
Karnataka कर्नाटक: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि “विकसित भारत 2047” केवल एक नारा नहीं है, बल्कि यह देश का एक राष्ट्रीय संकल्प है, जिसे हासिल करने के लिए सभी नागरिकों को मिलकर एक “महायज्ञ” की तरह प्रयास करना होगा। उनका कहना है कि अगले दो दशकों में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के लिए सामूहिक भागीदारी बेहद जरूरी है।
वे निट्टे परिंगिता विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित “विकसित भारत 2047” विज़न पर एक विशेष व्याख्यान को संबोधित कर रही थीं, जो डेरालाकाटे में आयोजित किया गया। इस दौरान उन्होंने भारत की क्षमता पर विश्वास करने और औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सीतारमण ने कहा कि देश को उन विचारों का विरोध करना चाहिए जो भारत की संभावनाओं और आत्मविश्वास को कमजोर करते हैं। उन्होंने इसे “निराशावादी सोच” करार देते हुए कहा कि भारत को आगे बढ़ने के लिए सकारात्मक और आत्मनिर्भर दृष्टिकोण अपनाना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमान के अनुसार वर्ष 2027 तक भारत की विकास दर 6.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। उनका कहना था कि भारत का लक्ष्य दुनिया की शीर्ष आर्थिक शक्तियों में अपनी मजबूत पहचान बनाना है।
वित्त मंत्री ने कहा कि विकसित भारत का मतलब केवल आर्थिक विकास नहीं है, बल्कि एक ऐसा देश है जहां स्वच्छ पानी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं सभी नागरिकों को उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि यह एक व्यावहारिक, प्रतिस्पर्धी, न्यायसंगत और हरित भारत की परिकल्पना है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने में संविधान एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है। उनके अनुसार, भारत के विकास में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और वे इस परिवर्तन की प्रमुख प्रेरक शक्ति हैं।
सीतारमण ने कहा कि देश के युवाओं, खासकर युवा महिलाओं में महत्वाकांक्षा तेजी से बढ़ रही है, जो भारत के भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति ही विकसित भारत के सपने को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
अपने संबोधन में उन्होंने सभी से अपील की कि वे मिलकर इस राष्ट्रीय लक्ष्य को आगे बढ़ाएं और भारत को एक मजबूत, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर अग्रणी राष्ट्र बनाने में योगदान दें।





