कर्नाटक

Karnataka : मंत्री रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा वापस

Kavita2
7 Jun 2026 9:59 AM IST
Karnataka : मंत्री रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा वापस
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Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने बेंगलुरु डेवलपमेंट पोर्टफोलियो न मिलने से नाराज होकर इस्तीफा देने की घोषणा की थी। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व के साथ हुई गहन बातचीत के बाद उन्होंने अपना फैसला वापस लेते हुए कैबिनेट में बने रहने पर सहमति जता दी है। इस घटनाक्रम के साथ मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की सरकार के सामने आया पहला बड़ा राजनीतिक संकट फिलहाल टल गया है।

जानकारी के अनुसार, पार्टी हाईकमान ने बेंगलुरु डेवलपमेंट पोर्टफोलियो कृष्णा बायरे गौड़ा को सौंप दिया था, जिससे रामलिंगा रेड्डी असंतुष्ट थे। इसी असंतोष के चलते उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया था। लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को संभाला और वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत के बाद उन्हें मनाने में सफलता हासिल की।

बातचीत के बाद मीडिया से बात करते हुए रामलिंगा रेड्डी ने कहा, “मेरा इस्तीफा नामंज़ूर कर दिया गया है। मैंने हाईकमान के सामने अपने विचार और राय साझा कर दी हैं। अब उन्हें इस पर निर्णय लेने दें।” उनके इस बयान के बाद साफ हो गया कि वे फिलहाल सरकार का हिस्सा बने रहेंगे।

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने रेड्डी को किसी अन्य महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी देने पर विचार किया है। इनमें कोऑपरेशन या मुजराई जैसे “जन-सेवा से जुड़े” पोर्टफोलियो शामिल हैं। पार्टी नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि वरिष्ठ नेताओं के बीच असंतोष को बढ़ने से रोका जाए और सरकार में संतुलन बना रहे।

इसके अलावा, पार्टी के भीतर यह भी चर्चा चल रही है कि आने वाले ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के तहत होने वाले नागरिक चुनावों में रामलिंगा रेड्डी को एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। माना जा रहा है कि इससे न केवल उनकी भूमिका मजबूत होगी, बल्कि बेंगलुरु विकास से जुड़े मुद्दों पर भी उनका प्रभाव बना रहेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घटनाक्रम कांग्रेस सरकार के लिए एक शुरुआती चुनौती के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन समय रहते समाधान निकाल लेने से बड़ा संकट टल गया है। हालांकि, बेंगलुरु डेवलपमेंट पोर्टफोलियो को लेकर पार्टी के भीतर चल रही खींचतान अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

कुल मिलाकर, रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा वापस लेना और कैबिनेट में बने रहना कांग्रेस नेतृत्व के लिए राहत की बात है, लेकिन विभागीय जिम्मेदारियों को लेकर चल रही अनिश्चितता आने वाले समय में फिर से राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकती है।

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