
बेंगलुरु: गणेश चतुर्थी का त्योहार नजदीक आते ही शहर में तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन हलासुरु झील और उसकी कल्याणी (मूर्ति विसर्जन कुंड) में चल रहे विकास कार्यों के कारण इस साल गणेश मूर्तियों के विसर्जन को लेकर चिंता बनी हुई है। पिछले साल जहां हजारों श्रद्धालुओं ने यहां गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया था, वहीं इस बार निर्माण कार्य पूरा नहीं होने की स्थिति में भक्तों को वैकल्पिक व्यवस्था का सहारा लेना पड़ सकता है।
हलासुरु झील की कल्याणी में चल रहे जीर्णोद्धार कार्य की वजह से अभी यह पूरी तरह तैयार नहीं हो पाई है। अधिकारियों के अनुसार, अब तक इस परियोजना का करीब 30 प्रतिशत काम ही पूरा हुआ है। नगर निकाय का लक्ष्य है कि इस महीने के अंत तक विकास कार्यों को पूरा कर लिया जाए, ताकि 14 सितंबर को होने वाले गणेश उत्सव से पहले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
झील के रेनोवेशन कार्य की निगरानी कर रहे एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कल्याणी के विकास का काम तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य को समय पर पूरा करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, परियोजना की प्रगति और मौसम जैसी परिस्थितियों को देखते हुए अंतिम समय तक काम पूरा होने की चुनौती बनी हुई है।
हलासुरु झील शहर के प्रमुख स्थानों में से एक है, जहां हर साल बड़ी संख्या में गणेश मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है। पिछले वर्ष यहां करीब 50,000 गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया था। ऐसे में यदि इस बार किसी कारणवश प्रतिबंध लगाए जाते हैं या कल्याणी पूरी तरह तैयार नहीं होती है, तो श्रद्धालुओं को आसपास की अन्य विसर्जन कल्याणियों या मोबाइल विसर्जन टैंकों का उपयोग करना पड़ सकता है।
नगर निकाय और प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बड़ी गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन की व्यवस्था करना है। शहर में कई स्थानों पर 6 से 10 फीट तक ऊंची गणेश प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। ऐसी बड़ी मूर्तियों के लिए पर्याप्त जगह और सुरक्षित विसर्जन व्यवस्था की जरूरत होती है।
अधिकारियों के अनुसार, बड़ी मूर्तियों के विसर्जन के लिए अन्य विकल्पों में सीवी रमन नगर की कग्गाडासापुरा झील, शहर के पश्चिमी हिस्से में स्थित सैंकी झील और दक्षिण दिशा में येदियुर झील जैसे बड़े जलाशय शामिल हैं। इन स्थानों पर बड़ी प्रतिमाओं के विसर्जन की सुविधा अपेक्षाकृत बेहतर मानी जाती है।
एक इंजीनियर ने बताया कि परियोजना के महत्वपूर्ण चरणों में कंक्रीट से जुड़े काम को पूरा करना और कल्याणी में पानी भरने की व्यवस्था करना शामिल है। उन्होंने कहा कि यदि कंक्रीट का काम समय पर पूरा हो जाता है और पानी भरने की प्रक्रिया सफल रहती है, तो इसे परियोजना की बड़ी उपलब्धि माना जाएगा और विसर्जन के लिए व्यवस्था तैयार हो सकेगी।
गणेश उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिमाओं का विसर्जन करने पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन को न केवल विसर्जन स्थल तैयार करना होता है, बल्कि भीड़ नियंत्रण, साफ-सफाई और पर्यावरण सुरक्षा का भी ध्यान रखना पड़ता है। झीलों में विसर्जन से जल प्रदूषण की समस्या को देखते हुए प्रशासन लगातार सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल तरीकों को बढ़ावा दे रहा है।
मोबाइल विसर्जन टैंक भी ऐसे आयोजनों में एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर सामने आए हैं। इनका उपयोग खासतौर पर छोटी और मध्यम आकार की गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए किया जाता है। इससे प्राकृतिक जल स्रोतों पर दबाव कम करने में मदद मिलती है।
स्थानीय निवासियों और गणेश उत्सव आयोजकों की नजर अब हलासुरु झील की कल्याणी के काम की गति पर है। उनका कहना है कि समय पर व्यवस्था पूरी हो जाने से श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी और परंपरा के अनुसार विसर्जन कार्यक्रम आसानी से संपन्न हो सकेगा।
प्रशासन की कोशिश है कि गणेश चतुर्थी के दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। इसके लिए वैकल्पिक योजनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। यदि हलासुरु झील की कल्याणी समय पर तैयार नहीं हो पाती है, तो अन्य विसर्जन स्थलों और मोबाइल टैंकों की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
फिलहाल हलासुरु झील के विकास कार्य पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या कल्याणी गणेश उत्सव से पहले पूरी तरह तैयार हो पाती है या फिर श्रद्धालुओं को दूसरे विकल्पों का सहारा लेना पड़ेगा।





