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कर्नाटक में पंचायत चुनाव जल्द कराने की तैयारी

Kavita2
30 Sept 2026 12:58 PM IST
कर्नाटक में पंचायत चुनाव जल्द कराने की तैयारी
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बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने ग्राम पंचायत, तालुक पंचायत और जिला पंचायत चुनाव जल्द से जल्द कराने की दिशा में प्रक्रिया तेज कर दी है। सहकारिता मंत्री लक्ष्मण सावदी ने कहा है कि सरकार चुनाव के लिए तैयार है और आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया पूरी होते ही चुनावी अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है। उन्होंने यह बात हसन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही।

सावदी ने कहा कि पंचायत चुनाव लंबे समय से लंबित हैं और अब सरकार इन्हें आगे बढ़ाने के पक्ष में है। उन्होंने बताया कि सीटों के आरक्षण को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। इससे जुड़े दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए जाएंगे और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरक्षण की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। इसके बाद चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

कर्नाटक में तालुक पंचायत और जिला पंचायत चुनाव कई वर्षों से नहीं हो पाए हैं। केंद्र सरकार की ओर से दिसंबर 2025 में लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, राज्य में 2020-21 के बाद से कुछ परिस्थितियों के कारण इन चुनावों में देरी हुई और इस दौरान प्रशासकों के माध्यम से कामकाज चलाया गया।

सरकार का कहना है कि चुनाव कराने के लिए प्रशासनिक तैयारी की जा रही है। आरक्षण का मुद्दा इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है। विभिन्न वर्गों के लिए सीटों के आरक्षण और निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित कर सकता है।

सहकारिता मंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा चुनाव टालने की नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होते ही चुनाव कराए जाएंगे। हालांकि चुनाव की सटीक तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।

पंचायत चुनावों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी लंबे समय से इंतजार है। ग्राम पंचायत, तालुक पंचायत और जिला पंचायत स्थानीय शासन की महत्वपूर्ण इकाइयां हैं और इनके जरिए ग्रामीण विकास, सड़क, पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी योजनाओं के क्रियान्वयन में स्थानीय प्रतिनिधियों की भूमिका रहती है।

हसन जिले में भी पंचायत व्यवस्था का बड़ा नेटवर्क है। जिले में एक जिला पंचायत, आठ तालुक पंचायत और 261 ग्राम पंचायत हैं। ऐसे में चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद जिले में भी बड़े स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच राज्य सरकार के सामने सूखे की गंभीर चुनौती भी है। सावदी ने कहा कि इस बार बारिश बेहद कम हुई है और स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों में इस तरह की कम वर्षा देखने को नहीं मिली।

राज्य में कम बारिश का असर खेती, जलाशयों और पेयजल व्यवस्था पर पड़ रहा है। उपलब्ध ताजा आंकड़ों के अनुसार कर्नाटक के बड़े हिस्से में वर्षा की कमी दर्ज की गई है और कई तालुक सूखे की चपेट में हैं। कुछ रिपोर्टों में राज्य के 217 तालुकों में वर्षा की कमी की स्थिति बताई गई है।

राज्य सरकार पहले ही कई तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित कर चुकी है। 22 सितंबर को जारी अधिसूचना के तहत अतिरिक्त 53 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया, जिनमें 51 को गंभीर और दो को मध्यम श्रेणी में रखा गया। इसके साथ ही संबंधित जिलों में राहत और नुकसान के आकलन की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

सावदी ने कहा कि फसल नुकसान, पशुधन की सुरक्षा और पेयजल की उपलब्धता से जुड़े मुद्दों पर सर्वे कराया जा रहा है। इस सर्वे के आधार पर नुकसान का विस्तृत आकलन तैयार किया जाएगा और रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।

सरकार का फोकस सबसे पहले प्रभावित किसानों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने पर है। जिन क्षेत्रों में फसलें बारिश की कमी से प्रभावित हुई हैं, वहां कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों को नुकसान का सर्वे करने की जिम्मेदारी दी गई है।

राज्य सरकार पहले ही सूखा प्रभावित किसानों के लिए राहत की घोषणा कर चुकी है। सरकार ने कुछ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के लिए 2,500 रुपये की इनपुट सहायता देने का फैसला किया है। साथ ही केंद्र सरकार से भी राहत राशि उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

सावदी ने कहा कि सूखे जैसी स्थिति का सामना केवल राज्य सरकार के स्तर पर करना आसान नहीं है। इसके लिए केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को हुए नुकसान की भरपाई और राहत पहुंचाने की जिम्मेदारी दोनों स्तरों की सरकारों की है।

राज्य सरकार का कहना है कि सूखा राहत में फसल नुकसान के साथ पशुओं के लिए चारे और पानी की उपलब्धता, गांवों में पेयजल व्यवस्था और जलस्रोतों की स्थिति को भी शामिल किया जा रहा है। जिन इलाकों में स्थिति गंभीर है, वहां प्राथमिकता के आधार पर राहत उपाय लागू किए जा सकते हैं।

सूखा प्रभावित तालुकों की पहचान भी वैज्ञानिक आकलन के आधार पर की जा रही है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्षा के आंकड़ों, फसल स्थिति और जमीनी सत्यापन के आधार पर ही किसी तालुक को सूखाग्रस्त घोषित किया जा रहा है।

एक ओर सरकार पंचायत चुनाव की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में सूखा राहत और कृषि संकट बड़ी प्रशासनिक चुनौती बना हुआ है। ऐसे में पंचायत चुनाव के दौरान ग्रामीण मुद्दे राजनीतिक बहस का प्रमुख हिस्सा बन सकते हैं।

फिलहाल सरकार की प्राथमिकता आरक्षण प्रक्रिया को अंतिम रूप देना और अदालत में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करना है। इसके बाद चुनाव कार्यक्रम पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

सहकारिता मंत्री लक्ष्मण सावदी के बयान से संकेत मिला है कि चुनाव की अधिसूचना अब ज्यादा दूर नहीं है। पंचायत चुनावों की तारीख घोषित होने के बाद राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो जाएंगी, जबकि सूखे और किसान राहत का मुद्दा भी चुनावी चर्चा के केंद्र में रहने की संभावना है।

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