कर्नाटक

KPSC भर्ती घोटाला: पूर्व IAS अधिकारी पर गोपनीय सीटिंग जानकारी के दुरुपयोग का आरोप

Kavita2
9 Oct 2026 10:38 AM IST
KPSC भर्ती घोटाला: पूर्व IAS अधिकारी पर गोपनीय सीटिंग जानकारी के दुरुपयोग का आरोप
x

बेंगलुरु। कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) भर्ती घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गंभीर आरोपों का खुलासा किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, KPSC के पूर्व परीक्षा नियंत्रक और निलंबित IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार ने परीक्षा से जुड़ी गोपनीय तकनीकी जानकारी का कथित तौर पर दुरुपयोग किया। आरोप है कि उन्होंने उम्मीदवारों के रोल नंबर और प्रश्नपत्र की सीरीज के बीच संबंध का पता लगाने के लिए इस जानकारी का इस्तेमाल किया और चुनिंदा उम्मीदवारों के पंजीकरण नंबरों को संबंधित प्रश्नपत्र सीरीज से मिलाकर सही उत्तर KPSC की पूर्व सदस्य बी.वी. गीता तक पहुंचाए।

ED की जांच के अनुसार, प्रश्नपत्रों की सीरीज, उत्तर कुंजी और उम्मीदवारों के बैठने की व्यवस्था से संबंधित जानकारी गोपनीय रखी जाती थी। यह संवेदनशील जानकारी केवल परीक्षा नियंत्रकों के पास उपलब्ध थी। एजेंसी का आरोप है कि इसी जानकारी का उपयोग भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं को अंजाम देने के लिए किया गया।

इस मामले में सामने आए आरोपों ने परीक्षा की गोपनीयता और भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, जांच एजेंसी के आरोपों के आधार पर किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। आरोपों की अंतिम पुष्टि कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

गोपनीय सीटिंग व्यवस्था की जानकारी का कथित दुरुपयोग

ED के मुताबिक, KPSC की परीक्षाओं में उम्मीदवारों के बैठने की व्यवस्था और प्रश्नपत्रों की सीरीज से संबंधित जानकारी गोपनीय होती है। परीक्षा के दौरान अलग-अलग उम्मीदवारों को प्रश्नपत्रों की अलग-अलग सीरीज मिल सकती हैं। ऐसे में किसी उम्मीदवार के रोल नंबर या पंजीकरण नंबर को प्रश्नपत्र की सीरीज से जोड़ने की जानकारी परीक्षा की निष्पक्षता के लिए महत्वपूर्ण होती है।

जांच एजेंसी का आरोप है कि पूर्व परीक्षा नियंत्रक ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार ने अपनी आधिकारिक भूमिका के दौरान उपलब्ध तकनीकी जानकारी का कथित दुरुपयोग किया। इससे उन्हें यह पता लगाने में मदद मिली कि किन उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र की कौन-सी सीरीज मिली थी।

आरोप के अनुसार, इस जानकारी के आधार पर चुने गए उम्मीदवारों के पंजीकरण नंबर और प्रश्नपत्र सीरीज का मिलान किया गया। इसके बाद संबंधित उम्मीदवारों को सही उत्तर उपलब्ध कराए जाने का दावा किया गया है।

बी.वी. गीता तक सही जवाब पहुंचाने का आरोप

जांच में ED ने आरोप लगाया है कि ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार ने चुनिंदा उम्मीदवारों के पंजीकरण नंबरों को संबंधित प्रश्नपत्र सीरीज की जानकारी से मिलाया और सही उत्तर KPSC की पूर्व सदस्य बी.वी. गीता को दिए।

यह आरोप मामले का अहम हिस्सा है, क्योंकि प्रश्नपत्र की सीरीज और उत्तर कुंजी से जुड़ी जानकारी परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होती है। यदि ऐसी जानकारी का इस्तेमाल किसी उम्मीदवार को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए किया जाता है, तो इससे पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।

हालांकि, उपलब्ध विवरण में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कितने उम्मीदवारों को कथित रूप से लाभ पहुंचाया गया, कितने प्रश्नों के उत्तर साझा किए गए या इस तरीके से भर्ती परिणामों पर कितना असर पड़ा। इन पहलुओं को लेकर जांच के निष्कर्ष सामने आने बाकी हैं।

प्रश्नपत्र सीरीज और उत्तर कुंजी थीं गोपनीय

ED की जांच के मुताबिक, प्रश्नपत्रों की सीरीज और उत्तर कुंजी की सूची गोपनीय रखी जाती थी। इसके साथ ही उम्मीदवारों की बैठने की व्यवस्था की जानकारी भी परीक्षा नियंत्रकों तक सीमित थी।

परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी में परीक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियों की गोपनीयता बनाए रखना शामिल होता है। ऐसी जानकारी का अनधिकृत इस्तेमाल होने पर उम्मीदवारों के बीच समान अवसर और भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।

जांच एजेंसी का आरोप है कि इसी गोपनीय व्यवस्था से जुड़ी तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल उम्मीदवारों के पंजीकरण नंबर और प्रश्नपत्र सीरीज का मिलान करने के लिए किया गया। इसके बाद सही जवाब साझा किए जाने की बात कही गई है।

यह मामला इस सवाल को भी सामने लाता है कि परीक्षा से जुड़े संवेदनशील डेटा तक पहुंच को नियंत्रित करने और उसके इस्तेमाल की निगरानी करने के लिए क्या व्यवस्था मौजूद थी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सुरक्षा व्यवस्था में कथित चूक से जुड़े अतिरिक्त निष्कर्षों का विवरण नहीं दिया गया है।

भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवाल

KPSC जैसी भर्ती संस्था की परीक्षाओं में गोपनीयता और निष्पक्षता बनाए रखना महत्वपूर्ण है। परीक्षा की प्रश्नपत्र सीरीज, उत्तर कुंजी और उम्मीदवारों की बैठने की व्यवस्था जैसी जानकारी का सुरक्षित रहना जरूरी होता है, ताकि किसी भी अभ्यर्थी को अनुचित लाभ न मिले।

ED की जांच में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो वे भर्ती प्रक्रिया की गोपनीयता और परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारियों से जुड़े गंभीर मुद्दे होंगे। लेकिन इस स्तर पर इन आरोपों को जांच एजेंसी के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

मामले में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच के दौरान कथित तरीके से जानकारी साझा करने, उम्मीदवारों तक उत्तर पहुंचाने और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका के बारे में कौन-कौन से साक्ष्य सामने आते हैं।

ED की जांच में आगे क्या?

फिलहाल, ED ने KPSC भर्ती घोटाले में पूर्व परीक्षा नियंत्रक और निलंबित IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप सामने रखे हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, गोपनीय तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल चुनिंदा उम्मीदवारों के पंजीकरण नंबरों को प्रश्नपत्र सीरीज से जोड़ने और सही उत्तर उपलब्ध कराने के लिए किया गया।

मामले में KPSC की पूर्व सदस्य बी.वी. गीता का नाम भी जांच के विवरण में सामने आया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से कथित प्रक्रिया में शामिल उम्मीदवारों की संख्या और भर्ती परिणामों पर पड़े वास्तविक प्रभाव का पता नहीं चलता।

अब जांच में उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर इन आरोपों की पुष्टि होना महत्वपूर्ण होगा। जांच पूरी होने और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित अनियमितताओं का दायरा कितना व्यापक था और मामले में संबंधित लोगों की जिम्मेदारी क्या थी।

Next Story