
Karnataka कर्नाटक: बिदादी के आसपास का इलाका, जो लंबे समय से अपनी हरियाली और उपजाऊ कृषि भूमि के लिए जाना जाता है, अब एक बड़े शहरी विकास प्रोजेक्ट के तहत तेजी से बदलने की दिशा में बढ़ रहा है। कर्नाटक सरकार ने 13 जून को रामनगर जिले में बिदादी के पास ‘ग्रेटर बैंगलोर इंटीग्रेटेड टाउनशिप’ (GBIT) परियोजना के लिए 516 एकड़ कृषि भूमि के अधिग्रहण का अंतिम नोटिफिकेशन जारी किया है।
यह अधिसूचना टाउनशिप परियोजना के पहले चरण से जुड़ी है, जिसमें कुल 7,000 एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहण की योजना है। पहले चरण में लगभग 500 से अधिक एकड़ जमीन को शामिल किया गया है, जो बैंगलोर दक्षिण जिले के अधिकार क्षेत्र में आती है। इस निर्णय के बाद क्षेत्र में विकास और विवाद दोनों ही मुद्दों पर चर्चा तेज हो गई है।
यह महत्वाकांक्षी परियोजना मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के प्रमुख विकास प्रोजेक्ट्स में से एक मानी जा रही है। इसे देश का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित इंटीग्रेटेड टाउनशिप बताया जा रहा है, जिसमें आधुनिक तकनीक, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी सुविधाओं का विकास प्रस्तावित है। सरकार का दावा है कि इस परियोजना से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
हालांकि, भूमि अधिग्रहण के इस फैसले के बाद स्थानीय किसानों में गहरा असंतोष देखा जा रहा है। कई किसानों ने इस अधिग्रहण का विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि जिस भूमि को अधिग्रहण के लिए चुना गया है, वह अत्यंत उपजाऊ है और पीढ़ियों से खेती के लिए उपयोग की जा रही है। किसानों का तर्क है कि इस जमीन पर शहरीकरण से उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।
किसानों के विरोध को राज्य की विपक्षी पार्टियों का भी समर्थन मिला है। विपक्षी दलों ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उपजाऊ कृषि भूमि को औद्योगिक और शहरी परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल करना किसानों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने मांग की है कि सरकार को पहले किसानों से व्यापक बातचीत करनी चाहिए और वैकल्पिक समाधान तलाशने चाहिए।
दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि यह परियोजना बेंगलुरु के शहरी विस्तार और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। अधिकारियों के अनुसार, AI-आधारित टाउनशिप आधुनिक शहरी विकास का एक मॉडल साबित हो सकती है, जो तकनीकी और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित करेगी।
इस पूरे मामले ने राज्य में विकास बनाम कृषि भूमि संरक्षण की बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है। जहां एक तरफ सरकार इसे भविष्य की जरूरत बता रही है, वहीं किसान अपनी जमीन और आजीविका बचाने की मांग पर अड़े हुए हैं।
फिलहाल, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और विरोध दोनों ही जारी हैं, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक व सामाजिक हलचल देखने की संभावना है।





