
मैसूर। कर्नाटक के प्रसिद्ध नंजनगुड श्री श्रीकंतेश्वर स्वामी मंदिर के वित्तीय खातों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। मंदिर को ‘दक्षिण काशी’ के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर के वर्ष 2024-25 के खातों की समीक्षा के दौरान करीब 4 से 5 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का संदेह जताया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंदिर प्रबंधन समिति की बैठक में विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, मंदिर प्रबंधन समिति की वार्षिक बैठक विधायक दर्शन ध्रुवनारायण की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी। बैठक में मंदिर की आय-व्यय रिपोर्ट और सालाना बजट की समीक्षा की गई। इसी दौरान 2024-25 के खातों में कुछ ऐसी विसंगतियां सामने आईं, जिनसे करोड़ों रुपये के गलत इस्तेमाल की आशंका जताई गई।
समीक्षा के दौरान सामने आया कि मंदिर की कुल आय करीब 25.86 करोड़ रुपये थी, जबकि खर्च के रूप में 25.68 करोड़ रुपये दर्शाए गए थे। रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि मंदिर की अधिकांश आय अलग-अलग खर्चों के नाम पर खर्च दिखाई गई, जिसके बाद वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे।
बैठक में मौजूद सदस्यों ने खातों में दर्ज कई मदों को लेकर जानकारी मांगी। शुरुआती समीक्षा में यह संदेह जताया गया कि करीब 4 से 5 करोड़ रुपये की राशि के इस्तेमाल में अनियमितता हो सकती है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
विधायक दर्शन ध्रुवनारायण ने खातों की समीक्षा के दौरान सामने आई स्थिति पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि मंदिर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक संस्थान के वित्तीय मामलों में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। उन्होंने मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए।
मंदिर प्रबंधन समिति ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि खातों की विस्तृत जांच कराई जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं किसी स्तर पर वित्तीय नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
नंजनगुड श्री श्रीकंतेश्वर स्वामी मंदिर कर्नाटक के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर की आय का बड़ा हिस्सा श्रद्धालुओं के चढ़ावे, धार्मिक आयोजनों और अन्य गतिविधियों से आता है।
ऐसे में मंदिर के वित्तीय रिकॉर्ड में किसी भी तरह की गड़बड़ी को गंभीर मामला माना जाता है। धार्मिक संस्थानों की आय और खर्च को लेकर सरकार और प्रबंधन समितियां समय-समय पर ऑडिट और समीक्षा करती हैं।
मंदिर प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों से भी खातों और खर्चों से संबंधित जानकारी मांगी जा सकती है। जांच के दौरान पिछले वित्तीय रिकॉर्ड, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और खर्च की मंजूरी प्रक्रिया की भी समीक्षा किए जाने की संभावना है।
विधायक दर्शन ध्रुवनारायण ने कहा कि जांच का उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहीं बल्कि वास्तविक स्थिति का पता लगाना है। यदि जांच में किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि धार्मिक संस्थानों की संपत्ति और आय जनता की आस्था से जुड़ी होती है, इसलिए इसमें पूरी पारदर्शिता जरूरी है।
फिलहाल मामले में जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि खातों में दर्ज खर्चों में कोई वास्तविक गड़बड़ी हुई है या नहीं।





