कर्नाटक

Karnataka : खरीफ सीजन में किसानों पर बढ़ा आर्थिक दबाव, खेती की लागत में तेज़ उछाल

Kavita2
24 May 2026 10:54 AM IST
Karnataka : खरीफ सीजन में किसानों पर बढ़ा आर्थिक दबाव, खेती की लागत में तेज़ उछाल
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Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक में खरीफ (मॉनसून) फसल का सीजन शुरू होते ही किसानों को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ट्रैक्टर किराया, उर्वरक (फर्टिलाइजर) और खेती से जुड़े अन्य जरूरी संसाधनों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने इस साल खेती की शुरुआती लागत को काफी बढ़ा दिया है, जिससे किसान वर्ग पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है।

राज्य में खरीफ सीजन के दौरान लगभग 70 लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती की जाती है, जिसमें किसान मुख्य रूप से रागी, धान, ज्वार, बाजरा, अरहर और मूंगफली जैसी फसलों पर निर्भर रहते हैं। लेकिन मौजूदा समय में बढ़ती लागत ने खेती की तैयारी को मुश्किल बना दिया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अन्य वैश्विक आर्थिक कारणों ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर ईंधन और उर्वरक की कीमतों पर पड़ा है। इसके चलते खेती से जुड़ी इनपुट लागत में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक बैलों से जुताई की प्रथा पहले ही काफी हद तक खत्म हो चुकी है, और किसान अब लगभग पूरी तरह मशीन आधारित खेती पर निर्भर हो गए हैं। ऐसे में डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर ट्रैक्टर और अन्य कृषि मशीनों के किराए पर पड़ रहा है, जिससे किसानों की लागत और बढ़ गई है।

किसानों का कहना है कि खेती के लिए पहले से ही सीमित लाभ मार्जिन के बीच इन बढ़ती लागतों ने उनकी स्थिति को और कठिन बना दिया है। कई किसानों को फसल की बुवाई से पहले ही अतिरिक्त कर्ज लेना पड़ रहा है ताकि वे बीज, खाद और जुताई जैसे खर्च पूरे कर सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इनपुट लागत में बढ़ोतरी पर नियंत्रण नहीं किया गया तो इसका असर उत्पादन और कृषि आय दोनों पर पड़ सकता है। साथ ही, छोटे और सीमांत किसानों के लिए खेती और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

स्थानीय कृषि संगठनों ने सरकार से मांग की है कि किसानों को सब्सिडी और राहत पैकेज दिया जाए, ताकि बढ़ती लागत के बोझ को कुछ हद तक कम किया जा सके। इसके अलावा, ईंधन और उर्वरक की कीमतों पर नियंत्रण के लिए भी प्रभावी कदम उठाने की अपील की गई है।

फिलहाल, खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों के सामने आर्थिक दबाव एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है, जिससे पूरे कृषि क्षेत्र में चिंता का माहौल है।

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