कर्नाटक

Koraga समुदाय का शहद कारोबार: पारंपरिक हुनर से आत्मनिर्भरता की ओर

Kavita2
8 April 2026 1:04 PM IST
Koraga समुदाय का शहद कारोबार: पारंपरिक हुनर से आत्मनिर्भरता की ओर
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Karnataka कर्नाटक: दक्षिण कन्नड़ ज़िले के सुल्या तालुक में रहने वाले कोरगा समुदाय के परिवार अपने पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाज़ार के साथ जोड़कर आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहे हैं। जंगल में मिलने वाले प्राकृतिक शहद को इकट्ठा करके ‘प्रकृति’ ब्रांड के तहत बेचने वाले इस समुदाय ने अब अपने प्रोडक्ट्स खाड़ी देशों तक भी पहुँचाने की शुरुआत कर दी है।

अरनथोडू, पंजा और कोल्लमोगारू जैसे गांवों के घने जंगलों में नौ कोरगा परिवार इस काम में लगे हुए हैं। ये लोग पारंपरिक तरीकों से शहद इकट्ठा करते हैं, जिसमें छत्तों को नुकसान पहुंचाए बिना धुएँ का इस्तेमाल शामिल है। उनका मानना है कि शहद इकट्ठा करना केवल एक पेशा नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है।

कोरगा समुदाय के लिए यह काम चुनौतीपूर्ण और एडवेंचरस भी है। शहद लेने के लिए 50 फीट ऊंचे पेड़ों पर चढ़ना पड़ता है और जंगल में विभिन्न खतरों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद, यह काम उनकी रोज़ी-रोटी और पहचान का हिस्सा है।

समुदाय की महिला पुष्पा ने बताया, "हम जंगल में जाते हैं और छत्तों से शहद इकट्ठा करते हैं। यह काम हमारे पुरखों से हमें विरासत में मिला है। खतरों के बावजूद हम इसे रोज़ी-रोटी के लिए जारी रखते हैं।" उन्होंने कहा कि यह पारंपरिक हुनर उन्हें आधुनिक मार्केट में भी पहचान दिला रहा है और आत्मनिर्भर बनने में मदद कर रहा है।

कोरगा परिवारों ने अपने शहद उत्पाद को स्थानीय बाज़ार के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और विदेशी ग्राहकों के लिए भी उपलब्ध कराना शुरू किया है। इस कदम से उन्हें न केवल आर्थिक लाभ मिल रहा है, बल्कि पारंपरिक हुनर को बचाने और नई पीढ़ी में इसे बनाए रखने का अवसर भी मिल रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में सुरक्षित तरीके से शहद इकट्ठा करने की यह विधि टिकाऊ और इको-फ्रेंडली है। इससे जंगलों को नुकसान नहीं होता और स्थानीय जैव विविधता संरक्षित रहती है। कोरगा समुदाय का यह प्रयास पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक व्यापार के बीच संतुलन का उदाहरण पेश करता है।

इस तरह कोरगा परिवारों ने यह साबित कर दिया है कि कठिनाई और जोखिम के बावजूद अपने हुनर और संसाधनों का सही इस्तेमाल कर आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सक्षम बनना संभव है। यह न केवल उनकी पहचान को मजबूत कर रहा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी योगदान दे रहा है।

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