कर्नाटक

कर्नाटक ने केंद्र से VB-G RAM G एक्ट के तहत मिनिमम वेज बढ़ाने की अपील की

Kavita2
10 Jun 2026 10:52 AM IST
कर्नाटक ने केंद्र से VB-G RAM G एक्ट के तहत मिनिमम वेज बढ़ाने की अपील की
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Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक के रूरल डेवलपमेंट और पंचायत राज (RDPR) मिनिस्टर ईश्वर खंड्रे ने केंद्र सरकार से VB-G RAM G एक्ट के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों की मिनिमम वेज बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने बढ़ती महंगाई और रोज़मर्रा की आवश्यकताओं की कीमतों में वृद्धि को आधार बनाकर यह मांग की।

खंड्रे ने यह अपील केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ हुई एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान की। उन्होंने कहा कि कर्नाटक राज्य ने पहले ही अपने श्रमिकों के लिए अधिक मिनिमम वेज को मंज़ूरी दे दी है और केंद्र से भी राज्य की तरह रूरल जॉब स्कीम के तहत मजदूरों की तनख्वाह बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है।

केंद्र ने नई ग्रामीण रोजगार स्कीम के तहत 60:40 फंडिंग पैटर्न के तहत कर्नाटक को 5,709.90 करोड़ रुपये का अंतरिम एलोकेशन किया है। यह राशि 1 जुलाई से लागू होगी। इसके अनुसार, राज्य सरकार अपने हिस्से के तौर पर 3,806.60 करोड़ रुपये प्रदान करेगी। यह फंडिंग पैटर्न सुनिश्चित करता है कि राज्य और केंद्र दोनों मिलकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और विकास योजनाओं को सुचारू रूप से लागू कर सकें।

खंड्रे ने कहा कि VB-G RAM G एक्ट को लागू करने और मजदूरों की वेज बढ़ाने के मुद्दे पर एक उच्च स्तरीय बैठक 28 और 29 जून को नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी। इस बैठक में देश के सभी राज्यों के RDPR मिनिस्टर्स शामिल होंगे। कर्नाटक की तरफ से खंड्रे बैठक में भाग लेंगे और राज्य की मांगों को प्रस्तुत करेंगे।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि बढ़ती महंगाई और ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन यापन की लागत को देखते हुए मजदूरों की तनख्वाह में वृद्धि अनिवार्य है। उनका कहना था कि इससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और रोजगार योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर केंद्र कर्नाटक की इस मांग को स्वीकार करता है, तो यह कदम पूरे देश में ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूरों के लिए एक मिसाल साबित होगा। इससे न केवल मजदूरों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि ग्रामीण रोजगार योजनाओं की प्रभावशीलता भी बढ़ेगी।

केंद्रीय और राज्य सरकार की यह पहल ग्रामीण विकास और रोजगार के क्षेत्र में एक संतुलित और समन्वित दृष्टिकोण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि सरकारें मजदूरों की भलाई और जीवन स्तर सुधार को प्राथमिकता दे रही हैं।

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