
बेंगलुरु। राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए अब योग्य निजी स्कूल शिक्षकों के नाम पर भी विचार किया जा सकता है। मंत्री मधु बंगारप्पा ने शनिवार को कहा कि निजी स्कूलों के शिक्षकों को राज्य स्तरीय पुरस्कार के दायरे में शामिल करने की मांग सरकार के समक्ष आई है। इस प्रस्ताव की सरकारी स्तर पर समीक्षा की जा रही है और संबंधित पक्षों के साथ आगे बातचीत करने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
मंत्री मधु बंगारप्पा अत्तिबेले स्थित सेंट फिलोमेना इंस्टीट्यूट में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। अनेकल तालुक प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन की ओर से यहां प्रतिभा पुरस्कार वितरण, संगठन की छठी वर्षगांठ और शिक्षक दिवस समारोह आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में निजी स्कूलों के संचालक, शिक्षक, विद्यार्थी और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल हुए।
मंत्री ने कहा कि राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए निजी स्कूलों में कार्यरत योग्य शिक्षकों के योगदान पर विचार करने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। निजी शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने इस विषय को सरकार के सामने रखा है। प्रस्ताव पर अभी विचार-विमर्श चल रहा है और सभी आवश्यक पहलुओं की समीक्षा के बाद निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से जुड़ी मौजूदा प्रक्रिया में बदलाव की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। मंत्री ने भी स्पष्ट किया कि सरकार इस मांग पर विचार कर रही है। इसलिए निजी स्कूल शिक्षकों को पुरस्कार में शामिल करने का फैसला अभी अंतिम नहीं माना जाएगा। आगे होने वाली बैठकों और विभागीय समीक्षा के बाद सरकार अपना रुख स्पष्ट करेगी।
निजी स्कूल संगठनों का तर्क है कि उनके संस्थानों में कार्यरत शिक्षक भी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों का भविष्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई शिक्षक लंबे समय से अध्यापन के साथ विभिन्न शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों में योगदान दे रहे हैं। ऐसे शिक्षकों को भी उनके कार्य के आधार पर राज्य स्तर पर सम्मानित किए जाने की मांग की जा रही है।
राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए पात्रता, चयन प्रक्रिया और मूल्यांकन के निर्धारित मानदंड होते हैं। यदि निजी स्कूल शिक्षकों को इसमें शामिल करने का निर्णय लिया जाता है तो सरकार को पात्रता और चयन के लिए स्पष्ट नियम तैयार करने होंगे। निजी स्कूलों की संख्या और उनमें कार्यरत शिक्षकों को देखते हुए नामांकन एवं सत्यापन की व्यवस्थित प्रक्रिया भी बनानी होगी।
कार्यक्रम के दौरान निजी स्कूलों की ओर से सरकार के समक्ष रखी गई अन्य मांगों का भी उल्लेख किया गया। मधु बंगारप्पा ने कहा कि निजी शिक्षण संस्थानों से जुड़ी विभिन्न मांगों की जांच की जा रही है। सरकार इन मांगों के प्रशासनिक, शैक्षणिक और व्यावहारिक पहलुओं पर विचार करने के बाद उचित निर्णय लेगी।
इन मांगों में बेंगलुरु की यातायात समस्या को देखते हुए निजी स्कूलों के समय में बदलाव करने का अनुरोध भी शामिल है। शहर में सुबह और शाम के व्यस्त समय के दौरान सड़कों पर भारी दबाव रहता है। स्कूल बसों, अभिभावकों के वाहनों और कार्यालय जाने वाले लोगों की आवाजाही एक ही समय पर होने से कई प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति बनती है।
निजी स्कूलों के प्रतिनिधियों ने स्कूलों के समय में ऐसा बदलाव करने की मांग की है, जिससे विद्यार्थियों की आवाजाही व्यस्त यातायात के समय से अलग हो सके। उनका मानना है कि इससे स्कूल बसों और बच्चों को सड़क पर कम समय बिताना पड़ेगा तथा कुछ मार्गों पर यातायात का दबाव भी कम हो सकता है। हालांकि समय बदलने से विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों की दिनचर्या पर भी असर पड़ेगा।
मंत्री ने कहा कि स्कूलों के समय में बदलाव का निर्णय अकेले शिक्षा विभाग के स्तर पर नहीं लिया जाएगा। इस विषय पर संबंधित विभागों के साथ चर्चा की जाएगी। यातायात व्यवस्था, विद्यार्थियों की सुरक्षा, स्कूल बसों का संचालन और अभिभावकों की सुविधा जैसे सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही फैसला लिया जाएगा।
स्कूल समय में बदलाव के लिए यातायात विभाग, परिवहन विभाग और शिक्षा विभाग के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा। यह भी देखना होगा कि अलग-अलग क्षेत्रों में यातायात की स्थिति कैसी है और क्या पूरे शहर में समान समय लागू करना व्यावहारिक होगा। किसी निर्णय से पहले स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों की राय पर भी विचार किया जा सकता है।
बेंगलुरु में बड़ी संख्या में सरकारी और निजी स्कूल संचालित हैं। यदि स्कूलों के समय में व्यापक बदलाव किया जाता है तो लाखों विद्यार्थियों तथा उनके परिवारों की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है। इसलिए इस विषय पर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय विस्तृत विचार-विमर्श आवश्यक माना जा रहा है। मंत्री ने भी संबंधित विभागों से चर्चा के बाद निर्णय लेने की बात कही है।
अनेकल तालुक प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन के कार्यक्रम में विद्यार्थियों की प्रतिभा और शिक्षकों के योगदान को सम्मानित किया गया। संगठन की छठी वर्षगांठ और शिक्षक दिवस समारोह के संयुक्त आयोजन में शिक्षा के क्षेत्र में निजी संस्थानों की भूमिका पर चर्चा हुई। इस दौरान निजी स्कूलों से जुड़े मुद्दों को सरकार के सामने रखने का अवसर भी मिला।
प्रतिभा पुरस्कार के माध्यम से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों और शिक्षा क्षेत्र में योगदान देने वालों को प्रोत्साहित किया गया। समारोह में शिक्षकों की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्हें शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। इसी मंच से निजी स्कूल शिक्षकों को राज्य स्तरीय पुरस्कारों में अवसर देने की मांग प्रमुखता से उठी।
मधु बंगारप्पा के बयान से निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के बीच सम्मान मिलने की उम्मीद जगी है। हालांकि सरकार को अंतिम फैसला लेने से पहले पुरस्कार चयन की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी। सरकारी और निजी दोनों संस्थानों के शिक्षकों के लिए समान मूल्यांकन मानदंड तैयार करना भी महत्वपूर्ण रहेगा।
फिलहाल सरकार के सामने दो प्रमुख प्रस्ताव हैं—निजी स्कूलों के योग्य शिक्षकों को राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए पात्र बनाना और यातायात की समस्या को देखते हुए निजी स्कूलों के समय में बदलाव करना। दोनों प्रस्ताव अभी समीक्षा और विचार-विमर्श के चरण में हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि संबंधित पक्षों एवं विभागों से चर्चा पूरी होने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।





