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अमेरिकी फैसले से भारतीय IT कंपनियों की बढ़ सकती है मुश्किलें, मंत्री प्रियांक खड़गे ने जताई चिंता

Kavita2
9 Oct 2026 3:11 PM IST
अमेरिकी फैसले से भारतीय IT कंपनियों की बढ़ सकती है मुश्किलें, मंत्री प्रियांक खड़गे ने जताई चिंता
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बेंगलुरु। अमेरिका में बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों के लिए परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम को निलंबित किए जाने के कथित फैसले को लेकर कर्नाटक के सूचना प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियांक खड़गे ने चिंता जताई है। शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस फैसले का भारत के सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र पर जटिल और दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि अमेरिका में कारोबार करने वाली भारतीय आईटी कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ सकती है और कुशल कर्मचारियों को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

प्रियांक खड़गे ने कहा कि अमेरिकी बाजार में काम कर रही भारतीय आईटी कंपनियों के सामने कर्मचारियों की तैनाती और परियोजनाओं के संचालन से जुड़ी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। विशेष रूप से अमेरिका में स्थित परियोजना स्थलों पर भारतीय आईटी पेशेवरों को तैनात करने की क्षमता प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, इस फैसले का वास्तविक प्रभाव संबंधित अमेरिकी नियमों, उनकी लागू होने की सीमा और कंपनियों की मौजूदा कार्यप्रणाली पर निर्भर करेगा।

अमेरिकी फैसले पर प्रियांक खड़गे की प्रतिक्रिया

कर्नाटक के आईटी एवं जैव प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियांक खड़गे ने शुक्रवार को अमेरिकी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से जुड़े घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि अमेरिका में बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों के लिए परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम का निलंबन भारतीय आईटी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण विषय है।

खड़गे के अनुसार, इस तरह के बदलावों का असर केवल कर्मचारियों की नियुक्ति तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि कंपनियों की परिचालन व्यवस्था और परियोजनाओं के संचालन पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने विशेष रूप से तीन संभावित चुनौतियों का उल्लेख किया। इनमें परिचालन लागत में वृद्धि, कुशल कर्मचारियों को बनाए रखने में कठिनाई और अमेरिका में भारतीय पेशेवरों की तैनाती की क्षमता में कमी शामिल है।

भारतीय IT कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका

प्रियांक खड़गे ने कहा कि अमेरिकी फैसले के कारण वहां कारोबार कर रही भारतीय आईटी कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ सकती है।

भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिकी ग्राहकों को सॉफ्टवेयर विकास, तकनीकी सहायता, डिजिटल सेवाओं और अन्य सूचना प्रौद्योगिकी समाधान उपलब्ध कराती हैं।

इन सेवाओं के संचालन के लिए कंपनियां भारत और अमेरिका सहित विभिन्न स्थानों पर कार्यरत कर्मचारियों की सहायता लेती हैं।

अमेरिका में कर्मचारियों की नियुक्ति और तैनाती से जुड़े नियमों में बदलाव होने पर कंपनियों को अपनी मानव संसाधन संबंधी योजनाओं की समीक्षा करनी पड़ सकती है।

हालांकि, लागत में कितनी वृद्धि हो सकती है, इसका कोई निश्चित अनुमान मंत्री के उपलब्ध बयान में नहीं दिया गया है।

कुशल कर्मचारियों को बनाए रखना हो सकता है मुश्किल

मंत्री ने भारतीय आईटी कंपनियों के सामने कुशल कर्मचारियों को बनाए रखने की संभावित चुनौती का भी उल्लेख किया।

सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में अनुभवी सॉफ्टवेयर इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों और परियोजना प्रबंधकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में कार्यरत कर्मचारियों के लिए नियुक्ति, स्थानांतरण और लंबे समय तक रोजगार से जुड़े नियम महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

प्रियांक खड़गे के अनुसार, अमेरिकी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से संबंधित बदलाव भारतीय कंपनियों की प्रतिभा प्रबंधन रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।

हालांकि, किन कंपनियों या कितने कर्मचारियों पर इसका असर पड़ने की आशंका है, इस बारे में कोई विशिष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया है।

अमेरिकी प्रोजेक्ट साइट्स पर तैनाती हो सकती है प्रभावित

प्रियांक खड़गे ने एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि भारतीय आईटी कंपनियों की अमेरिका स्थित परियोजना स्थलों पर भारतीय पेशेवरों को तैनात करने की क्षमता कम हो सकती है।

