कर्नाटक

वाल्मीकि घोटाले पर घमासान, नागेंद्र को हटाने की BJP की मांग

Kavita2
21 Aug 2026 4:56 PM IST
वाल्मीकि घोटाले पर घमासान, नागेंद्र को हटाने की BJP की मांग
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बेंगलुरु। कर्नाटक में कथित वाल्मीकि घोटाले को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। भाजपा इस मामले में आरोपी बनाए गए मंत्री नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग कर रही है। इसी मुद्दे को लेकर विधानसभा परिसर में विरोध-प्रदर्शन और नारेबाजी का दौर जारी रहा।

विधान सौधा परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने कांग्रेस की ओर से भी विरोध प्रदर्शन किया गया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा के सदस्य सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं होने दे रहे हैं। इसी दौरान आबकारी मंत्री शिवलिंगेगौड़ा अपने एक बयान को लेकर मीडिया के सवालों में घिर गए।

गांधी प्रतिमा के सामने कांग्रेस का प्रदर्शन

विधान सौधा में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने कांग्रेस की ओर से आयोजित प्रदर्शन का उद्देश्य भाजपा के विरोध और सदन में कथित व्यवधान के खिलाफ आवाज उठाना था। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर विधानसभा की कार्यवाही को बाधित करने का आरोप लगाया।

कांग्रेस का कहना था कि विपक्ष को सदन में अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन लगातार हंगामा करने और कार्यवाही बाधित करने से जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा प्रभावित होती है।

वहीं भाजपा की ओर से वाल्मीकि घोटाले को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष की मांग है कि मामले में आरोपों का सामना कर रहे मंत्री नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाया जाए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

मीडिया के सवाल पर घिरे आबकारी मंत्री

विरोध प्रदर्शन के दौरान आबकारी मंत्री शिवलिंगेगौड़ा मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान एक निजी मीडिया प्रतिनिधि ने उनसे मंत्री नागेंद्र के इस्तीफे को लेकर सवाल पूछा।

पत्रकार ने पूछा कि सिद्धारमैया सरकार के कार्यकाल में मंत्री नागेंद्र का इस्तीफा क्यों स्वीकार किया गया था। सवाल का जवाब देते हुए शिवलिंगेगौड़ा ने कहा कि जब नागेंद्र पर आरोप लगे थे, तब विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी।

मंत्री ने यह भी कहा कि उस समय मामले से जुड़े तथ्य पूरी तरह स्पष्ट नहीं थे। उनका बयान सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई।

इस्तीफे को लेकर विपक्ष के सवाल

वाल्मीकि घोटाले को लेकर भाजपा लगातार कांग्रेस सरकार को घेर रही है। विपक्ष का आरोप है कि मामले में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर सवाल उठे हैं। भाजपा का कहना है कि ऐसे मामले में सरकार को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए संबंधित मंत्री के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।

विपक्ष की ओर से यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि यदि मंत्री पर आरोपों को गंभीर माना गया था, तो आगे सरकार की ओर से क्या कदम उठाए गए। भाजपा इसी आधार पर मंत्री नागेंद्र को कैबिनेट से हटाने की मांग कर रही है।

सरकार और विपक्ष आमने-सामने

मामले को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा जहां सरकार पर घोटाले को लेकर गंभीर सवाल उठा रही है, वहीं कांग्रेस का आरोप है कि विपक्ष राजनीतिक मुद्दा बनाकर सदन की कार्यवाही को बाधित कर रहा है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं भाजपा का कहना है कि केवल जांच का आश्वासन पर्याप्त नहीं है और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

सदन के बाहर भी जारी राजनीतिक संघर्ष

कर्नाटक की राजनीति में यह विवाद अब सदन के भीतर की बहस से निकलकर सड़क और विधानसभा परिसर तक पहुंच गया है। एक ओर भाजपा के सदस्य सरकार के खिलाफ विरोध कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस भी विपक्ष के विरोध के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है।

महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने कांग्रेस का प्रदर्शन इसी राजनीतिक टकराव का हिस्सा रहा। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के प्रदर्शन और सदन की कार्यवाही में कथित व्यवधान पर सवाल उठाए।

बयान ने बढ़ाई चर्चा

इसी बीच आबकारी मंत्री शिवलिंगेगौड़ा का मीडिया से बातचीत के दौरान दिया गया बयान चर्चा में आ गया। मंत्री ने कहा कि जब नागेंद्र पर आरोप लगाए गए थे, उस समय विधानसभा में इस विषय पर चर्चा हुई थी और तथ्य स्पष्ट नहीं थे।

उनके इस बयान को विपक्ष किस तरह लेता है, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगा। क्योंकि भाजपा पहले से ही मंत्री नागेंद्र को हटाने की मांग पर सरकार पर दबाव बना रही है।

जांच और राजनीतिक जवाबदेही का मुद्दा

वाल्मीकि घोटाले का मामला अब केवल जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक जवाबदेही का मुद्दा भी बन गया है। विपक्ष सरकार से स्पष्ट जवाब और कार्रवाई की मांग कर रहा है। दूसरी ओर कांग्रेस भाजपा के विरोध प्रदर्शन को सदन की कार्यवाही में बाधा डालने की कोशिश के रूप में पेश कर रही है।

आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विधानसभा में और अधिक हंगामे की संभावना है। यदि विपक्ष अपनी मांग पर कायम रहता है तो सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है।

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