
Karnataka कर्नाटक: सरकार ने बांदीपुर और नागरहोल टाइगर रिज़र्व में पर्यटक सफारी को फिर से शुरू करने को हरी झंडी दे दी है। राज्य सरकार ने विशेषज्ञों की तकनीकी समिति द्वारा तय की गई पर्यावरणीय वहन क्षमता (carrying capacity) के आधार पर यह फैसला लिया है।
सरकारी आदेश के अनुसार, समिति की वैज्ञानिक रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए वन विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह तय सिफारिशों के अनुसार नियंत्रित तरीके से जंगल सफारी का संचालन सुनिश्चित करे। इसका उद्देश्य पर्यटन गतिविधियों और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना है।
सरकार का कहना है कि कर्नाटक में इकोटूरिज्म की व्यापक संभावनाएं हैं और राज्य एक ऐसे सतत पर्यटन मॉडल की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों को रोजगार और आजीविका के अवसर भी प्रदान कर सके।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नहीं, बल्कि जंगलों के पारिस्थितिक संतुलन को सुरक्षित रखते हुए संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने के लिए लिया गया है। साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी इससे लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष नवंबर में वन्यजीव हमलों की घटनाओं में वृद्धि के बाद बांदीपुर और नागरहोल राष्ट्रीय उद्यानों में सफारी गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। उस समय वन और पर्यावरण मंत्री ईश्वर बी. खंड्रे ने इस निर्णय को सुरक्षा के दृष्टिकोण से आवश्यक बताया था।
अब हालात और विशेषज्ञ रिपोर्ट के आधार पर सफारी संचालन को फिर से शुरू करने का फैसला लिया गया है, हालांकि इसे पूरी तरह नियंत्रित और निर्धारित मानकों के अनुसार ही चलाया जाएगा।
वन विभाग को निर्देश दिया गया है कि सफारी रूट, वाहनों की संख्या, समय और पर्यटकों की सीमा सभी पहलुओं पर कड़ी निगरानी रखी जाए ताकि वन्यजीवों पर किसी प्रकार का दबाव न पड़े।
स्थानीय पर्यटन से जुड़े लोगों ने इस निर्णय का स्वागत किया है, क्योंकि इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों और रोजगार के अवसरों में वृद्धि की संभावना है।
कुल मिलाकर, बांदीपुर और नागरहोल में सफारी का पुनः शुरू होना एक संतुलित कदम माना जा रहा है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश की गई है।





