
चित्रदुर्ग। खेती और पशुपालन के जरिए आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करने वाली ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट अरुंधति की सड़क हादसे में मौत हो गई। 45 वर्षीय अरुंधति 'मडिलु स्वावलंबी ट्रस्ट' की संस्थापक थीं और यौन अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम करती थीं। शनिवार देर रात चित्रदुर्ग के पास हुए हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। रविवार को उनकी मौत हो गई।
जानकारी के मुताबिक हादसा शनिवार देर रात NH-4 की सर्विस रोड पर हुआ। अरुंधति स्कूटर से जा रही थीं। इसी दौरान सड़क पर सूखने के लिए फैलाए गए मक्के के ऊपर उनका स्कूटर फिसल गया। संतुलन बिगड़ने के कारण वह सड़क पर गिर गईं और गंभीर रूप से घायल हो गईं।
हादसे के बाद उन्हें तत्काल इलाज के लिए चित्रदुर्ग स्थित बसवेश्वरा मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। वहां उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए आगे के इलाज के लिए दावणगेरे के SS अस्पताल में स्थानांतरित किया गया।
दावणगेरे में भी डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को गंभीर पाया। इसके बाद उन्हें बेहतर और विशेष उपचार के लिए KIMS हुबली रेफर कर दिया गया। लगातार अस्पतालों में इलाज और रेफर किए जाने के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी और रविवार को उनकी मौत हो गई।
अरुंधति की पहचान केवल एक ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट के रूप में नहीं थी। उन्होंने खेती और पशुपालन को अपनाकर अपने जीवन में बदलाव लाने के साथ आत्मनिर्भरता का रास्ता चुना था। इसी अनुभव के आधार पर वह यौन अल्पसंख्यक समुदाय के अन्य लोगों को भी आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए काम कर रही थीं।
उन्होंने 'मडिलु स्वावलंबी ट्रस्ट' की स्थापना की थी। इस संस्था के जरिए उनका उद्देश्य यौन अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े लोगों को सशक्त बनाना था। उनके काम में आत्मनिर्भरता को विशेष महत्व दिया गया था।
अरुंधति ने खेती और पशुपालन के माध्यम से यह दिखाने की कोशिश की कि आजीविका के पारंपरिक साधनों को अपनाकर भी आर्थिक रूप से स्वतंत्र हुआ जा सकता है। उनकी यही पहचान उन्हें समुदाय के बीच अलग स्थान दिलाती थी।
45 वर्षीय अरुंधति का जीवन संघर्ष के साथ आत्मनिर्भरता की कहानी के रूप में भी देखा जाता था। उन्होंने अपनी आजीविका के लिए खेती और पशुपालन का रास्ता चुना और बाद में अपने अनुभवों के माध्यम से अन्य लोगों को भी आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
उनकी संस्था का नाम भी 'स्वावलंबी' शब्द से जुड़ा था, जो उनके काम के मुख्य उद्देश्य को दर्शाता है। वह चाहती थीं कि यौन अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े लोग आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें और अपने लिए स्थायी आजीविका के साधन तैयार करें।
इसी बीच शनिवार देर रात हुआ सड़क हादसा उनके लिए जानलेवा साबित हुआ। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक NH-4 सर्विस रोड पर मक्का सूखने के लिए फैलाया गया था। अरुंधति का स्कूटर इसी मक्के के ऊपर से गुजरते समय फिसल गया।
अचानक स्कूटर का संतुलन बिगड़ने से अरुंधति सड़क पर गिर गईं। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद उन्हें जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की गई।
सबसे पहले उन्हें चित्रदुर्ग के बसवेश्वरा मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार और उनकी स्थिति का आकलन किए जाने के बाद उन्हें दावणगेरे के SS अस्पताल भेजा गया।
SS अस्पताल में भी उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने KIMS हुबली रेफर कर दिया। इस तरह हादसे के बाद उन्हें बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजा गया। हालांकि गंभीर चोटों के कारण उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
रविवार को अरुंधति की मौत की खबर सामने आई। उनके निधन से एक ऐसी कार्यकर्ता का सफर समाप्त हो गया, जिसने स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ अपने समुदाय के लोगों को भी आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में काम किया।
अरुंधति की कहानी में खेती और पशुपालन की विशेष भूमिका रही। उन्होंने इन्हीं माध्यमों से अपनी जिंदगी में बदलाव किया था। आमतौर पर रोजगार और आजीविका को लेकर कई तरह की चुनौतियों का सामना करने वाले यौन अल्पसंख्यक समुदाय के बीच उन्होंने स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की कोशिश की।
उनकी ओर से स्थापित मडिलु स्वावलंबी ट्रस्ट भी इसी सोच को आगे बढ़ाने का माध्यम बना। संस्था के जरिए वह समुदाय के लोगों को सशक्त बनाने के लिए सक्रिय थीं।
हादसे की परिस्थितियां भी सड़क सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े करती हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सर्विस रोड पर सूखने के लिए फैले मक्के पर स्कूटर फिसलने के बाद यह दुर्घटना हुई। हालांकि हादसे को लेकर किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय किए जाने या किसी कानूनी कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इसलिए फिलहाल इतना ही स्पष्ट है कि शनिवार देर रात स्कूटर फिसलने से अरुंधति गंभीर रूप से घायल हुई थीं और बाद में उनकी मौत हो गई। हादसे से जुड़े अन्य पहलुओं के बारे में उपलब्ध विवरण में जानकारी नहीं दी गई है।
अरुंधति का निधन उनके सामाजिक कार्यों से जुड़े लोगों और यौन अल्पसंख्यक समुदाय के लिए बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने अपनी जिंदगी में खेती और पशुपालन को अपनाकर आत्मनिर्भर बनने का रास्ता चुना और उसी अनुभव को दूसरों तक पहुंचाने का प्रयास किया।
उनका काम यह संदेश देने पर केंद्रित था कि सामाजिक चुनौतियों के बावजूद आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। मडिलु स्वावलंबी ट्रस्ट के माध्यम से उन्होंने इस सोच को संगठित रूप देने का प्रयास किया था।
शनिवार देर रात हुआ हादसा उनके जीवन का अंतिम सफर साबित हुआ। गंभीर रूप से घायल होने के बाद चित्रदुर्ग से दावणगेरे और फिर हुबली में बेहतर इलाज की कोशिश की गई, लेकिन रविवार को अरुंधति की मौत हो गई।





