कर्नाटक

सिद्धारमैया ने जातिवाद और अंधविश्वास पर उठाए सवाल, बोले- समाज में एकता जरूरी

Kavita2
27 Aug 2026 11:10 AM IST
सिद्धारमैया ने जातिवाद और अंधविश्वास पर उठाए सवाल, बोले- समाज में एकता जरूरी
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बेंगलुरु। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने समाज में जातिवाद और अंधविश्वास को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पढ़े-लिखे लोग भी वैज्ञानिक सोच और तर्कसंगत विचारों को अपनाने के बजाय जातिवाद और अंधविश्वासों की ओर बढ़ रहे हैं।

सिद्धारमैया ने यह बात बेंगलुरु में सामाजिक समानता और तार्किक सोच को बढ़ावा देने वाली संस्था ‘शूद्र सेवा संस्था’ के उद्घाटन समारोह में कही। उन्होंने समाज में समानता, शिक्षा और आपसी एकता की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि समाज के विकास के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्क आधारित सोच बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं बल्कि सोच को व्यापक बनाना भी होना चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने जाति व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि देश में लंबे समय तक सामाजिक असमानता रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनुवादी व्यवस्था के कारण समाज में चार जातियों वाली संरचना बनाई गई, जिससे कई वर्गों को लंबे समय तक अवसरों और शिक्षा से दूर रहना पड़ा।

उन्होंने कहा कि शूद्र वर्ग को वर्षों तक साक्षरता, ज्ञान और संसाधनों तक समान पहुंच नहीं मिल पाई। इसके कारण उनके लिए सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ना कठिन रहा। सिद्धारमैया ने कहा कि जब एक वर्ग शिक्षा और अवसरों से वंचित रहता है तो वह स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ने की प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाता है।

उन्होंने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि समाज में समान अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। उनका कहना था कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जिसके जरिए सामाजिक भेदभाव को कम किया जा सकता है और लोगों को आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है।

सिद्धारमैया ने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज की आपसी कमजोरियों और विभाजन का फायदा बाहरी ताकतों ने उठाया। उन्होंने कहा कि एकता की कमी के कारण ही अंग्रेजों को लंबे समय तक शासन करने का अवसर मिला।

उन्होंने सभी समुदायों और वर्गों से आपसी मतभेद दूर कर एकजुट होने की अपील की। सिद्धारमैया ने कहा कि समाज की प्रगति के लिए जरूरी है कि सभी लोग समानता और भाईचारे की भावना के साथ आगे बढ़ें।

कार्यक्रम में सामाजिक सुधार और तर्कसंगत सोच को बढ़ावा देने की जरूरत पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना समय की मांग है।

सिद्धारमैया ने कहा कि लोकतांत्रिक समाज में हर व्यक्ति को सम्मान और समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जाति, धर्म या किसी अन्य आधार पर भेदभाव समाज को कमजोर करता है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे शिक्षा, ज्ञान और वैज्ञानिक सोच को अपनी ताकत बनाएं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को पुराने भेदभाव से ऊपर उठकर एक बेहतर समाज बनाने में भूमिका निभानी चाहिए।

सिद्धारमैया के इस बयान के बाद कर्नाटक में सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। उनके समर्थकों ने इसे सामाजिक समानता की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश बताया, जबकि विरोधी दलों की ओर से इस पर प्रतिक्रिया आना बाकी है।

‘शूद्र सेवा संस्था’ के उद्घाटन कार्यक्रम का उद्देश्य सामाजिक समानता, शिक्षा और तर्कसंगत विचारों को बढ़ावा देना बताया गया। आयोजकों ने कहा कि संस्था समाज के सभी वर्गों के बीच जागरूकता और समानता की भावना को मजबूत करने का काम करेगी।

फिलहाल सिद्धारमैया का यह बयान सामाजिक न्याय और जातीय समानता के मुद्दे पर एक बार फिर बहस को तेज कर गया है। उन्होंने अपने संबोधन में शिक्षा, वैज्ञानिक सोच और सामाजिक एकता को समाज के विकास की आधारशिला बताया।

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