कर्नाटक

कर्नाटक में SC/ST भूमि कानून के पेंडिंग मामलों पर विरोध तेज

Kavita2
7 May 2026 11:32 AM IST
कर्नाटक में SC/ST भूमि कानून के पेंडिंग मामलों पर विरोध तेज
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Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक में शेड्यूल्ड कास्ट्स एंड शेड्यूल्ड ट्राइब्स (प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ सर्टेन लैंड्स) एक्ट के तहत लंबित मामलों को लेकर राज्यभर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। यह कानून 1978 में तत्कालीन मुख्यमंत्री देवराज उर्स के कार्यकाल में लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों को दी गई भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

इस कानून के अनुसार SC/ST समुदाय को आवंटित भूमि को केवल सरकार की अनुमति के बाद ही खरीदा या बेचा जा सकता है। यदि कोई भूमि बिना उचित प्रक्रिया के हस्तांतरित की जाती है, तो उसे मूल मालिक को वापस लौटाने का प्रावधान है।

हालांकि, पिछले कुछ समय से इस कानून के तहत बड़ी संख्या में मामले लंबित पड़े हैं, जिन्हें लेकर अब एक्टिविस्ट और दलित संगठनों ने गंभीर नाराजगी जताई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पात्र लाभार्थियों को वर्षों से उनकी जमीन वापस नहीं मिल पा रही है, जिससे उन्हें न्याय से वंचित रहना पड़ रहा है।

सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि 2023 में किए गए संशोधन के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। इस संशोधन में अपील और स्वतः संज्ञान कार्रवाई से जुड़ी समय-सीमा की बाधाओं को हटाया गया था, ताकि मामलों का तेजी से निपटारा हो सके। इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर मामलों के समाधान में देरी जारी है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई मामलों में प्रशासनिक बाधाएं और AC (असिस्टेंट कमिश्नर) तथा DC (डिप्टी कमिश्नर) स्तर पर कथित “गलतियों” के कारण वास्तविक मालिकों को उनकी जमीन नहीं मिल पा रही है। इससे प्रभावित परिवारों को आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

कई संगठनों ने यह भी आरोप लगाया है कि लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे न्यायिक और प्रशासनिक प्रणाली पर दबाव बढ़ गया है। उनका कहना है कि कानून का उद्देश्य कमजोर वर्गों की सुरक्षा करना था, लेकिन इसके क्रियान्वयन में खामियों के कारण वही समुदाय प्रभावित हो रहे हैं।

सरकारी स्तर पर फिलहाल इस मुद्दे पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार मामलों की समीक्षा की जा रही है और समाधान के लिए प्रक्रियात्मक सुधारों पर विचार हो सकता है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी प्रभावी क्रियान्वयन प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। यदि मामलों का समय पर निपटारा किया जाए तो विवादों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

फिलहाल राज्य में विरोध प्रदर्शन जारी हैं और प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की है कि लंबित मामलों का शीघ्र समाधान किया जाए, ताकि पात्र लाभार्थियों को उनके अधिकार समय पर मिल सकें।

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