
बेंगलुरु। कर्नाटक में खरीफ सीजन 2026-27 के दौरान खाद्यान्न उत्पादन में बड़ी गिरावट की आशंका सामने आई है। राज्य के अर्थशास्त्र और सांख्यिकी निदेशालय के अग्रिम अनुमानों के अनुसार, इस वर्ष खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 68.87 लाख टन रहने का अनुमान है। यह वर्ष 2024-25 के अंतिम उत्पादन आंकड़ों की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत कम है। वहीं, वर्ष 2025-26 के आंकड़ों से तुलना करने पर उत्पादन में करीब 45 प्रतिशत की गिरावट दिखाई देती है। राज्य में खरीफ फसलों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में भी कमी का अनुमान है। इन आंकड़ों ने कृषि क्षेत्र की स्थिति, किसानों की आय और भविष्य में खाद्यान्न आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
68.87 लाख टन उत्पादन का अनुमान
अर्थशास्त्र और सांख्यिकी निदेशालय के प्रस्तुत अग्रिम अनुमानों के मुताबिक, वर्ष 2026-27 के खरीफ सीजन में कर्नाटक में 41.03 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से 68.87 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन होने की संभावना है।
इसके मुकाबले वर्ष 2025-26 में 51.35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से 125.99 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन दर्ज किया गया था।
वर्ष 2024-25 में 60.78 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से कुल 114.85 लाख टन उत्पादन हुआ था।
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि पिछले दो वर्षों की तुलना में इस खरीफ सीजन के लिए अनुमानित कृषि क्षेत्र और खाद्यान्न उत्पादन दोनों में गिरावट है।
हालांकि ये अग्रिम अनुमान हैं। वास्तविक उत्पादन के आंकड़े फसल कटाई और अंतिम आकलन के बाद बदल सकते हैं।
पिछले साल के मुकाबले 57 लाख टन उत्पादन कम
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में राज्य का खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 125.99 लाख टन था, जबकि वर्तमान सीजन में यह 68.87 लाख टन रहने का अनुमान है।
इस तरह एक वर्ष के अंतराल में उत्पादन में लगभग 57.12 लाख टन की कमी दिखाई दे रही है।
प्रतिशत के हिसाब से यह गिरावट करीब 45.34 प्रतिशत है।
वहीं, वर्ष 2024-25 के 114.85 लाख टन उत्पादन से तुलना करें तो कमी 45.98 लाख टन, यानी लगभग 40.03 प्रतिशत बैठती है।
यह गिरावट राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर हैं।
खरीफ फसलों के क्षेत्रफल में भी कमी
उत्पादन के साथ खरीफ फसलों की खेती के क्षेत्रफल में भी बड़ी गिरावट का अनुमान लगाया गया है।
वर्ष 2024-25 में 60.78 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खाद्यान्न फसलें उगाई गई थीं। इसके बाद वर्ष 2025-26 में यह क्षेत्र घटकर 51.35 लाख हेक्टेयर रह गया।
वर्तमान खरीफ सीजन 2026-27 में यह क्षेत्र और कम होकर 41.03 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है।
इस तरह पिछले वर्ष के मुकाबले खेती का क्षेत्रफल करीब 10.32 लाख हेक्टेयर कम है।
कृषि क्षेत्र में इतनी बड़ी कमी उत्पादन को सीधे प्रभावित कर सकती है। हालांकि इसके पीछे बारिश, बुवाई की परिस्थितियों, फसल चयन और अन्य कारणों की भूमिका का विस्तृत आकलन आवश्यक है।
अनियमित बारिश से प्रभावित हुई थी बुवाई
कर्नाटक में खरीफ सीजन की शुरुआत के दौरान कई इलाकों में अनियमित और अपर्याप्त बारिश की समस्या सामने आई थी।
जुलाई 2026 की शुरुआत में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 3 जुलाई तक खरीफ बुवाई निर्धारित लक्ष्य के लगभग 43 प्रतिशत तक ही पहुंच सकी थी।
उस समय 84.1 लाख हेक्टेयर के कुल खरीफ बुवाई लक्ष्य के मुकाबले लगभग 36.5 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी।
