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बेंगलुरु। कर्नाटक में संभावित अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार के मंत्रियों को खुफिया जानकारी के आधार पर सतर्क रहने की चेतावनी दिए जाने का मामला सामने आया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, जी. परमेश्वर ने कहा कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने राज्य के मंत्रियों को संभावित स्टिंग ऑपरेशन से सावधान रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इस तरह की गतिविधियां सरकार के खिलाफ किसी साजिश का हिस्सा हो सकती हैं। हालांकि, किसी संगठित साजिश या स्टिंग ऑपरेशन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।परमेश्वर ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि मुख्यमंत्री को राज्य के खुफिया विभाग से कुछ ऐसी जानकारी मिली होगी, जिसके आधार पर उन्होंने मंत्रियों को सावधान करना आवश्यक समझा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री खुफिया विभाग के कामकाज की निगरानी करते हैं और संबंधित सूचनाओं के आधार पर जरूरी कदम उठाते हैं।
खुफिया जानकारी के आधार पर मंत्रियों को चेतावनी
परमेश्वर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन लोगों को सतर्क किया, जिन्हें खुफिया जानकारी के आधार पर सावधान करना जरूरी समझा गया। उन्होंने संकेत दिया कि कुछ निजी एजेंसियों द्वारा अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन किए जाने की सूचना सरकार तक पहुंची हो सकती है।पत्रकारों से बातचीत के दौरान परमेश्वर ने कहा, "जब मुख्यमंत्री को खुफिया जानकारी मिली, तो उन्होंने जिन्हें चेतावनी देने की जरूरत थी, उन्हें चेतावनी दी। हो सकता है कि उन्हें जानकारी मिली हो कि कुछ स्टिंग एजेंसियां स्टिंग कर रही हैं। इसी वजह से उन्होंने मंत्रियों से सावधान और सतर्क रहने को कहा है।"उनके इस बयान से स्पष्ट होता है कि मंत्रियों को दी गई चेतावनी संभावित गतिविधियों से जुड़ी है। हालांकि, परमेश्वर ने सार्वजनिक रूप से किसी विशेष एजेंसी का नाम नहीं बताया और न ही किसी स्टिंग ऑपरेशन का विस्तृत विवरण साझा किया।
निजी एजेंसियों की गतिविधियों पर जताई आशंका
परमेश्वर के अनुसार, मुख्यमंत्री को संभवतः ऐसी जानकारी मिली है कि कुछ निजी एजेंसियां स्टिंग ऑपरेशन से जुड़ी गतिविधियों में शामिल हो सकती हैं। इसी संभावना को देखते हुए मंत्रियों को सावधान रहने के लिए कहा गया है।स्टिंग ऑपरेशन में आमतौर पर छिपे हुए कैमरे, ऑडियो रिकॉर्डिंग या अन्य माध्यमों से किसी व्यक्ति की गतिविधियों और बातचीत को रिकॉर्ड किया जाता है। ऐसे ऑपरेशन का उद्देश्य किसी मामले से संबंधित जानकारी या व्यवहार को सामने लाना हो सकता है।हालांकि, किसी स्टिंग ऑपरेशन का होना अपने आप में किसी साजिश का प्रमाण नहीं माना जा सकता। उसके उद्देश्य, तरीके और कानूनी स्थिति का आकलन संबंधित तथ्यों के आधार पर किया जाता है।कर्नाटक के इस मामले में फिलहाल केवल संभावित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर चेतावनी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। किसी एजेंसी द्वारा मंत्रियों को निशाना बनाए जाने या रिकॉर्डिंग किए जाने की पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं है।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने भी किया सबूत होने का दावा
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी अपने खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन की कोशिश किए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास कथित प्रयास से जुड़े दस्तावेज और तस्वीरें मौजूद हैं।शिवकुमार के अनुसार, कुछ लोग उनसे बातचीत करने के बहाने संपर्क में आए थे। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी है कि कथित प्रयास के पीछे कौन लोग हैं और इसकी योजना कैसे तैयार की गई थी। हालांकि, उन्होंने संबंधित व्यक्तियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है।मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रियों और पार्टी नेताओं को सतर्क करना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर उपलब्ध जानकारी संबंधित लोगों के सामने रखी जाएगी।
विपक्ष ने उठाए सवाल, जांच की मांग
इस मामले में केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने भी मुख्यमंत्री के आरोपों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री के पास कथित स्टिंग ऑपरेशन के सबूत हैं, तो इसकी जांच कराई जानी चाहिए।कुमारस्वामी ने सवाल किया कि जब मुख्यमंत्री को संबंधित व्यक्तियों और गतिविधियों की जानकारी होने का दावा है, तो मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने आरोपों की सच्चाई सामने लाने की मांग की है।इस तरह संभावित स्टिंग ऑपरेशन का मामला सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है। एक ओर सरकार के मंत्री खुफिया जानकारी के आधार पर सतर्कता बरतने की बात कह रहे हैं, वहीं विपक्ष आरोपों के समर्थन में प्रमाण और जांच की मांग कर रहा है।
मंत्रियों को सतर्क रहने की सलाह
राज्य सरकार के मंत्री सतीश जारकीहोली ने भी मुख्यमंत्री की चेतावनी का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को संभावित प्रयासों से सावधान रहने के लिए कहा है, ताकि किसी को गलत तरीके से फंसाने की कोशिश सफल न हो सके।उन्होंने यह भी दावा किया कि निजी एजेंसियों के माध्यम से इस तरह की गतिविधियां संचालित किए जाने की आशंका है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।फिलहाल कर्नाटक सरकार के मंत्रियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मामले में कथित स्टिंग ऑपरेशन करने वाली एजेंसियों, उनके उद्देश्य और संभावित साजिश को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। जांच और प्रमाण सामने आने के बाद ही इन आरोपों की वास्तविकता का पता चल सकेगा।
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