
बेंगलुरु। शहर को कचरा-मुक्त बनाने के लिए चलाए जा रहे ‘वेस्ट-फ्री कैंपेन’ के बीच कर्नाटक के शहरी विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौडा ने सरकारी विभागों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने पांच नगर निगमों के कमिश्नरों से कहा है कि वे ऐसे सरकारी विभागों को नोटिस जारी करें, जो अपने परिसरों और आसपास जमा कचरे की सफाई तथा उसे हटाने में लापरवाही बरत रहे हैं।
अभियान की प्रगति को लेकर आयोजित वर्चुअल समीक्षा बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी केवल नगर निकायों की नहीं है। सरकारी कार्यालयों और विभागों को भी अपने परिसरों की सफाई सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थानों के आसपास कचरा जमा रहने की स्थिति को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
सरकारी कार्यालयों को भी निभानी होगी जिम्मेदारी
कृष्णा बायरे गौडा ने कहा कि शहर के सभी सरकारी कार्यालयों के लिए यह जरूरी है कि वे अपने परिसर के साथ-साथ आसपास की जगहों पर जमा कचरे को हटाएं। यदि कोई विभाग या सरकारी संस्था इस जिम्मेदारी को पूरा नहीं करती है तो संबंधित नगर निगम उसे नोटिस जारी करे।
मंत्री के इस निर्देश का उद्देश्य सरकारी विभागों को सफाई व्यवस्था के प्रति अधिक जवाबदेह बनाना है। अक्सर शहर के सार्वजनिक स्थानों के साथ सरकारी कार्यालयों के आसपास भी निर्माण मलबा, पुराने सामान और अन्य तरह का कचरा जमा हो जाता है। इससे न केवल शहर की सुंदरता प्रभावित होती है, बल्कि लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सरकार का प्रयास है कि वेस्ट-फ्री कैंपेन को केवल अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे नियमित सफाई व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाए।
453 सार्वजनिक स्थानों से हटाया गया 10,056 टन C&D कचरा
अभियान के तहत शहर में बड़े पैमाने पर निर्माण एवं तोड़-फोड़ यानी C&D (Construction and Demolition) कचरा हटाया जा रहा है। मंत्री ने समीक्षा बैठक में बताया कि 1 अगस्त से 6 अगस्त के बीच 453 सार्वजनिक स्थानों से 10,056 टन C&D कचरा हटाया गया।
यह आंकड़ा बताता है कि शहर में निर्माण और तोड़-फोड़ से निकलने वाले मलबे की मात्रा काफी अधिक है। यदि इस तरह के कचरे को निर्धारित स्थानों पर नहीं पहुंचाया जाता है तो यह सड़कों, फुटपाथों, खाली जमीन और सार्वजनिक स्थलों पर जमा हो जाता है।
अभियान के तहत ऐसे स्थानों की पहचान कर वहां से मलबा हटाने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि सफाई के बाद दोबारा उसी स्थान पर कचरा न जमा हो।
अभियान दिन-ब-दिन पकड़ रहा जोर
मंत्री ने समीक्षा बैठक में कहा कि ‘वेस्ट-फ्री कैंपेन’ सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है और दिन-ब-दिन इसमें तेजी आ रही है। अभियान के दौरान सार्वजनिक स्थानों की सफाई के साथ-साथ निर्माण मलबे को हटाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बेंगलुरु जैसे बड़े शहर में कचरा प्रबंधन लंबे समय से प्रमुख शहरी चुनौतियों में शामिल रहा है। शहर के तेजी से विस्तार और लगातार चल रहे निर्माण कार्यों के कारण C&D कचरे की मात्रा भी बढ़ती है। ऐसे में केवल घरेलू कचरे का प्रबंधन पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्माण मलबे के लिए भी प्रभावी व्यवस्था जरूरी है।
पांच नगर निगमों को निगरानी की जिम्मेदारी
शहरी विकास मंत्री ने पांच नगर निगमों के कमिश्नरों को अभियान की निगरानी और सरकारी विभागों की जवाबदेही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। नगर निगमों को अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे स्थानों की पहचान करनी होगी जहां सरकारी विभागों की ओर से सफाई नहीं की जा रही है।
