कर्नाटक

Bengaluru-चेन्नई हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट का अलाइनमेंट जारी, 306 किमी रूट तय

Kavita2
7 May 2026 11:12 AM IST
Bengaluru-चेन्नई हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट का अलाइनमेंट जारी, 306 किमी रूट तय
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Karnataka कर्नाटक: यूनियन बजट में बेंगलुरु को हैदराबाद और चेन्नई से जोड़ने वाले हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट्स की घोषणा के तीन महीने बाद भारतीय रेलवे ने इन दोनों प्रमुख रूट्स के लिए विस्तृत अलाइनमेंट जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही बेंगलुरु-मैसूर रूट का भी संभावित अलाइनमेंट सामने आया है, जिसे बजट में शामिल नहीं किया गया था।

बेंगलुरु-चेन्नई हाई-स्पीड रेल लाइन की कुल लंबाई लगभग 306 किलोमीटर तय की गई है। यह लाइन बैयप्पनहल्ली से शुरू होगी और कर्नाटक, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु के कई प्रमुख क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। अलाइनमेंट के अनुसार, यह रूट व्हाइटफील्ड, कोडिहल्ली (होसकोटे के पास) और कोलार (शहर से लगभग 5 किलोमीटर दूर) से होकर आगे बढ़ेगा।

आंध्र प्रदेश में यह लाइन चित्तूर क्षेत्र से गुजरेगी, जबकि तमिलनाडु में परंदूर और पूनमल्ले जैसे स्थानों को कवर करते हुए चेन्नई सेंट्रल पर समाप्त होगी। चेन्नई का यह टर्मिनल स्टेशन इस प्रोजेक्ट का अंतिम बिंदु होगा।

विशेष रूप से कांचीपुरम जिले का परंदूर क्षेत्र, जहां तमिलनाडु सरकार चेन्नई के लिए दूसरा हवाई अड्डा विकसित करने की योजना पर काम कर रही है, इस हाई-स्पीड रेल अलाइनमेंट का हिस्सा भी बनाया गया है। यह क्षेत्र भविष्य में एक प्रमुख ट्रांसपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में विकसित हो सकता है।

प्रस्तावित रूट के अनुसार, इस पूरी लाइन में कर्नाटक के भीतर लगभग 100.7 किलोमीटर का हिस्सा शामिल होगा। इस परियोजना के लिए कुल 1,358.96 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता बताई गई है, जिसे विभिन्न राज्यों में अधिग्रहित किया जाएगा।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट दक्षिण भारत के तीन प्रमुख महानगरों बेंगलुरु, चेन्नई और भविष्य में हैदराबाद के बीच यात्रा समय को काफी कम करने में मदद करेगा। इससे न केवल यात्री परिवहन तेज होगा, बल्कि आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने पर दक्षिण भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का एक मजबूत आधार तैयार होगा, जो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा। इसके साथ ही यह प्रोजेक्ट शहरी विकास और रियल एस्टेट सेक्टर पर भी बड़ा प्रभाव डाल सकता है।

फिलहाल रेलवे द्वारा जारी किए गए इस अलाइनमेंट को परियोजना की योजना प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। अगला चरण भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) से जुड़ा होगा।

इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को भारत के परिवहन ढांचे में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में दक्षिण भारत की कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदल सकता है।

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