कर्नाटक

KSRTC चेयरमैन का बयान: ईंधन महंगा रहा तो बस किराया बढ़ाना होगा, निगम पहले से घाटे में

Kavita2
24 May 2026 11:01 AM IST
KSRTC चेयरमैन का बयान: ईंधन महंगा रहा तो बस किराया बढ़ाना होगा, निगम पहले से घाटे में
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Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (KSRTC) के चेयरमैन एस आर श्रीनिवास ने शनिवार को तुमकुरु में कहा कि यदि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है, तो सरकारी बसों के किराए में वृद्धि करना अनिवार्य हो सकता है। उन्होंने बताया कि बढ़ते परिचालन खर्चों के कारण निगम पर वित्तीय दबाव लगातार बढ़ रहा है।

श्रीनिवास ने कहा कि हाल ही में डीजल के दाम में पहले 3.75 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी और इसके बाद फिर 90 पैसे की अतिरिक्त वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि ईंधन की कीमतों में इस तरह की लगातार बढ़ोतरी से बस संचालन की लागत में बड़ा इजाफा हुआ है, जिसे बिना किराया बढ़ाए संभालना मुश्किल हो रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि KSRTC पहले से ही आर्थिक नुकसान की स्थिति में चल रही है और निगम को अपने दैनिक संचालन को बनाए रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ते खर्च और सीमित संसाधनों के बीच सेवाओं को जारी रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

KSRTC चेयरमैन के अनुसार, निगम वर्तमान में अपने कर्मचारियों के बकाया भुगतान की प्रक्रिया में भी है, जो लगभग 1,260 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि यह राशि जल्द से जल्द चुकाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन वित्तीय दबाव के कारण स्थिति जटिल बनी हुई है।

उन्होंने संकेत दिया कि यदि ईंधन की कीमतों में स्थिरता नहीं आती है, तो सरकार को सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को बनाए रखने के लिए किराया संशोधन पर विचार करना पड़ेगा। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय सरकार स्तर पर लिया जाएगा।

KSRTC अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था आम जनता की जरूरतों से जुड़ी है, इसलिए किसी भी निर्णय में यात्रियों पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखा जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सेवा बाधित न हो।

परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती ईंधन कीमतें न केवल KSRTC बल्कि पूरे सार्वजनिक परिवहन तंत्र पर दबाव डाल रही हैं। ऐसे में किराया वृद्धि एक संभावित विकल्प बन सकता है, लेकिन इससे आम यात्रियों पर भी आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

फिलहाल KSRTC की स्थिति को लेकर सरकार और प्रशासन स्तर पर समीक्षा जारी है और आने वाले समय में इस मुद्दे पर कोई बड़ा निर्णय लिया जा सकता है।

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