कर्नाटक
कर्नाटक में ₹2,500 की सूखा राहत पर निखिल कुमारस्वामी ने उठाए सवाल
Ratna Netam
8 Oct 2026 9:05 PM IST

x
बेंगलुरु। कर्नाटक में भीषण सूखे से परेशान किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार की ओर से घोषित 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। जनता दल (सेक्युलर) के नेता निखिल कुमारस्वामी ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को राज्य सरकार की राहत घोषणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी कम राशि से किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सूखे से प्रभावित किसानों को सहायता देने में देरी की है और अब घोषित राहत राशि भी वास्तविक नुकसान के मुकाबले बेहद कम है। निखिल कुमारस्वामी ने दावा किया कि कर्नाटक के सभी 31 जिले गंभीर सूखे की चपेट में हैं और लगभग 234 तालुक प्रभावित हैं। हालांकि, राज्य सरकार के 7 अक्टूबर तक के आधिकारिक विवरण के अनुसार, 217 तालुक सूखाग्रस्त घोषित किए गए थे और शेष 23 तालुकों का आकलन जारी था।
निखिल कुमारस्वामी ने किसानों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि लंबे समय से बारिश की कमी के कारण कृषि गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में किसानों को पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि सूखे से फसलों को नुकसान पहुंचने के कारण किसानों के सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है। कई किसान खेती में लगाई गई लागत निकालने की स्थिति में भी नहीं हैं। ऐसे समय में प्रति किसान केवल 2,500 रुपये की सहायता घोषित करना पर्याप्त नहीं है।
₹2,500 की सहायता पर निखिल कुमारस्वामी ने उठाए सवाल
जेडीएस नेता ने कहा कि सरकार को किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझना चाहिए। उनके अनुसार, किसानों को फसल की बुआई से लेकर कटाई तक कई प्रकार के खर्च उठाने पड़ते हैं। इनमें बीज, उर्वरक, कृषि उपकरण, मजदूरी और सिंचाई से संबंधित खर्च शामिल हैं।सूखे के कारण जब फसलों को नुकसान पहुंचता है, तो किसानों की आय प्रभावित होती है, जबकि खेती में पहले से किया गया निवेश वापस मिलना मुश्किल हो जाता है।निखिल कुमारस्वामी ने इसी स्थिति का उल्लेख करते हुए राहत राशि को अपर्याप्त बताया। उनका कहना था कि राज्य सरकार को नुकसान की गंभीरता के आधार पर किसानों की सहायता करनी चाहिए।उन्होंने राहत की घोषणा में हुई कथित देरी पर भी नाराजगी जताई। निखिल कुमारस्वामी के अनुसार, किसानों को संकट के समय तत्काल सहायता की आवश्यकता थी, लेकिन सरकार ने राहत देने में देर की।
सभी 31 जिलों में सूखे का दावा
कर्नाटक में इस वर्ष मानसूनी बारिश की कमी के कारण कृषि क्षेत्र पर व्यापक असर पड़ा है। निखिल कुमारस्वामी ने दावा किया कि राज्य के सभी 31 जिले सूखे की गंभीर स्थिति का सामना कर रहे हैं।उन्होंने लगभग 234 तालुकों के प्रभावित होने की बात भी कही। हालांकि, ये आंकड़े उनके बयान का हिस्सा हैं।राज्य सरकार की ओर से 7 अक्टूबर को दी गई जानकारी के अनुसार, कर्नाटक के कुल 240 तालुकों में से 217 को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका था।उपमुख्यमंत्री और राजस्व विभाग का प्रभार संभाल रहे डॉ. जी. परमेश्वर ने बताया था कि शेष 23 तालुकों में नुकसान का जमीनी आकलन किया जा रहा है। उन्होंने कहा था कि आने वाले समय में 10 से 15 और तालुक सूखाग्रस्त सूची में शामिल किए जा सकते हैं।
राज्य सरकार ने जारी किए ₹1,250 करोड़
कर्नाटक सरकार ने सूखा प्रभावित किसानों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए 1,250 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी करने की घोषणा की है।उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने बुधवार को विजयनगर जिले के होसपेट तालुक में सूखे से प्रभावित खेतों का निरीक्षण करने के बाद इसकी जानकारी दी थी।उन्होंने बताया कि पहली किस्त के तहत पात्र किसानों को 2,500 रुपये प्रति किसान की सहायता सीधे बैंक खातों में दी जाएगी।सरकार का कहना है कि यह राशि प्रारंभिक राहत के रूप में प्रदान की जा रही है। केंद्र सरकार से अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलने के बाद आगे की राहत प्रक्रिया पर काम किया जाएगा।राज्य सरकार ने जिला प्रशासन को पात्र किसानों तक सहायता राशि पहुंचाने के निर्देश भी दिए हैं।
फसलों को भारी नुकसान, किसानों की बढ़ी परेशानी
