कर्नाटक
मैसूर पैलेस में महानवमी की धूम, हाथी घोड़े और शाही हथियारों की हुई पूजा
Ratna Netam
20 Oct 2026 3:10 PM IST

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मैसूर। कर्नाटक के ऐतिहासिक मैसूर शहर में प्रसिद्ध 'नादा हब्बा दशहरा महोत्सव 2026' पूरे धार्मिक उत्साह और शाही परंपराओं के साथ मनाया जा रहा है। मंगलवार को महानवमी के अवसर पर मैसूर पैलेस में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। इस दौरान शाही परिवार के सदस्यों और महल के कर्मचारियों की मौजूदगी में पारंपरिक पूजा-अर्चना की गई। समारोह में 'पट्टा' हाथी श्रीकांथा, 'निशाने' घोड़ा एकलव्य और 'खासा' राजसी हथियारों को कोटे सोमेश्वर मंदिर ले जाया गया, जहां विधि-विधान से विशेष पूजा संपन्न हुई।यह धार्मिक अनुष्ठान मैसूर दशहरा उत्सव की सदियों पुरानी शाही परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। महानवमी के दिन शाही हथियारों, हाथियों और घोड़ों की पूजा करने की परंपरा मैसूर के ऐतिहासिक दशहरा समारोह को विशेष पहचान देती है।
महानवमी पर मैसूर पैलेस में शाही परंपराओं का निर्वहन
मैसूर पैलेस में महानवमी के अवसर पर पारंपरिक आयुध पूजा का आयोजन किया गया। शाही परिवार के सदस्यों और महल के कर्मचारियों ने धार्मिक विधियों के अनुसार पूजा-अर्चना में भाग लिया।इस दौरान राजसी हथियारों के साथ हाथी और घोड़े को विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए कोटे सोमेश्वर मंदिर ले जाया गया। यह पूजा मैसूर राजघराने की ऐतिहासिक परंपराओं से जुड़ी हुई है।आयुध पूजा में शस्त्रों, औजारों और कार्य में उपयोग आने वाले उपकरणों की पूजा की जाती है। इसे शक्ति, साहस और सफलता का प्रतीक माना जाता है। मैसूर दशहरा के दौरान इस परंपरा का विशेष महत्व है।
1610 से चली आ रही ऐतिहासिक परंपरा
मैसूर दशहरा को कर्नाटक में 'नादा हब्बा' यानी राज्य उत्सव के रूप में जाना जाता है। यह भारत के सबसे प्रसिद्ध और भव्य शाही उत्सवों में शामिल है।मैसूर में इस उत्सव की ऐतिहासिक परंपरा वर्ष 1610 में राजा वाडियार प्रथम के शासनकाल से जुड़ी मानी जाती है। यह पर्व देवी चामुंडेश्वरी द्वारा राक्षस महिषासुर के वध और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।दशहरा के दौरान मैसूर शहर की सड़कों, ऐतिहासिक इमारतों और राजमहल को आकर्षक रोशनी से सजाया जाता है। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, संगीत, नृत्य और प्रदर्शनियों के माध्यम से कर्नाटक की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया जाता है।
21 अक्टूबर को निकलेगी भव्य जंबू सवारी
इस वर्ष मैसूर दशहरा महोत्सव की शुरुआत 11 अक्टूबर को हुई थी। ग्यारह दिवसीय उत्सव का मुख्य आकर्षण 21 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर निकलने वाला प्रसिद्ध 'जंबू सवारी' जुलूस होगा।इस भव्य शोभायात्रा में देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा को सुसज्जित हाथी पर रखे स्वर्ण अंबारी में विराजमान किया जाता है। शोभायात्रा मैसूर पैलेस से बन्नीमंटप तक निकाली जाती है।उत्सव कार्यक्रम के अनुसार, विजयादशमी पर नंदी ध्वज पूजा और देवी चामुंडेश्वरी की विशेष पूजा के बाद जंबू सवारी निकाली जाएगी।
CM डी.के. शिवकुमार ने पर्यटकों को दिया आमंत्रण
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने राज्य के लोगों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को मैसूर दशहरा महोत्सव में शामिल होने का आमंत्रण दिया है।उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मैसूर दशहरा को कर्नाटक की कला, संस्कृति, परंपराओं और गौरवशाली विरासत का संगम बताया।मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उत्सव कन्नडिगाओं के गौरव और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने राज्य के सभी नागरिकों और दुनिया के विभिन्न देशों से आने वाले पर्यटकों से इस भव्य उत्सव का हिस्सा बनने की अपील की।
कला और संस्कृति का अनूठा संगम
मैसूर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण उत्सव भी है। इस दौरान शहर में पारंपरिक नृत्य, संगीत, सांस्कृतिक प्रदर्शनियों और अन्य मनोरंजक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।शाही समारोह, ऐतिहासिक महल की आकर्षक सजावट और पारंपरिक जुलूस पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होते हैं।महानवमी पर आयोजित आयुध पूजा के साथ अब सभी की निगाहें 21 अक्टूबर को होने वाली भव्य जंबू सवारी पर टिकी हैं। यह शोभायात्रा मैसूर की शाही विरासत, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक गौरव को प्रदर्शित करेगी।
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