
Karnataka कर्नाटक: सरकारी ट्रांसपोर्ट निगमों से जुड़ी ट्रेड यूनियनों की संयुक्त कार्रवाई समिति (JAC) ने 20 मई को प्रस्तावित अपनी हड़ताल को वापस ले लिया है। यह फैसला कर्नाटक हाई कोर्ट के निर्देश के बाद लिया गया, जिसमें यूनियनों को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से रोक दिया गया था।
जानकारी के अनुसार, यह मामला कर्नाटक हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान सामने आया। कोर्ट ने हड़ताल को लेकर चिंता जताते हुए संबंधित यूनियनों को आगे बढ़ने से रोकने का आदेश दिया।
यह PIL एक घरेलू कामगार और एक निर्माण श्रमिक द्वारा दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि बस हड़ताल होने की स्थिति में आम जनता के साथ-साथ दैनिक मजदूरी पर निर्भर लोगों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा। विशेष रूप से ऐसे वर्गों के लिए यह स्थिति कठिन हो सकती है जो रोज़ाना यात्रा करके काम पर जाते हैं और अपनी आय अर्जित करते हैं।
कोर्ट में दलील दी गई कि सार्वजनिक परिवहन ठप होने से न केवल यात्रियों को परेशानी होगी, बल्कि छोटे व्यवसायों और श्रमिक वर्ग की आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित होंगी। इसी आधार पर अदालत ने यूनियनों को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से रोकने का निर्देश दिया।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद संयुक्त कार्रवाई समिति (JAC) ने अपनी प्रस्तावित हड़ताल वापस लेने का निर्णय लिया। यूनियनों की ओर से कहा गया कि वे कर्मचारियों की मांगों को लेकर बातचीत और वैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान तलाशने के पक्ष में हैं।
सरकारी ट्रांसपोर्ट यूनियनों की यह हड़ताल पहले से ही राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई थी, क्योंकि इससे बस सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही थी। लाखों यात्रियों की दैनिक आवाजाही इस पर निर्भर रहती है, इसलिए इसे लेकर प्रशासन और न्यायालय दोनों स्तरों पर गंभीरता से विचार किया गया।
फिलहाल हड़ताल वापस लिए जाने के बाद परिवहन सेवाओं के सामान्य रूप से जारी रहने की उम्मीद है। वहीं, सरकार और यूनियनों के बीच बातचीत के जरिए आगे के मुद्दों के समाधान की संभावना बनी हुई है।
कुल मिलाकर, हाई कोर्ट के हस्तक्षेप और PIL पर सुनवाई के बाद यह बड़ा निर्णय सामने आया है, जिससे राज्य में संभावित परिवहन संकट टल गया है।





