
बेंगलुरु : शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से प्रस्तावित 2.5 किलोमीटर लंबी मिनी टनल रोड परियोजना और मेखरी सर्कल तक बनने वाले एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट अब कानूनी अड़चनों में फंसते नजर आ रहे हैं। इन दोनों परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं और इनके भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
मामला बैंगलोर मेट्रोपॉलिटन लैंड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (BMLTA) की भूमिका से जुड़ा है। आरोप है कि इन परियोजनाओं को बिना विस्तृत समीक्षा के मंजूरी दे दी गई और इसके लिए BMLTA एक्ट के नियम 24 (सेविंग्स क्लॉज) का सहारा लिया गया। अब यही नियम कानूनी चुनौती का सामना कर रहा है, जिससे दोनों परियोजनाओं की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
राज्य सरकार ने 8 दिसंबर, 2025 को मिनी टनल रोड और मेखरी सर्कल तक प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना को मंजूरी दी थी। इसके बाद से ही इनकी मंजूरी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों और कुछ अधिकारियों का तर्क है कि जब BMLTA एक्ट लागू हो चुका था, तब इन परियोजनाओं को भी प्राधिकरण की समीक्षा प्रक्रिया से गुजरना चाहिए था।
तर्क दिया जा रहा है कि जिस तरह हेब्बल से सिल्कबोर्ड तक प्रस्तावित लंबी टनल रोड परियोजना की BMLTA द्वारा समीक्षा की गई थी, उसी तरह अन्य बड़ी परिवहन परियोजनाओं की भी जांच होनी चाहिए थी। उनका कहना है कि शहर की यातायात योजना, पर्यावरणीय प्रभाव और परिवहन नेटवर्क पर असर को देखते हुए सभी बड़ी परियोजनाओं का एक समान मूल्यांकन जरूरी है।
हालांकि, इन दोनों परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए BMLTA एक्ट के नियम 24 का इस्तेमाल किया गया। इस नियम को सेविंग्स क्लॉज के रूप में जाना जाता है, जिसके तहत कुछ मामलों में पहले से स्वीकृत योजनाओं को नए नियमों के दायरे से बाहर रखने का प्रावधान किया जाता है।
अब इसी प्रावधान को लेकर कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं। चुनौती देने वालों का कहना है कि नियम 24 का इस्तेमाल करके परियोजनाओं को समीक्षा प्रक्रिया से बाहर रखना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि BMLTA जैसे संस्थान का उद्देश्य ही शहर की सभी प्रमुख परिवहन परियोजनाओं का समन्वित मूल्यांकन करना है।
बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते शहर में सड़क परियोजनाओं का असर केवल यातायात तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव पर्यावरण, शहरी विकास और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर भी पड़ता है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी देने से पहले व्यापक अध्ययन और समीक्षा आवश्यक है।
मिनी टनल रोड परियोजना को शहर में यातायात दबाव कम करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बेंगलुरु में बढ़ते ट्रैफिक जाम को देखते हुए सरकार लगातार नए बुनियादी ढांचे के विकल्पों पर काम कर रही है। वहीं, एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना का उद्देश्य भी प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रवाह को आसान बनाना है।
लेकिन यदि कानूनी चुनौती आगे बढ़ती है, तो इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी हो सकती है। इससे न केवल निर्माण योजनाएं प्रभावित होंगी, बल्कि शहर की ट्रैफिक सुधार रणनीति पर भी असर पड़ सकता है।
परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि बेंगलुरु में सड़क निर्माण से जुड़े फैसले केवल तात्कालिक यातायात समाधान के आधार पर नहीं लिए जाने चाहिए। भविष्य की जरूरतों, पर्यावरणीय प्रभाव और सार्वजनिक परिवहन के साथ तालमेल को ध्यान में रखना जरूरी है।
BMLTA का गठन शहर की विभिन्न परिवहन व्यवस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के उद्देश्य से किया गया था। इसका मकसद अलग-अलग एजेंसियों द्वारा बनाई जा रही परियोजनाओं की समीक्षा करना और एकीकृत परिवहन योजना तैयार करना है।
ऐसे में यदि किसी बड़ी परियोजना को BMLTA की समीक्षा से बाहर रखा जाता है, तो इससे प्राधिकरण की भूमिका पर भी सवाल उठ सकते हैं। यही वजह है कि नियम 24 और इसके इस्तेमाल को लेकर बहस तेज हो गई है।
फिलहाल इन परियोजनाओं को लेकर अंतिम स्थिति कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। यदि अदालत नियम 24 की वैधता या उसके इस्तेमाल पर सवाल उठाती है, तो परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा करनी पड़ सकती है।
बेंगलुरु के लोगों की नजर अब इस बात पर है कि मिनी टनल रोड और मेखरी सर्कल एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाएं तय समय पर आगे बढ़ पाती हैं या फिर कानूनी विवादों के कारण इनमें देरी होती है। शहर की यातायात समस्या के समाधान के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही इन योजनाओं का भविष्य अब कानूनी फैसले से तय होगा।





