
Karnataka कर्नाटक: स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने एक महत्वपूर्ण सर्कुलर जारी करते हुए स्कूलों और कॉलेजों में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों और वार्षिक उत्सवों के दौरान छात्रों के अश्लील या आपत्तिजनक गानों पर डांस करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह निर्देश सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों पर लागू होगा।
सर्कुलर में स्पष्ट कहा गया है कि ऐसे गाने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इसके अलावा, इससे अनुशासनहीनता बढ़ने और शैक्षणिक संस्थानों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे इस संबंध में जागरूकता फैलाएं और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी कार्यक्रम में छात्र ऐसे गानों पर प्रस्तुति न दें। साथ ही, स्कूल प्रशासन को सख्त निगरानी रखने के लिए भी कहा गया है।
सर्कुलर में यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि किसी स्कूल में छात्रों को ऐसे गानों पर डांस करने के लिए प्रेरित या प्रोत्साहित किया जाता है, तो संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य और प्रबंधन के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग ने सुझाव दिया है कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ऐसे गीतों का चयन किया जाए जो प्रेरणादायक, देशभक्ति से जुड़े हुए हों और जिनसे नैतिक मूल्य, सम्मान और भाईचारे को बढ़ावा मिले। विभाग का कहना है कि स्कूलों का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि छात्रों के चरित्र निर्माण और सकारात्मक सोच को विकसित करना भी होना चाहिए।
इसके साथ ही, विभाग ने शिक्षकों और कार्यक्रम आयोजकों को भी जिम्मेदारी दी है कि वे कार्यक्रमों की सामग्री पर विशेष ध्यान दें और यह सुनिश्चित करें कि बच्चों को सही दिशा में प्रेरित करने वाले गीतों और प्रस्तुतियों को ही शामिल किया जाए।
सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि स्कूलों को ऐसे मंच तैयार करने चाहिए जहां छात्र अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें, लेकिन वह प्रस्तुति समाज के नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप हो।
शिक्षा विभाग ने यह कदम छात्रों के समग्र विकास और एक स्वस्थ शैक्षणिक माहौल बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया है। अधिकारियों का मानना है कि इससे स्कूलों में एक सकारात्मक और अनुशासित वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।





