
यादगीर। वन क्षेत्र में जानवरों के अवैध शिकार के आरोप में वन विभाग ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से छह बंदूकें भी जब्त की गई हैं। अधिकारियों के अनुसार विभाग को रात में यादगीर वन क्षेत्र के बागुलमाडु इलाके में कुछ लोगों के शिकार करने की सूचना मिली थी। इसके बाद टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की और संदिग्धों को हिरासत में ले लिया। सभी आरोपियों को आगे की जांच के लिए अदालत में पेश किया गया है।
पुलिस ने शनिवार को इस कार्रवाई की जानकारी दी। यादगीर के क्षेत्रीय वन अधिकारी बुरान-उद्दीन ने बताया कि वन विभाग को बागुलमाडु इलाके में कुछ लोगों की संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी। जानकारी के अनुसार कुछ लोग हथियार लेकर वन क्षेत्र में पहुंचे थे और उन पर जानवरों का शिकार करने का आरोप है।
सूचना मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम ने संबंधित क्षेत्र में अभियान चलाया। टीम ने सात लोगों को पकड़ा और उनके पास मौजूद छह बंदूकें जब्त कर लीं। वन विभाग अब यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि आरोपी वन क्षेत्र में किस उद्देश्य से पहुंचे थे और क्या उन्होंने किसी जानवर का शिकार किया था।
क्षेत्रीय वन अधिकारी बुरान-उद्दीन ने बताया कि सभी गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश किया गया है। अदालत की प्रक्रिया के बाद मामले में आगे की जांच की जाएगी। आरोपियों से पूछताछ के माध्यम से उनके वन क्षेत्र में पहुंचने, बंदूकें रखने और कथित शिकार की योजना से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी।
अधिकारी ने कहा कि विभाग को रात के समय यादगीर वन क्षेत्र के बागुलमाडु इलाके में कुछ लोगों द्वारा शिकार किए जाने की सूचना मिली थी। टीम को मौके पर छह बंदूकें मिलीं। इसके आधार पर सातों लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। बरामद सभी हथियारों को वन विभाग ने जब्त कर लिया है।
वन विभाग ने फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया है कि आरोपियों के निशाने पर कौन सा जानवर था। मौके से किसी मृत या घायल वन्यजीव के बरामद होने की जानकारी भी नहीं दी गई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि आरोपियों ने वास्तव में किसी जानवर का शिकार किया था या वे शिकार की तैयारी में वन क्षेत्र में पहुंचे थे।
जब्त बंदूकों के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों को यह पता लगाना होगा कि सभी हथियार वैध लाइसेंस वाले थे या अवैध रूप से रखे गए थे। इसके साथ ही हथियारों के मालिकों और उनके इस्तेमाल की जांच भी मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।
एक साथ छह बंदूकें मिलने के कारण वन विभाग इस घटना को गंभीरता से ले रहा है। इतनी संख्या में हथियार लेकर वन क्षेत्र में लोगों की मौजूदगी ने सुरक्षा संबंधी सवाल खड़े किए हैं। जांच में यह भी पता लगाया जा सकता है कि गिरफ्तार लोग किसी संगठित समूह के रूप में काम कर रहे थे या पहली बार इस तरह की गतिविधि में शामिल हुए थे।
बागुलमाडु क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई के बाद आसपास के वन क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जा सकती है। रात के समय होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए गश्त और स्थानीय सूचना तंत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस मामले में भी वन विभाग को पहले सूचना मिली और उसी आधार पर आरोपियों तक पहुंचा गया।
वन्यजीवों का अवैध शिकार गंभीर अपराध माना जाता है। वन क्षेत्रों में बिना अनुमति हथियार लेकर प्रवेश करना और जानवरों को निशाना बनाना वन्यजीव सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है। ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए वन विभाग समय-समय पर अभियान चलाता है और संदिग्धों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करता है।
इस कार्रवाई से करीब एक महीने पहले कावेरी वन्यजीव अभयारण्य में कथित अवैध शिकार रोकने के दौरान हुई गोलीबारी का मामला सामने आया था। 15 अगस्त को चामराजनगर जिले स्थित अभयारण्य में वन विभाग की गोलीबारी में तमिलनाडु के तीन लोगों की मौत हो गई थी।
पिछली घटना को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। घटना के अलग-अलग पक्षों और वन विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए थे। कथित शिकार विरोधी अभियान के दौरान तीन लोगों की मौत ने वन क्षेत्रों में कार्रवाई के तरीके और बल प्रयोग को लेकर बहस छेड़ दी थी।
इसके करीब एक महीने बाद यादगीर में अवैध शिकार के आरोप में सात लोगों की गिरफ्तारी हुई है। हालांकि दोनों घटनाएं अलग-अलग स्थानों और परिस्थितियों से जुड़ी हैं। यादगीर के मामले में आरोपियों को जिंदा पकड़कर अदालत में पेश किया गया है और उनके पास से छह बंदूकें जब्त की गई हैं।
वन विभाग के सामने अब आरोपियों के खिलाफ सबूत एकत्र करने की जिम्मेदारी है। मौके पर उनकी मौजूदगी, बरामद हथियारों और संभावित शिकार से जुड़े तथ्यों की जांच की जाएगी। यदि किसी जानवर के शिकार के प्रमाण मिलते हैं तो उससे संबंधित जानकारी और साक्ष्यों को भी अदालत के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।
अदालत में पेश किए जाने के बाद आरोपियों की कानूनी स्थिति न्यायिक आदेश के आधार पर तय होगी। उन पर कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं, इस संबंध में अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। वन विभाग ने मुख्य रूप से सात लोगों की गिरफ्तारी और छह बंदूकों की जब्ती की पुष्टि की है।
इस कार्रवाई में स्थानीय स्तर से मिली सूचना अहम रही। रात के समय वन क्षेत्र में संदिग्ध लोगों की मौजूदगी की खबर मिलते ही अधिकारियों ने टीम को सक्रिय किया। समय पर पहुंचने के कारण सभी सात संदिग्धों को पकड़ लिया गया और हथियार जब्त कर लिए गए।
मामले की जांच में यह भी देखा जाएगा कि गिरफ्तार लोगों का किसी अन्य शिकार की घटना से संबंध है या नहीं। उनके पास छह बंदूकें कैसे पहुंचीं और वे बागुलमाडु इलाके में कितने समय से मौजूद थे, जैसे सवालों के जवाब पूछताछ के बाद सामने आ सकते हैं।
फिलहाल वन विभाग ने आरोपियों को अदालत के सामने पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। बरामद हथियार विभाग के कब्जे में हैं। जांच पूरी होने के बाद कथित शिकार की योजना, आरोपियों की भूमिका और वन्यजीवों को हुए संभावित नुकसान की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बागुलमाडु की घटना ने एक बार फिर वन क्षेत्रों में अवैध हथियारों और शिकार की गतिविधियों को रोकने के लिए सतर्क निगरानी की आवश्यकता सामने रखी है। विभाग की कार्रवाई के बाद क्षेत्र में शिकार से जुड़े अन्य संभावित लोगों या नेटवर्क के बारे में भी जानकारी मिलने की उम्मीद है। फिलहाल सभी सात लोगों पर लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और अंतिम निर्णय अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगा।





