
Karnataka कर्नाटक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 10 जून को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल की तुलना में सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री के रूप में सेवा देने का रिकॉर्ड कायम किया। इस मौके पर एनडीए गठबंधन ने संसद में एक बधाई प्रस्ताव पास किया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्व क्षमता और दशकों की सार्वजनिक सेवा की सराहना की गई।
एनडीए नेताओं ने इस अवसर पर मोदी की उपलब्धियों को देश के लिए किए गए महत्वपूर्ण योगदान के रूप में पेश किया और प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान लागू हुई विभिन्न योजनाओं, जैसे आर्थिक सुधार, डिजिटल इंडिया, उज्ज्वला योजना और बुनियादी ढांचे में निवेश, का हवाला दिया। नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार के लगातार 12 साल सत्ता में रहने से देश की स्थिरता और नीति निरंतरता बनी है।
वहीं, विपक्षी दलों ने इस मौके को आलोचना के लिए इस्तेमाल किया। गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने सोशल मीडिया पर मोदी सरकार के 12 साल के इतिहास की कथित नाकामियों की सूची साझा की और इसे "हिंडोला" करार दिया। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान गरीबी, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और महंगाई जैसी चुनौतियों में सुधार की बजाय जनता को झूलने का अनुभव हुआ।
इस तरह विपक्ष और सरकार के बीच आमने-सामने बयानबाजी जारी रही। एनडीए ने विपक्ष की आलोचना को राजनीतिक दिखावटी कदम बताया, जबकि विपक्ष ने जनता के वास्तविक मुद्दों की अनदेखी का आरोप लगाया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह राजनीतिक टकराव इस बात को दर्शाता है कि प्रधानमंत्री मोदी के लंबे कार्यकाल के प्रतीकात्मक महत्व को लेकर भारतीय राजनीति में गहरी बहस जारी है। जबकि सरकार इसे उपलब्धियों और स्थिर नेतृत्व के रूप में प्रस्तुत करती है, विपक्ष इसे नीतिगत कमियों और सामाजिक आर्थिक प्रभावों के नजरिए से चुनौती देता है।
प्रधानमंत्री मोदी के 12 साल के कार्यकाल में भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी भूमिका मजबूत की और कई आर्थिक सुधार लागू किए। इसी अवधि में विभिन्न सामाजिक योजनाएं भी शुरू की गईं, जिनमें ग्रामीण और शहरी विकास, महिलाओं और किसानों के लिए योजनाएं शामिल हैं।
इस मौके पर पूरे देश में अलग-अलग राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों ने अपने-अपने तरीके से प्रतिक्रिया दी। एनडीए ने इसे उत्सव का अवसर बताया, जबकि विपक्ष ने इसे आलोचनात्मक समीक्षा का समय करार दिया।





