
Karnataka कर्नाटक: हेल्थ और फैमिली वेलफेयर मंत्री यू टी खादर ने आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों में मिल रही शिकायतों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि कई निजी अस्पताल लाभार्थियों को पूरी तरह कैशलेस इलाज देने के बजाय उनसे पैसे वसूलने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जो योजना के नियमों का उल्लंघन है।
मंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर कोई निजी अस्पताल पात्र मरीजों से अवैध रूप से पैसे वसूलता पाया गया, तो संबंधित हेल्थकेयर पार्टनर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त और कैशलेस इलाज उपलब्ध कराना है, और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ निजी अस्पताल मरीजों से अलग-अलग बहानों के जरिए भुगतान करवाते हैं, जिससे योजना की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। इसी को देखते हुए विभाग ने निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने का निर्णय लिया है।
इसके साथ ही मंत्री यू टी खादर ने यह भी बताया कि सरकार आयुष्मान भारत योजना के तहत स्पेशल वार्ड चुनने वाले मरीजों को भी सुविधा देने पर विचार कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, मरीजों को कैशलेस इलाज का लाभ मिलेगा, लेकिन यदि वे स्पेशल वार्ड का चयन करते हैं, तो उन्हें केवल उस वार्ड से संबंधित अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना होगा।
उन्होंने कहा कि इस बदलाव का उद्देश्य मरीजों को अधिक विकल्प देना और सिस्टम को अधिक पारदर्शी बनाना है, ताकि किसी भी स्तर पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की व्यवस्था लागू होने से मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और निजी अस्पतालों में इलाज की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और नियंत्रित होगी।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जाएगी और जहां भी गड़बड़ी सामने आएगी, वहां तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस कदम को स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था में सुधार और गरीब मरीजों के हितों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।





