कर्नाटक

कर्नाटक में IT पार्क की जमीन को लेकर बड़ा विवाद

Ratna Netam
16 Oct 2026 9:27 PM IST
कर्नाटक में IT पार्क की जमीन को लेकर बड़ा विवाद
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बेंगलुरु। कर्नाटक में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) पार्क के लिए अधिग्रहित जमीन के आवंटन और पट्टे की शर्तों को लेकर कानूनी विवाद एक बार फिर चर्चा में है। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने रॉयल फ्रैग्रेंस प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। कंपनी ने कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (KIADB) से बेंगलुरु के पास स्थित लगभग 9 एकड़ 34½ गुंटा जमीन के आवंटन की शर्तों के कथित उल्लंघन को लेकर कार्रवाई करने की मांग की है। याचिका में आग्रह किया गया है कि बोर्ड संबंधित जमीन को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने पर विचार करे।उपलब्ध विवरण के अनुसार, न्यायमूर्ति आर. देवदास ने 9 अक्टूबर 2026 के आदेश में पहले दो प्रतिवादियों के अधिवक्ताओं की उपस्थिति दर्ज करने के बाद अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित करने को कहा है।
करीब 10 एकड़ जमीन के आवंटन पर विवाद
यह मामला बेंगलुरु पूर्व तालुक के देवराबीसनहल्ली और करियम्मना अग्रहारा गांवों में स्थित जमीन से जुड़ा है।रॉयल फ्रैग्रेंस प्राइवेट लिमिटेड के अनुसार, राज्य सरकार ने इस क्षेत्र में सॉफ्टवेयर पार्क या आईटी पार्क विकसित करने के उद्देश्य से जमीन अधिग्रहित की थी।कंपनी का आरोप है कि बाद में जमीन के आवंटन और लीज से संबंधित निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया।इसी आधार पर कंपनी ने संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई करने और जमीन वापस लेने की प्रक्रिया पर विचार करने की मांग की है।
हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों से मांगा जवाब
याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आर. देवदास ने संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है।अदालत ने पहले दो प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ताओं की उपस्थिति दर्ज की और बाकी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।इसके साथ ही न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि किसी पक्ष को पक्षकार बनाए जाने संबंधी आवेदनों पर आपत्ति है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी फिलहाल अदालत ने जमीन के कथित दुरुपयोग या आवंटन शर्तों के उल्लंघन पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।
आईटी पार्क के लिए अधिग्रहित की गई थी जमीन
इस भूमि विवाद का इतिहास कई वर्ष पुराना है। कर्नाटक उच्च न्यायालय के 20 अगस्त 2025 के एक संबंधित निर्णय के अनुसार, रॉयल फ्रैग्रेंस ने सॉफ्टवेयर अथवा आईटी पार्क स्थापित करने के लिए जमीन आवंटन का प्रस्ताव दिया था।राज्य स्तरीय एकल खिड़की एजेंसी ने सितंबर 2001 में परियोजना के लिए करीब 12 एकड़ जमीन अधिग्रहित करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी थी।हालांकि, भूमि अधिग्रहण और विभिन्न मालिकों की आपत्तियों के कारण परियोजना से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाएं जटिल होती गईं।
पहले भी हाईकोर्ट पहुंच चुका है मामला
इस जमीन से संबंधित विवाद पहले भी कर्नाटक उच्च न्यायालय में पहुंच चुका है।अगस्त 2025 के फैसले में सामने आया था कि अक्टूबर 2012 में लगभग 9 एकड़ 34½ गुंटा भूमि साई सृष्टि इंफ्रा टेक प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित करने का निर्णय लिया गया था।बाद में दिसंबर 2017 में परियोजना की स्वीकृति आर.आर. प्लेटिना इंफ्रा के पक्ष में स्थानांतरित कर दी गई थी।इन फैसलों और संबंधित लीज समझौतों को लेकर कानूनी विवाद उत्पन्न हुआ।
जमीन वापस लेने की प्रक्रिया पर उठे सवाल
रॉयल फ्रैग्रेंस की मौजूदा याचिका का प्रमुख विषय जमीन आवंटन की शर्तों का कथित उल्लंघन है।कंपनी चाहती है कि KIADB इस मामले में लागू नियमों के अनुसार कार्रवाई करने पर विचार करे।हालांकि, किसी औद्योगिक जमीन का आवंटन रद्द करना या उसे वापस लेना संबंधित कानूनी प्रावधानों, अनुबंध की शर्तों और प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर करता है।इसलिए अदालत की ओर से नोटिस जारी किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि जमीन का आवंटन रद्द कर दिया गया है।
अगली सुनवाई पर टिकी नजर
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मामले को दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।अगली सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों की ओर से प्रस्तुत जवाब और आपत्तियां महत्वपूर्ण होंगी।यह विवाद औद्योगिक विकास के लिए अधिग्रहित जमीन के उपयोग, आवंटन प्रक्रिया और पट्टे की शर्तों के पालन से जुड़ा है।फिलहाल कंपनी की ओर से लगाए गए आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं आया है। मामले में आगे की स्थिति संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत के आदेशों के आधार पर स्पष्ट होगी।
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