बारिश की अनियमितता को बुवाई की धीमी गति का एक प्रमुख कारण बताया गया था। हालांकि यह आंकड़ा सभी खरीफ फसलों के बुवाई लक्ष्य से संबंधित था, केवल खाद्यान्न फसलों से नहीं।
प्रति हेक्टेयर उत्पादकता पर भी असर
दिए गए उत्पादन और क्षेत्रफल के आंकड़ों से प्रति हेक्टेयर औसत खाद्यान्न उत्पादन में भी कमी का संकेत मिलता है।
वर्ष 2025-26 में प्रति हेक्टेयर लगभग 2.45 टन खाद्यान्न उत्पादन हुआ था।
इसके मुकाबले वर्ष 2026-27 के अग्रिम अनुमानों के आधार पर औसत उत्पादन लगभग 1.68 टन प्रति हेक्टेयर रहने का अनुमान बनता है।
इसका मतलब है कि सिर्फ खेती के क्षेत्रफल में कमी ही नहीं, बल्कि औसत उत्पादकता में भी गिरावट की आशंका है।
हालांकि अंतिम उत्पादकता के आंकड़े अलग-अलग फसलों की वास्तविक पैदावार और अंतिम उत्पादन अनुमानों के बाद ही स्पष्ट होंगे।
किसानों की आय पर पड़ सकता है प्रभाव
खाद्यान्न उत्पादन कम होने की स्थिति में किसानों की आय प्रभावित हो सकती है।
विशेष रूप से उन किसानों के सामने आर्थिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं, जिनकी आजीविका मुख्य रूप से खरीफ फसलों पर निर्भर है।
खेती की लागत में बीज, खाद, मजदूरी, सिंचाई और परिवहन जैसे कई खर्च शामिल होते हैं। यदि उत्पादन कम होता है, तो किसानों के लिए इन खर्चों की भरपाई करना मुश्किल हो सकता है।
हालांकि किसानों की वास्तविक आय केवल फसल उत्पादन पर निर्भर नहीं करती। बाजार में मिलने वाली कीमतें, सरकारी खरीद और फसल की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
सरकार की खरीद व्यवस्था का महत्व बढ़ा
किसानों को बाजार मूल्य में गिरावट से सुरक्षा देने के लिए केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए कर्नाटक सहित तीन राज्यों में दलहन और तिलहन की सरकारी खरीद को मंजूरी दी है।
30 सितंबर को जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कर्नाटक के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत करीब 1,107 करोड़ रुपये की खरीद स्वीकृत की गई है।
इस योजना का उद्देश्य पात्र किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपज बेचने का अवसर उपलब्ध कराना है।
हालांकि यह व्यवस्था मुख्य रूप से चयनित दलहन और तिलहन फसलों से संबंधित है और इसे राज्य के कुल खरीफ खाद्यान्न उत्पादन में गिरावट का सीधा समाधान नहीं माना जा सकता।
खाद्यान्न आपूर्ति और कीमतों पर भी नजर
राज्य में खाद्यान्न उत्पादन में संभावित गिरावट से बाजार की आपूर्ति और कीमतों को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
हालांकि इसका वास्तविक असर राज्य के भंडार, दूसरे राज्यों से होने वाली आपूर्ति, सरकारी खरीद और उपभोक्ता मांग पर निर्भर करेगा।
केवल अग्रिम उत्पादन अनुमान के आधार पर खाद्यान्न की कमी या कीमतों में निश्चित बढ़ोतरी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार, उत्पादन से जुड़े अंतिम आंकड़े और बाजार की परिस्थितियां सामने आने के बाद ही आपूर्ति की स्थिति का सही मूल्यांकन किया जा सकता है।
अंतिम उत्पादन आंकड़ों का इंतजार
कर्नाटक में खरीफ खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान घटकर 68.87 लाख टन रहना राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है।
वर्ष 2024-25 की तुलना में 40 प्रतिशत और वर्ष 2025-26 की तुलना में करीब 45 प्रतिशत संभावित गिरावट महत्वपूर्ण संकेत देती है।
हालांकि दिए गए निदेशालय के सटीक आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं हो सकी है। इसलिए इन्हें रिपोर्ट किए गए अग्रिम अनुमानों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
फिलहाल सरकार और कृषि विभाग के लिए उत्पादन में संभावित गिरावट के कारणों का आकलन करना, किसानों की समस्याओं पर ध्यान देना और आगामी रबी सीजन की तैयारियों को मजबूत बनाना महत्वपूर्ण होगा।





