
बेंगलुरु : यात्रियों पर बस किराए का अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना एक बार फिर बढ़ गई है। पिछली बार किराया संशोधन के करीब 18 महीने बाद राज्य सरकार ने सार्वजनिक परिवहन किराए की समीक्षा के लिए ‘पब्लिक ट्रांसपोर्ट फेयर रेगुलेटरी कमिटी’ (PTFRC) का गठन किया है। इस समिति के गठन के बाद माना जा रहा है कि बस किराए में बढ़ोतरी को लेकर आने वाले समय में फैसला लिया जा सकता है।
परिवहन विभाग की ओर से 10 जुलाई को जारी सरकारी आदेश के अनुसार, रिटायर्ड IAS अधिकारी अतुल कुमार तिवारी को PTFRC का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। समिति का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के किराए से जुड़े मामलों की समीक्षा करना और किराया निर्धारण को लेकर सरकार को सुझाव देना होगा।
सरकार द्वारा गठित इस कमेटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यात्रियों की सुविधा और परिवहन सेवाओं की बढ़ती लागत के बीच संतुलन बनाना होगी। परिवहन क्षेत्र में ईंधन की कीमतों, वाहनों के रखरखाव, कर्मचारियों के वेतन और अन्य खर्चों में लगातार वृद्धि का हवाला देते हुए बस ऑपरेटर लंबे समय से किराया बढ़ाने की मांग करते रहे हैं।
वहीं, यात्रियों का कहना है कि बार-बार किराए में बढ़ोतरी से आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है। खासकर रोजाना बस से सफर करने वाले छात्र, कर्मचारी और कम आय वर्ग के यात्रियों के लिए किराया बढ़ना बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है।
सूत्रों के अनुसार, PTFRC सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगी। इसमें बस संचालन की लागत, यात्रियों की संख्या, मौजूदा किराया संरचना और परिवहन सेवाओं की आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दों को शामिल किया जा सकता है। समिति अपनी रिपोर्ट और सुझाव सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा।
इससे पहले राज्य में बस किराए में संशोधन किया जा चुका है। अब नई कमेटी के गठन के बाद किराया बढ़ोतरी की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किराया बढ़ाने का अंतिम निर्णय लिया गया है या नहीं।
परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किराया निर्धारण एक नियमित प्रक्रिया है, जिसके तहत समय-समय पर परिवहन सेवाओं की लागत और आर्थिक परिस्थितियों की समीक्षा की जाती है। समिति का गठन इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
PTFRC के गठन के बाद अब समिति के कामकाज, सदस्यों की भूमिका और समीक्षा प्रक्रिया पर नजर रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन के लिए एक स्थायी किराया नीति बनाना जरूरी है, ताकि बार-बार किराया संशोधन की स्थिति न बने और यात्रियों तथा परिवहन संचालकों दोनों के हितों का ध्यान रखा जा सके।
परिवहन विशेषज्ञों के अनुसार, केवल किराया बढ़ाना समस्या का समाधान नहीं है। इसके साथ-साथ बस सेवाओं की गुणवत्ता, समय पालन, यात्रियों की सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन के विस्तार पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। बेहतर सेवाएं मिलने पर यात्रियों में किराया वृद्धि को लेकर स्वीकार्यता बढ़ सकती है।
दूसरी ओर, बस ऑपरेटरों का तर्क है कि मौजूदा लागत के हिसाब से संचालन करना मुश्किल होता जा रहा है। ईंधन, स्पेयर पार्ट्स और कर्मचारियों से जुड़े खर्चों में बढ़ोतरी के कारण परिवहन सेवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए किराए की समीक्षा जरूरी है।
PTFRC के गठन के बाद आने वाले दिनों में समिति संबंधित पक्षों से चर्चा कर सकती है। इसमें परिवहन विभाग, बस संचालक संगठनों, यात्रियों के प्रतिनिधियों और अन्य विशेषज्ञों से सुझाव लिए जा सकते हैं।
सरकार की ओर से नियुक्त किए गए चेयरमैन अतुल कुमार तिवारी के अनुभव को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि समिति सार्वजनिक परिवहन किराया व्यवस्था को लेकर एक संतुलित नीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
फिलहाल यात्रियों की नजर समिति की सिफारिशों और सरकार के अंतिम फैसले पर है। यदि समिति किराया बढ़ाने की सिफारिश करती है और सरकार उसे मंजूरी देती है, तो आने वाले समय में बस यात्रियों को बढ़े हुए किराए का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, यात्रियों को उम्मीद है कि सरकार कोई भी फैसला लेने से पहले आम जनता की आर्थिक स्थिति और सुविधाओं को ध्यान में रखेगी।





