
Karnataka कर्नाटक: मैसूर के दो युवा भाइयों, मायन मचाय्या मेरिआंडा (15) और उनके छोटे भाई कृष मचाय्या मेरिआंडा, ने टेक्सास स्थित फ्रिस्को हॉकी एसोसिएशन की कॉम्पिटिटिव टीमों में चुने जाने के बाद अमेरिकी आइस हॉकी में अपनी पहचान बनाई है। 2026 के समर सीज़न के लिए दोनों भाइयों की टीम में चयन की पुष्टि हो चुकी है, जिससे उनके परिवार, दोस्तों और कर्नाटक में रिश्तेदारों में खुशी और गर्व का माहौल है।
मायन और कृष ने सालों की लगन, नियमित ट्रेनिंग और प्रतियोगी अनुभव के जरिए नॉर्थ अमेरिका के सबसे लोकप्रिय खेल में अपनी जगह बनाई है। दोनों भाइयों की इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि समर्पण और मेहनत के दम पर भारतीय खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना मुकाम हासिल कर सकते हैं।
मायन, जो फ्रिस्को के इंडिपेंडेंस हाई स्कूल में 10वीं कक्षा के छात्र हैं, पिछले सीज़न में शानदार प्रदर्शन करने के बाद वर्सिटी टीम में प्रमोट किए गए। उनके खेल कौशल, टीमवर्क और तेज़ प्रतिक्रिया ने कोच और टीम के अन्य सदस्यों का विश्वास जीत लिया। मायन ने खेल में न सिर्फ़ व्यक्तिगत प्रदर्शन बल्कि टीम की रणनीति को समझने और उसका हिस्सा बनने में भी उत्कृष्टता दिखाई।
छोटे भाई कृष, जिन्होंने हाल ही में नेल्सन मिडिल स्कूल में 8वीं कक्षा पूरी की है, जूनियर वर्सिटी टीम में शामिल हुए हैं। कृष की चुस्ती, गेंद नियंत्रण और आइस हॉकी के प्रति उत्साह ने कोचों को प्रभावित किया। परिवार और कोचिंग स्टाफ ने कहा कि कृष में भविष्य में बड़े टूर्नामेंटों में प्रदर्शन करने की क्षमता है।
दोनों भाइयों के लिए आइस हॉकी सिर्फ़ एक खेल नहीं, बल्कि उनकी मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य पर फोकस का प्रतीक भी बन गया है। फ्रिस्को हॉकी एसोसिएशन के कोच ने कहा कि मायन और कृष ने अपनी खेल योग्यता और टीम भावना से यह साबित किया है कि भारतीय युवा अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर भी प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।
कर्नाटक में उनके दोस्तों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने सोशल मीडिया और व्यक्तिगत संदेशों के जरिए भाइयों को बधाई दी। स्थानीय खेल प्रेमियों ने कहा कि यह सफलता अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और आइस हॉकी जैसे खेलों में भारतीय प्रतिभाओं की उपस्थिति को बढ़ावा देगी।
इस अवसर पर दोनों भाइयों ने कहा कि उनका लक्ष्य सिर्फ़ टीम में शामिल होना नहीं, बल्कि खेल में उत्कृष्टता हासिल करना और अपने प्रदर्शन से टीम को जीत दिलाना है। उन्होंने अपनी सफलता में परिवार, कोच और स्कूल के योगदान को सराहा।
मायन और कृष की इस उपलब्धि से यह स्पष्ट होता है कि सही मार्गदर्शन, मेहनत और अनुशासन के साथ युवा खिलाड़ी किसी भी चुनौतीपूर्ण खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकते हैं।





