
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक में सरकारी कार्यालयों, बैठकों और कार्यक्रमों में प्लास्टिक की पानी की बोतलों के इस्तेमाल पर पहले ही प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद नियमों का उल्लंघन जारी रहने पर कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (KSPCB) ने कड़ी चेतावनी जारी की है। केएसपीसीबी के अध्यक्ष पी.एम. नरेंद्र स्वामी ने स्पष्ट किया कि अब सभी सरकारी विभागों, नगर निगमों और जिला प्रशासन को नोटिस भेजे जाएंगे और नियमों का पालन नहीं करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सितंबर 2018 में राज्य के पर्यावरण और जैव विविधता विभाग ने आदेश जारी किया था कि सरकारी कार्यालयों और सरकारी कार्यक्रमों में प्लास्टिक की पानी की बोतलों का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए। इसके तहत प्लास्टिक की बोतलों के उपयोग को रोकने और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने की सिफारिश की गई थी। केएसपीसीबी को इस आदेश को लागू करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
उस समय किए गए एक अध्ययन में पता चला कि सरकारी कार्यक्रमों और कार्यालयों में प्लास्टिक की बोतलों के इस्तेमाल के कारण हर साल लगभग दो करोड़ से अधिक प्लास्टिक की बोतलें कचरे के रूप में जमा हो रही थीं। इस कचरे के बढ़ते स्तर ने पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव डालना शुरू कर दिया था। इसके मद्देनज़र, सरकार ने कांच की बोतलें, स्टील के गिलास और पानी निकालने वाली मशीनों जैसे विकल्प अपनाने की सिफारिश की थी।
पी.एम. नरेंद्र स्वामी ने कहा कि अब तक कई सरकारी विभागों और निगमों ने इस आदेश की अनदेखी की है, जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव बना हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों का पालन न करने वाले विभागों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जिसमें वित्तीय दंड और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कदम शामिल हो सकते हैं।
केएसपीसीबी का कहना है कि सरकारी कार्यक्रमों में प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग रोकने से न केवल पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सकता है, बल्कि जनता में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। बोर्ड अधिकारियों ने यह भी सुझाव दिया कि सभी सरकारी कार्यालयों में पानी की मशीनें, फिल्टर सिस्टम और कांच या स्टील के बर्तन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि प्लास्टिक की बोतलों की जरूरत ही न पड़े।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्लास्टिक कचरा जलवायु परिवर्तन, जल स्रोतों और मिट्टी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर डालता है। इस दृष्टि से सरकारी स्तर पर इस तरह के प्रतिबंध का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
सरकारी आदेश और केएसपीसीबी की चेतावनी यह संदेश देती है कि राज्य स्तर पर पर्यावरण संरक्षण को गंभीरता से लिया जा रहा है और नियमों का उल्लंघन अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि आने वाले दिनों में सभी विभागों और जिलों में निरीक्षण और पालन सुनिश्चित करने के लिए अभियान चलाया जाएगा।





