियों से पहले जल संरक्षण की चुनौती
कर्नाटक में पानी की उपलब्धता को लेकर आने वाले महीने बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
मानसून के बाद जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य रूप से घटता है, लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में बड़ी गिरावट चिंता बढ़ाने वाली है।
राज्य सरकार और जल संसाधन विभाग को पेयजल, कृषि, उद्योग और बिजली उत्पादन की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना होगा।
इसके साथ ही जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और पानी के उचित वितरण पर ध्यान देना जरूरी होगा।
आने वाले महीनों में बढ़ सकता है संकट
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 13 प्रमुख बांधों में प्रतिदिन औसतन 3.38 टीएमसी पानी कम होना जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव का संकेत है।
यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है और पानी की नई आवक पर्याप्त नहीं होती, तो कुछ क्षेत्रों में जल उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
हालांकि जलस्तर घटने की वर्तमान दर पूरे मौसम में समान बनी रहेगी, ऐसा मानना उचित नहीं होगा।





