कर्नाटक
CJI सूर्यकांत का बड़ा खुलासा दीक्षांत समारोह पर मंडरा रहा था संकट
Ratna Netam
17 Oct 2026 3:09 PM IST

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बेंगलुरु। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के 34वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि कुछ बाहरी ताकतों के कारण उत्पन्न अप्रत्याशित और दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों ने इस प्रतिष्ठित आयोजन को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी थी। एक समय ऐसा लग रहा था कि समारोह निर्धारित उम्मीदों के अनुसार आयोजित नहीं हो पाएगा। हालांकि, तमाम चुनौतियों के बावजूद विश्वविद्यालय ने दीक्षांत समारोह का सफल आयोजन किया।
दीक्षांत समारोह को लेकर बनी थी अनिश्चितता
बेंगलुरु में आयोजित समारोह के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पिछले कुछ सप्ताह के घटनाक्रम का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आयोजन से पहले कुछ ऐसी परिस्थितियां सामने आई थीं, जिनकी उम्मीद नहीं की गई थी।जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, "कुछ बाहरी ताकतों की वजह से पैदा हुए अप्रत्याशित और दुर्भाग्यपूर्ण हालात अपने साथ अनिश्चितता लेकर आए। कुछ समय के लिए ऐसा लग रहा था कि शायद यह आयोजन उस तरह से नहीं हो पाएगा, जैसी हमने उम्मीद की थी।"उन्होंने आगे कहा कि प्रतिभाशाली छात्रों ने यह दिखा दिया है कि दृढ़ संकल्प की भावना को आसानी से कमजोर नहीं किया जा सकता।
पहले रद्द करना पड़ा था दीक्षांत समारोह
दरअसल, NLSIU का 34वां वार्षिक दीक्षांत समारोह पहले 12 सितंबर 2026 को आयोजित किया जाना था। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने अगस्त में इसे अपरिहार्य परिस्थितियों का हवाला देते हुए रद्द कर दिया था।इस फैसले से पहले विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों और पूर्व विद्यार्थियों ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को समारोह में आमंत्रित किए जाने का विरोध किया था।विद्यार्थियों के एक वर्ग ने दोनों की प्रस्तावित भागीदारी पर आपत्ति जताई थी। इस विवाद के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने समारोह स्थगित करने का निर्णय लिया था।
17 अक्टूबर को आयोजित हुआ 34वां दीक्षांत समारोह
विवाद के बाद विश्वविद्यालय ने समारोह के आयोजन के लिए नई तारीख निर्धारित की। शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु के ज्ञान ज्योति सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया।इस समारोह की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश और विश्वविद्यालय के चांसलर जस्टिस सूर्यकांत ने की। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सुधीर कृष्णस्वामी सहित कई गणमान्य अतिथि शामिल हुए।समारोह में रंग शंकरा की सह-संस्थापक और प्रसिद्ध रंगकर्मी अरुंधति नाग मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। इस अवसर पर विद्यार्थियों को डिग्रियां, पदक और पुरस्कार प्रदान किए गए।
छात्रों के दृढ़ संकल्प की सराहना
मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों की उपलब्धियों और दृढ़ संकल्प की सराहना की। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद छात्रों ने अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।उनकी टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है, जब देश के प्रमुख विधि विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह के अतिथियों के चयन और छात्रों की असहमति व्यक्त करने के अधिकार को लेकर चर्चाएं हो रही हैं।इससे पहले हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी में भी मुख्य न्यायाधीश की प्रस्तावित भागीदारी को लेकर छात्रों के एक वर्ग ने आपत्ति जताई थी। इस घटनाक्रम के बाद NLSIU में भी विरोध सामने आया था।
कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण संस्थान है NLSIU
बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी देश के प्रमुख विधि शिक्षण संस्थानों में शामिल है। यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी न्यायपालिका, वकालत, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में अपना करियर बनाते हैं।विश्वविद्यालय का वार्षिक दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों को औपचारिक मान्यता दी जाती है।
विवाद के बाद सफलतापूर्वक संपन्न हुआ आयोजन
कई सप्ताह की अनिश्चितता और विवाद के बाद आयोजित दीक्षांत समारोह ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा किया।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की ओर से बाहरी ताकतों का उल्लेख किए जाने के बाद उनके बयान की चर्चा हो रही है। हालांकि, उन्होंने अपने संबोधन के उद्धृत हिस्से में किसी संगठन या व्यक्ति का नाम नहीं लिया।समारोह का आयोजन पूरा होने के साथ विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।
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