
बेंगलुरु। बेंगलुरु और कारवार के बीच प्रस्तावित वंदे भारत ट्रेन कनेक्शन को लेकर तटीय कर्नाटक में यात्रियों के बीच मतभेद सामने आए हैं। दक्षिण कन्नड़ के लोगों की ओर से ट्रेन को मंगलुरु सेंट्रल तक ले जाने और मंगलुरु के दोनों प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर ठहराव देने की मांग की जा रही है। वहीं उत्तर कन्नड़, उडुपी और आसपास के क्षेत्रों के रेल यात्री संगठनों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। उनका कहना है कि रूट में इस तरह का बदलाव किए जाने से उत्तरी तटीय जिलों की ओर जाने वाले यात्रियों का सफर लंबा हो जाएगा।
बेंगलुरु-कारवार के बीच प्रस्तावित वंदे भारत सेवा को लेकर दक्षिण कन्नड़ से सोशल मीडिया पर अभियान शुरू किया गया है। अभियान के माध्यम से मांग की जा रही है कि प्रस्तावित ट्रेन मंगलुरु सेंट्रल और मंगलुरु जंक्शन दोनों रेलवे स्टेशनों पर रुके। अभियान से जुड़े लोगों का तर्क है कि इससे मंगलुरु के यात्रियों को भी इस नई रेल सेवा का पूरा लाभ मिल सकेगा।
दूसरी ओर सूरतकल, उडुपी और कारवार के रेल यात्री संगठनों तथा यात्री प्रतिनिधियों ने इस मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि बेंगलुरु से कारवार जाने वाली ट्रेन का मुख्य उद्देश्य तटीय क्षेत्रों के लिए तेज और सुविधाजनक कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना होना चाहिए। यदि ट्रेन को मंगलुरु के दोनों स्टेशनों से होकर चलाया जाता है तो इससे यात्रा का समय बढ़ सकता है।
उत्तर कन्नड़ के यात्री संगठनों का प्रमुख तर्क यात्रा समय को लेकर है। उनका कहना है कि ट्रेन के मार्ग में अतिरिक्त बदलाव और ठहराव जोड़े जाने से कारवार तथा उत्तरी तटीय इलाकों की यात्रा करने वाले यात्रियों को अधिक समय लग सकता है। ऐसे में वंदे भारत जैसी तेज गति वाली रेल सेवा शुरू करने का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।
दक्षिण कन्नड़ की ओर से उठाई जा रही मांग में मंगलुरु की रेल कनेक्टिविटी को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। सोशल मीडिया अभियान के माध्यम से लोगों का कहना है कि प्रस्तावित बेंगलुरु-कारवार सेवा यदि मंगलुरु क्षेत्र से गुजरती है तो मंगलुरु सेंट्रल और मंगलुरु जंक्शन दोनों को इसका लाभ मिलना चाहिए।
इसी मांग को लेकर अब दोनों क्षेत्रों के यात्रियों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। दक्षिण कन्नड़ के लोग मंगलुरु को बेहतर कनेक्टिविटी देने की मांग कर रहे हैं, जबकि उत्तर कन्नड़ के यात्री प्रस्तावित सेवा को अधिक सीधा और कम समय वाला बनाए रखने के पक्ष में हैं।
सूरतकल और उडुपी के यात्री प्रतिनिधियों की आपत्ति भी यात्रा के समय से जुड़ी हुई है। उनका कहना है कि यदि ट्रेन के रूट को मंगलुरु सेंट्रल तक ले जाने के लिए बदला जाता है और इसके बाद मंगलुरु जंक्शन का भी ठहराव रखा जाता है तो उत्तरी तटीय जिलों की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए सफर लंबा हो सकता है।
कारवार के यात्री संगठनों ने भी इसी आधार पर प्रस्ताव का विरोध किया है। उनकी मांग है कि प्रस्तावित वंदे भारत ट्रेन की योजना बनाते समय उन यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता दी जाए, जो बेंगलुरु और उत्तरी तटीय क्षेत्रों के बीच नियमित रूप से यात्रा करते हैं।
वंदे भारत ट्रेनें मुख्य रूप से कम यात्रा समय और बेहतर सुविधाओं के कारण यात्रियों के बीच लोकप्रिय हैं। ऐसे में प्रस्तावित बेंगलुरु-कारवार सेवा के रूट और ठहराव को लेकर शुरू हुई चर्चा में भी यात्रा समय सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बन गया है।
इस विवाद का एक पक्ष क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से भी जुड़ा है। मंगलुरु दक्षिण कन्नड़ का प्रमुख केंद्र है और वहां के यात्री चाहते हैं कि नई ट्रेन सेवा का लाभ शहर को व्यापक रूप से मिले। वहीं कारवार और उत्तर कन्नड़ के यात्रियों का कहना है कि उनके क्षेत्र के लिए बेंगलुरु तक तेज रेल कनेक्टिविटी की जरूरत को ध्यान में रखते हुए ट्रेन के मार्ग को अनावश्यक रूप से लंबा नहीं किया जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर चल रहे अभियान ने इस मुद्दे को और चर्चा में ला दिया है। दक्षिण कन्नड़ के लोगों की मांग है कि मंगलुरु को प्रस्तावित वंदे भारत सेवा में उचित स्थान दिया जाए। इसके जवाब में उत्तर कन्नड़ और उडुपी क्षेत्र के यात्री संगठनों ने अपनी आपत्तियां सामने रखी हैं।
दोनों पक्षों की मांग यात्रियों की सुविधा से जुड़ी है, लेकिन प्राथमिकताएं अलग हैं। एक तरफ मंगलुरु के लिए अधिक ठहराव और बेहतर कनेक्टिविटी की मांग है, जबकि दूसरी ओर कारवार और उत्तरी तटीय क्षेत्रों के लिए कम यात्रा समय को प्राथमिकता देने की बात कही जा रही है।
सूरतकल, उडुपी और कारवार के यात्री प्रतिनिधियों का कहना है कि वंदे भारत सेवा का रूट तय करते समय कुल यात्रा अवधि पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। अतिरिक्त स्टेशन या मार्ग परिवर्तन से यदि यात्रा समय में उल्लेखनीय वृद्धि होती है तो इसका असर पूरी सेवा की उपयोगिता पर पड़ सकता है।
दक्षिण कन्नड़ के अभियान से जुड़े लोगों का पक्ष है कि मंगलुरु को पर्याप्त सेवा देने के लिए दोनों प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव जरूरी है। इससे शहर और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को बेंगलुरु तथा तटीय क्षेत्रों के बीच यात्रा के लिए एक और विकल्प मिल सकता है।
फिलहाल बेंगलुरु-कारवार प्रस्तावित वंदे भारत सेवा को लेकर दोनों क्षेत्रों के यात्री संगठनों की अलग-अलग मांगें सामने हैं। एक ओर मंगलुरु सेंट्रल और मंगलुरु जंक्शन को जोड़ने की मांग जोर पकड़ रही है, वहीं दूसरी ओर उत्तर कन्नड़, उडुपी और सूरतकल के यात्री संगठन यात्रा समय बढ़ने की आशंका जताते हुए इसका विरोध कर रहे हैं।
अब प्रस्तावित ट्रेन के रूट और ठहराव को लेकर अंतिम व्यवस्था क्या होगी, यह संबंधित स्तर पर होने वाले निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल इस मुद्दे ने तटीय कर्नाटक में रेल कनेक्टिविटी, यात्रा समय और क्षेत्रीय जरूरतों को लेकर नई बहस खड़ी कर दी है।





