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Bidar में सूर्यकिरण एरोबेटिक्स टीम का भव्य प्रदर्शन, तीन दशकों की उड़ान का जश्न

Delhi दिल्ली: भारतीय वायु सेना की प्रसिद्ध सूर्यकिरण एरोबेटिक्स टीम मंगलवार को कर्नाटक के बीदर में आसमान में अपने शानदार हवाई करतबों का प्रदर्शन करेगी। यह आयोजन टीम के तीन दशकों लंबे शानदार सफर का उत्सव माना जा रहा है, जिसकी शुरुआत भी बीदर एयर फोर्स स्टेशन से ही हुई थी।
सूत्रों के अनुसार, इस विशेष अवसर पर एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के बीदर में मौजूद रहने की संभावना है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वे स्वयं किसी फ्लाइंग फॉर्मेशन का हिस्सा बनेंगे या नहीं। वायु सेना की यह टीम अपने सटीक और रोमांचक एरोबेटिक प्रदर्शनों के लिए जानी जाती है।
“आईएएफ के एम्बेसडर” के नाम से मशहूर नौ एयरक्राफ्ट्स की यह टीम पिछले 30 वर्षों से निचले स्तर की उड़ानों में बेहद जटिल और रोमांचक करतब दिखाती आ रही है। इस टीम ने क्लोज़ फॉर्मेशन फ्लाइंग में उच्चतम मानक स्थापित किए हैं और भारतीय वायु सेना की पेशेवर क्षमता का प्रदर्शन दुनिया भर में किया है।
सूर्यकिरण टीम की स्थापना 27 मई 1996 को की गई थी। तब से अब तक 100 से अधिक पायलट इस टीम का हिस्सा रह चुके हैं और उन्होंने अपने कौशल और अनुशासन से इस एरोबेटिक्स स्क्वाड्रन को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई है।
टीम ने अपनी सार्वजनिक प्रस्तुतियों की शुरुआत कोयंबटूर में एक शानदार प्रदर्शन के साथ की थी, जिसने भारतीय एरोबेटिक्स को एक नई पहचान दी। इसके बाद से टीम ने लगातार अपने प्रदर्शन से दर्शकों को आकर्षित किया है।
अब तक सूर्यकिरण टीम भारत के साथ-साथ कई विदेशी देशों में भी प्रदर्शन कर चुकी है, जिनमें चीन, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इन प्रदर्शनों ने न केवल भारत की वायु शक्ति को प्रदर्शित किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी प्रतिष्ठा को बढ़ाया है।
इस वर्ष की शुरुआत में टीम ने हैदराबाद में आयोजित विंग्स इंडिया कार्यक्रम में अपना 800वां शो प्रस्तुत किया था, जो उनके इतिहास का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है।
बीदर में होने वाला यह प्रदर्शन सूर्यकिरण टीम के लिए एक भावनात्मक और ऐतिहासिक अवसर है, क्योंकि यह वही स्थान है जहां से उनके एरोबेटिक सफर की शुरुआत हुई थी। इस कार्यक्रम में हजारों दर्शकों के शामिल होने की संभावना है, जो आसमान में सटीक समन्वय और रोमांचक उड़ानों का अनुभव करेंगे।
वायु सेना अधिकारियों के अनुसार, यह आयोजन न केवल टीम की उपलब्धियों का उत्सव है, बल्कि युवा पायलटों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।