अधिकारियों को यह भी देखना होगा कि सरकारी कार्यालय अपने परिसर के भीतर और बाहर कचरा जमा होने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं या नहीं।
यदि किसी विभाग की ओर से लापरवाही पाई जाती है तो उसे नोटिस जारी कर कार्रवाई के लिए बाध्य किया जाएगा। इससे नगर निकायों और सरकारी विभागों के बीच जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्टता आने की उम्मीद है।
सार्वजनिक जगहों की सफाई पर विशेष जोर
वेस्ट-फ्री कैंपेन के तहत सार्वजनिक स्थानों को प्राथमिकता दी जा रही है। सड़कों के किनारे, खाली भूखंडों, सरकारी परिसरों के आसपास और अन्य सार्वजनिक जगहों पर जमा कचरे को हटाया जा रहा है।
कई बार सफाई के बाद कुछ ही दिनों में उसी स्थान पर दोबारा कचरा जमा हो जाता है। ऐसे में अभियान की सफलता केवल एक बार सफाई करने पर निर्भर नहीं करेगी। नियमित निगरानी और कचरा दोबारा जमा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी जरूरी होगी।
प्रशासन का उद्देश्य ऐसे स्थानों को स्थायी रूप से साफ रखना है, ताकि अभियान के बाद भी शहर में कचरे की समस्या दोबारा न उभरे।
निर्माण मलबे के निपटारे पर फोकस
बेंगलुरु में लगातार चल रहे निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास के कारण C&D कचरे का उत्पादन बड़ी चुनौती है। निर्माण स्थलों से निकलने वाला मलबा यदि नियमों के अनुसार नहीं हटाया जाता है तो वह यातायात, जल निकासी और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।
इसलिए अभियान में निर्माण एवं तोड़-फोड़ के कचरे को हटाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। एक सप्ताह में 453 सार्वजनिक स्थानों से 10,056 टन मलबा हटाया जाना अभियान के बड़े पैमाने को दर्शाता है।
सरकारी विभागों पर बढ़ेगी जवाबदेही
मंत्री के निर्देश के बाद सरकारी विभागों पर अपने परिसरों की सफाई बनाए रखने का दबाव बढ़ सकता है। आमतौर पर सफाई व्यवस्था के लिए नगर निकायों को जिम्मेदार माना जाता है, लेकिन सरकारी कार्यालयों से निकलने वाले या उनके आसपास जमा होने वाले कचरे की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की भी है।
अब नगर निगमों को ऐसे विभागों की पहचान कर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे सरकारी संस्थानों में सफाई को लेकर जवाबदेही तय करने में मदद मिल सकती है।
लक्ष्य सिर्फ सफाई नहीं, कचरा रोकना भी
वेस्ट-फ्री कैंपेन का उद्देश्य केवल जमा कचरा हटाना नहीं है, बल्कि भविष्य में कचरा जमा होने से रोकना भी है। इसके लिए सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों, निर्माण एजेंसियों और आम नागरिकों की भागीदारी जरूरी होगी।
शहर को साफ रखने के लिए नियमित कचरा संग्रहण, निर्माण मलबे का उचित निपटारा और सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करनी होगी। साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई भी जरूरी है।
बेंगलुरु में अभियान के तहत जिस तेजी से C&D कचरा हटाया जा रहा है, उससे प्रशासन की सक्रियता का संकेत मिलता है। अब आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि साफ किए गए 453 सार्वजनिक स्थानों को दोबारा कचरा मुक्त कैसे रखा जाता है और सरकारी विभाग मंत्री के निर्देशों का किस तरह पालन करते हैं।
कुल मिलाकर, वेस्ट-फ्री कैंपेन के तहत सरकार ने सफाई व्यवस्था में सरकारी विभागों की सीधी जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यदि नगर निगम नियमित निगरानी और कार्रवाई को प्रभावी ढंग से लागू करते हैं, तो इससे बेंगलुरु को अधिक स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।





