
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) में संगठनात्मक अनुशासन को लेकर बड़ी कार्रवाई की गई है। स्पेशल कॉम्प्रिहेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी महत्वपूर्ण बैठक में अनुपस्थित रहने वाले पदाधिकारियों पर सख्त रुख अपनाते हुए 3 उपाध्यक्षों और 29 महासचिवों को उनके पदों से हटा दिया गया है।
यह कार्रवाई KPCC अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के निर्देश पर की गई है। उन्होंने अनुशासन तोड़ने और पार्टी गतिविधियों में लापरवाही बरतने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्रवाई के आदेश जारी किए।
सूत्रों के अनुसार, 24 मई को बेंगलुरु के बाहरी क्षेत्र में SIR प्रक्रिया, ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) और आगामी स्थानीय निकाय चुनावों तथा पार्टी संगठन से जुड़े मुद्दों पर एक प्रारंभिक बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक को संगठनात्मक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया था।
इसके बावजूद कई वरिष्ठ पदाधिकारी बैठक में अनुपस्थित रहे, जिसे पार्टी नेतृत्व ने गंभीर अनुशासनहीनता के रूप में देखा। इसके बाद संगठनात्मक समीक्षा के आधार पर यह कार्रवाई की गई।
हटाए गए उपाध्यक्षों में दावणगेरे के के. शिवमूर्ति, कलबुर्गी के बाबूराव जागीरदार और बेंगलुरु के एमसी वेणुगोपाल शामिल हैं। इनके अलावा 29 महासचिवों को भी तत्काल प्रभाव से उनके पदों से मुक्त कर दिया गया है।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि आगामी चुनावों और संगठनात्मक गतिविधियों के मद्देनजर अनुशासन और सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस कार्रवाई को पार्टी के भीतर अनुशासन मजबूत करने और संगठन को और अधिक सक्रिय बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। वहीं राजनीतिक हलकों में इसे कांग्रेस संगठन में आंतरिक सख्ती और पुनर्गठन की प्रक्रिया के रूप में भी देखा जा रहा है।
KPCC नेतृत्व का कहना है कि पार्टी की प्राथमिकता जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करना और आगामी चुनावी तैयारियों को प्रभावी बनाना है, जिसके लिए सभी पदाधिकारियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।





