
Karnataka कर्नाटक: नई दिल्ली में AICC अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को देश में हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा राजनीतिक हमला किया। खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर चुनावी राज्यों में विधानसभा चुनाव समाप्त होने तक ईंधन की कीमतों में वृद्धि को टाल दिया, ताकि इसका राजनीतिक असर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर न पड़े।
खड़गे ने कहा कि देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है और आम जनता पर इसका सीधा बोझ पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी को रोककर रखा। उनके अनुसार, यह निर्णय राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से लिया गया, न कि आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर।
उन्होंने दावा किया कि अगर यह बढ़ोतरी चुनाव से पहले लागू की गई होती, तो इसके राजनीतिक परिणाम अलग होते और सत्तारूढ़ पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता था। खड़गे ने कहा कि सरकार को इस बात का अंदाजा था कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर जनता के वोटिंग व्यवहार पर पड़ेगा, इसलिए इसे चुनाव के बाद तक टाल दिया गया।
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद सरकार ने पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में वृद्धि कर दी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आर्थिक नीतियों में पारदर्शिता की कमी है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति आम लोगों के लिए बेहद कठिन है, क्योंकि महंगाई पहले से ही अपने उच्च स्तर पर है।
खड़गे ने केंद्र सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि वह महंगाई के मुद्दे पर दोहरे मानदंड अपनाती है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार विकास और आर्थिक स्थिरता की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ जरूरी वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि कर आम जनता पर बोझ बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि महंगाई का सीधा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ता है, जो रोजमर्रा के खर्चों से पहले ही परेशान हैं। ईंधन की कीमतें बढ़ने से परिवहन, खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक सेवाओं की लागत भी बढ़ जाती है, जिसका व्यापक असर पूरे अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
कांग्रेस नेता के इन बयानों के बाद राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है। विपक्ष लगातार सरकार पर महंगाई और आर्थिक नीतियों को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कुल मिलाकर, खड़गे के इस बयान ने एक बार फिर ईंधन कीमतों और महंगाई को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है, जिसमें विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।