भारतीय आईटी कंपनियां कई अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए परियोजनाओं पर काम करती हैं। इनमें कुछ काम भारत से दूरस्थ रूप से किए जाते हैं, जबकि कुछ परियोजनाओं के लिए ग्राहक के स्थान पर कर्मचारियों की उपस्थिति आवश्यक हो सकती है।

ऐसी परिस्थितियों में कर्मचारियों की अंतरराष्ट्रीय तैनाती कंपनियों की परिचालन योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती है।

हालांकि, स्थायी श्रम प्रमाणन और अस्थायी कार्य वीजा की प्रक्रियाएं अलग-अलग हैं। इसलिए किसी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम में बदलाव का अर्थ यह नहीं है कि सभी भारतीय आईटी पेशेवरों की अमेरिका में अस्थायी तैनाती स्वतः प्रतिबंधित हो जाएगी।

इस संबंध में वास्तविक प्रभाव अमेरिकी नियमों के आधिकारिक विवरण से ही स्पष्ट होगा।

क्या है परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम?

अमेरिका का परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन कार्यक्रम, जिसे सामान्य रूप से PERM कहा जाता है, रोजगार आधारित स्थायी आव्रजन प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इस व्यवस्था के तहत कुछ श्रेणियों में अमेरिकी नियोक्ता विदेशी कर्मचारी के लिए रोजगार आधारित स्थायी निवास प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले श्रम विभाग से प्रमाणन प्राप्त करते हैं।

इस प्रक्रिया में संबंधित पद के लिए अमेरिकी श्रमिकों की उपलब्धता और निर्धारित वेतन सहित विभिन्न श्रम संबंधी शर्तों का परीक्षण किया जाता है।

PERM प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से संबंधित अमेरिकी श्रम बाजार के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए।

यह कार्यक्रम अस्थायी एच-1बी वीजा से अलग है। इसलिए दोनों व्यवस्थाओं के प्रभावों को एक समान नहीं माना जाना चाहिए।

भारत के IT उद्योग के लिए क्यों महत्वपूर्ण है अमेरिका?

अमेरिका भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में शामिल है।

भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिकी ग्राहकों को विभिन्न प्रकार की तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। इनमें सॉफ्टवेयर निर्माण, क्लाउड सेवाएं, डेटा प्रबंधन और डिजिटल परिवर्तन से जुड़े कार्य शामिल हैं।

अमेरिकी बाजार में कर्मचारियों की नियुक्ति और आव्रजन संबंधी नियम भारतीय कंपनियों की कारोबारी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

यही कारण है कि अमेरिका की रोजगार और श्रम नीतियों में बदलाव भारतीय आईटी उद्योग के लिए विशेष महत्व रखते हैं।

प्रियांक खड़गे ने भी इसी संदर्भ में संभावित दूरगामी प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की है।

कर्नाटक के IT क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण विषय

कर्नाटक, विशेष रूप से बेंगलुरु, भारत के प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी केंद्रों में शामिल है।

यहां बड़ी संख्या में आईटी कंपनियां और तकनीकी पेशेवर कार्यरत हैं। कई कंपनियां अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए सेवाएं उपलब्ध कराती हैं।

ऐसे में अमेरिका की रोजगार और श्रम नीतियों से संबंधित घटनाक्रम कर्नाटक के आईटी क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

राज्य के आईटी और जैव प्रौद्योगिकी मंत्री होने के नाते प्रियांक खड़गे की प्रतिक्रिया इस क्षेत्र से जुड़ी संभावित चुनौतियों पर केंद्रित रही।

हालांकि, कर्नाटक में कितनी कंपनियां सीधे प्रभावित होंगी, इसका कोई विशिष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है।

आधिकारिक नियमों से स्पष्ट होगा वास्तविक असर

प्रियांक खड़गे ने अमेरिकी फैसले के संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में संबंधित अमेरिकी आदेश का पूरा विवरण, उसके लागू होने की तारीख और प्रभावित कंपनियों की श्रेणियों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

इसलिए कार्यक्रम के निलंबन की सटीक कानूनी स्थिति और उसके दायरे की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

फिलहाल मंत्री ने जिन चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया है, उनमें कंपनियों की बढ़ती लागत, कुशल कर्मचारियों को बनाए रखने में संभावित कठिनाई और अमेरिका में भारतीय पेशेवरों की तैनाती प्रभावित होने की आशंका प्रमुख हैं।

इन चिंताओं का वास्तविक प्रभाव अमेरिकी सरकार के आधिकारिक नियमों, उनके क्रियान्वयन और संबंधित आईटी कंपनियों की परिस्थितियों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा।

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