
बेंगलुरु। कर्नाटक के चर्चित सौजन्या रेप और मर्डर केस की दोबारा जांच शुरू होने से पहले विशेष जांच दल यानी SIT को झटका लगा है। बेंगलुरु ग्रामीण जिले के एडिशनल सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस डॉ. वेंकटेश प्रसन्ना ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर इस मामले की जांच के लिए गठित SIT से खुद को हटाने की मांग की है। बताया जा रहा है कि उन्होंने यह फैसला सौजन्या की मां की ओर से उनकी नियुक्ति पर आपत्ति जताए जाने के बाद लिया है।
डॉ. वेंकटेश प्रसन्ना उस SIT का हिस्सा थे, जिसे राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सौजन्या मामले की दोबारा जांच के लिए गठित किया था। टीम के गठन के साथ ही लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे परिवार और समर्थकों को उम्मीद थी कि मामले से जुड़े पुराने तथ्यों, सबूतों और जांच के विभिन्न पहलुओं की नए सिरे से समीक्षा की जाएगी।
हालांकि जांच औपचारिक रूप से आगे बढ़ने से पहले ही SIT के एक अधिकारी द्वारा खुद को टीम से अलग करने की मांग सामने आने से नई स्थिति पैदा हो गई है। अब राज्य सरकार को उनके अनुरोध पर फैसला लेना होगा। यदि सरकार उनकी मांग स्वीकार करती है तो उनके स्थान पर किसी अन्य अधिकारी को SIT में शामिल किया जा सकता है।
जानकारी के अनुसार सौजन्या की मां ने डॉ. वेंकटेश प्रसन्ना की SIT में मौजूदगी को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद अधिकारी ने सरकार को पत्र लिखकर कहा कि वह टीम से हटना चाहते हैं। माना जा रहा है कि उनका उद्देश्य जांच प्रक्रिया को लेकर किसी भी तरह के विवाद या अविश्वास की स्थिति से बचना है।
सौजन्या मामला कर्नाटक के उन आपराधिक मामलों में शामिल है, जिनको लेकर लंबे समय से सार्वजनिक बहस और आंदोलन होते रहे हैं। मामले में पीड़ित परिवार लगातार निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग करता रहा है। इसी कारण दोबारा जांच के लिए गठित SIT की संरचना और उसमें शामिल अधिकारियों को लेकर भी परिवार की अपेक्षाएं काफी अधिक हैं।
परिवार की ओर से यह मांग रही है कि जांच पूरी तरह स्वतंत्र, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से हो। ऐसे में किसी अधिकारी को लेकर उठी आपत्ति को गंभीर माना जा रहा है। जांच एजेंसी के प्रति पीड़ित परिवार का भरोसा भी किसी संवेदनशील मामले में बेहद महत्वपूर्ण होता है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने मामले की दोबारा जांच के लिए SIT गठित की थी। टीम को पुराने रिकॉर्ड, उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और पहले हुई जांच से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा करनी है। इसके साथ ही यदि किसी नए तथ्य या सुराग की जानकारी सामने आती है तो उसकी भी जांच की जा सकती है।
सौजन्या की हत्या और यौन उत्पीड़न का मामला लंबे समय से राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है। मामले की शुरुआती जांच और बाद की कानूनी प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं। पीड़ित परिवार और विभिन्न संगठनों ने कई बार दावा किया कि मामले की पूरी सच्चाई सामने नहीं आई और वास्तविक दोषियों की पहचान के लिए नए सिरे से जांच जरूरी है।
नई SIT से उम्मीद की जा रही है कि वह पहले की जांच में उठाए गए सभी सवालों का परीक्षण करेगी। इसके लिए टीम पुराने केस रिकॉर्ड, फोरेंसिक दस्तावेज और अन्य उपलब्ध सामग्री का अध्ययन कर सकती है। जिन लोगों के बयान पहले दर्ज किए गए थे, जरूरत पड़ने पर उनसे दोबारा पूछताछ भी की जा सकती है।
डॉ. वेंकटेश प्रसन्ना के हटने की मांग के बाद अब ध्यान राज्य सरकार के अगले कदम पर है। सरकार को यह तय करना होगा कि उन्हें SIT से मुक्त किया जाए या टीम में बनाए रखा जाए। यदि उन्हें हटाया जाता है तो जांच की गति प्रभावित न हो, इसके लिए किसी अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की नियुक्ति की संभावना रहेगी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए SIT की विश्वसनीयता बेहद महत्वपूर्ण है। पीड़ित परिवार की ओर से किसी अधिकारी को लेकर आपत्ति सामने आने के बाद सरकार के लिए ऐसा फैसला करना जरूरी होगा जिससे जांच प्रक्रिया पर किसी पक्ष का अविश्वास न रहे।
दूसरी ओर डॉ. वेंकटेश प्रसन्ना की ओर से खुद हटने का अनुरोध यह संकेत देता है कि वह जांच से जुड़े विवाद से दूर रहना चाहते हैं। हालांकि अंतिम निर्णय राज्य सरकार को ही लेना है। सरकार की मंजूरी मिलने तक वह तकनीकी रूप से SIT के सदस्य बने रह सकते हैं।
सौजन्या की मां और परिवार लंबे समय से मामले में न्याय की मांग कर रहे हैं। दोबारा जांच की घोषणा को परिवार के लिए महत्वपूर्ण कदम माना गया था। अब उनकी नजर इस बात पर रहेगी कि SIT किस स्वरूप में जांच आगे बढ़ाती है और पुराने मामले से जुड़े किन बिंदुओं की दोबारा पड़ताल की जाती है।
इस मामले में जांच एजेंसी के सामने भी बड़ी चुनौती होगी। घटना से काफी समय बीत जाने के कारण पुराने साक्ष्यों को दोबारा परखना, गवाहों से संपर्क करना और घटनाक्रम की कड़ियों को नए सिरे से जोड़ना आसान नहीं होगा। इसके बावजूद SIT को उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर निष्पक्ष जांच करनी होगी।
दोबारा जांच के दौरान यह भी महत्वपूर्ण रहेगा कि पहले की जांच में किन पहलुओं को पर्याप्त रूप से देखा गया था और किन बिंदुओं पर आगे जांच की गुंजाइश है। किसी भी नए निष्कर्ष को ठोस साक्ष्यों के आधार पर स्थापित करना होगा।
फिलहाल डॉ. वेंकटेश प्रसन्ना की ओर से SIT से हटने के लिए भेजा गया पत्र सरकार के पास है। उनके अनुरोध पर आधिकारिक निर्णय आने के बाद ही यह साफ होगा कि वह टीम का हिस्सा बने रहेंगे या किसी दूसरे अधिकारी को उनकी जगह जिम्मेदारी दी जाएगी।
सौजन्या केस की दोबारा जांच शुरू होने से ठीक पहले सामने आए इस घटनाक्रम ने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी राज्य सरकार और SIT की होगी कि जांच को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाया जाए और पीड़ित परिवार की ओर से उठाई गई चिंताओं का भी समाधान किया जाए।