कर्नाटक सरकार के अनुसार, राज्य में सूखे के कारण कृषि क्षेत्र को व्यापक नुकसान हुआ है।उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने दावा किया कि प्रदेश में लगभग 90 प्रतिशत फसलें प्रभावित हुई हैं। उन्होंने बताया कि स्थिति का आकलन करने के लिए विभिन्न जिलों में निरीक्षण और सर्वेक्षण किए जा रहे हैं।प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, सूखे के कारण फसलों और अन्य संपत्तियों को कुल 50,000 से 60,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान होने की आशंका जताई गई है।हालांकि, अंतिम नुकसान का आंकड़ा सभी प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगा।बारिश की कमी का असर कृषि उत्पादन के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और पशुओं के चारे की उपलब्धता पर भी पड़ा है।
केंद्र सरकार से आर्थिक मदद की मांग
कर्नाटक सरकार ने सूखे से हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार से भी सहायता मांगी है।राज्य सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष यानी एनडीआरएफ के निर्धारित नियमों के तहत आर्थिक मदद उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र से लगभग 10,000 से 11,000 करोड़ रुपये की सहायता मांगी है।
इसके अलावा राज्य सरकार ने सूखे की स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री और कृषि मंत्री से मुलाकात करने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली भेजने की योजना की जानकारी दी है।राज्य सरकार का कहना है कि सूखे से उत्पन्न संकट से निपटने के लिए केंद्र और राज्य के बीच समन्वय आवश्यक है।
पेयजल और पशुओं के चारे के लिए भी धनराशि
सूखे की स्थिति से निपटने के लिए कर्नाटक सरकार ने पेयजल आपूर्ति और पशुओं के चारे की व्यवस्था पर भी खर्च करने की जानकारी दी है।राजस्व विभाग के अनुसार, पेयजल संबंधी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए 306 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।आपातकालीन उपायों के लिए जिला उपायुक्तों के खातों में 329 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसके अतिरिक्त पशुओं के चारे की व्यवस्था के लिए 25 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।जिला प्रशासन को आवश्यकता के अनुसार पशु आश्रय केंद्र और चारा बैंक स्थापित करने का अधिकार भी दिया गया है।
विपक्ष पहले भी राहत राशि को बता चुका है कम
कर्नाटक में सूखा राहत को लेकर विवाद नया नहीं है। सितंबर में भी विपक्षी दलों ने राज्य सरकार की ओर से घोषित 2,500 रुपये की सहायता पर आपत्ति जताई थी।विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवादी नारायणस्वामी ने राहत राशि बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की मांग की थी।उन्होंने कहा था कि यदि सरकार पूरी राशि तुरंत जारी नहीं कर सकती, तो कम से कम पहली किस्त में किसानों को 10,000 रुपये उपलब्ध कराए जाने चाहिए।विपक्षी सदस्यों ने सरकार की घोषणा का विरोध करते हुए सदन से बहिर्गमन भी किया था।
किसानों की मदद को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने
राज्य सरकार का कहना है कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद किसानों को तत्काल राहत देने के लिए अपने संसाधनों से धनराशि जारी की गई है।वहीं, जेडीएस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि घोषित सहायता फसल नुकसान की गंभीरता के अनुरूप नहीं है।निखिल कुमारस्वामी ने गुरुवार को इसी मुद्दे को उठाते हुए सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को देखते हुए राहत राशि पर्याप्त होनी चाहिए और सहायता उपलब्ध कराने में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।इस पूरे विवाद में किसानों को मिलने वाली आर्थिक सहायता, फसल नुकसान के वास्तविक आंकड़े और केंद्र सरकार से मांगी गई धनराशि प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
राहत राशि के वितरण पर टिकी नजर
कर्नाटक सरकार ने पात्र किसानों को पहली किस्त के रूप में 2,500 रुपये उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दी है। हालांकि, इसे अंतिम मुआवजा नहीं बताया गया है।राज्य के प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान के सर्वेक्षण और अन्य राहत उपायों का काम जारी है।निखिल कुमारस्वामी के बयान के बाद सूखा राहत की पर्याप्तता को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। विपक्ष किसानों को अधिक वित्तीय सहायता देने की मांग कर रहा है, जबकि राज्य सरकार केंद्र से अतिरिक्त धनराशि प्राप्त करने और अपने संसाधनों से राहत कार्य जारी रखने की बात कह रही है।अब किसानों तक सहायता राशि के वितरण, नुकसान के अंतिम आकलन और केंद्र से मिलने वाली संभावित मदद पर नजर रहेगी। इन कदमों के आधार पर ही स्पष्ट होगा कि सूखे से प्रभावित किसानों को आगे कितनी आर्थिक राहत उपलब्ध हो सकेगी।
Next Story





