
Karnataka कर्नाटक: राज्य भर में प्राइवेट बसों के यात्रियों को आज से बढ़ी हुई टिकट कीमतों का सामना करना पड़ेगा। आधी रात से लागू हुए नए रेट के अनुसार, प्राइवेट बसों के किराए में 5 से 8 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है।
स्टेज कैरिज बस टिकट की बढ़ी हुई कीमतों की जानकारी फेडरेशन ऑफ स्टेज कैरिज बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष ने दी। उन्होंने बताया कि डीज़ल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी, गाड़ियों के मेंटेनेंस पर खर्च में इज़ाफा और कर्मचारियों की सैलरी में बढ़ोतरी को देखते हुए यह कदम उठाया गया।
प्रदेश अध्यक्ष कुयलाडी सुरेश नायक ने कहा कि केंद्र सरकार ने हाल ही में डीज़ल की कीमतों में चार बार 8.17 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने एक साल पहले डीज़ल रेट में 3 रुपये की बढ़ोतरी की थी। यही नहीं, गाड़ियों के स्पेयर पार्ट्स की कीमत में भी लगातार इज़ाफा हुआ है। टायर रिसोलिंग, टोल रेट, कर्मचारियों के वेतन, टैक्स और इंश्योरेंस जैसे खर्चों में बढ़ोतरी के कारण बस ऑपरेटरों के लिए किराए में वृद्धि अनिवार्य हो गई है।
प्राइवेट बस मालिकों का कहना है कि इस कदम से ऑपरेटरों को ऑपरेशन लागत को पूरा करने और बस सेवाओं को नियमित बनाए रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि बढ़े हुए किराए के बावजूद, यह रेट यात्रियों के लिए किफायती बनाए रखने का प्रयास है, क्योंकि लगातार बढ़ते डीज़ल और अन्य खर्चों के कारण सेवाओं पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा था।
यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपने सफर की योजना बनाते समय नई कीमतों को ध्यान में रखें। राज्य भर में विभिन्न मार्गों पर टिकट दरों में यह बढ़ोतरी समान रूप से लागू होगी, और इससे दैनिक यात्री और लंबी दूरी की यात्राओं पर असर पड़ सकता है।
फेडरेशन के अनुसार, नए रेट 5 प्रतिशत से 8 प्रतिशत तक बढ़ाए गए हैं। छोटे दूरी के स्टेज कैरिज रूटों पर मामूली बढ़ोतरी की गई है, जबकि लंबी दूरी के रूटों पर अधिक बढ़ोतरी लागू की गई है। इससे ऑपरेटरों को उच्च लागत वाले रूटों पर संचालन में आसानी होगी।
बस ऑपरेटरों ने यात्रियों से समझौता करने और नई दरों के अनुसार यात्रा करने का अनुरोध किया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि खर्चों में स्थिरता आती है तो भविष्य में किराए पर फिर से समीक्षा की जा सकती है।
राज्य प्रशासन ने फिलहाल इस बढ़ोतरी पर कोई रोक या नियम नहीं लगाए हैं, और इसे निजी बसों के संचालन के तहत स्वीकृत माना गया है। इस कदम से यात्रियों के लिए यात्रा खर्च में इज़ाफा हुआ है, लेकिन ऑपरेटरों के लिए वित्तीय संतुलन बनाए रखना आवश्यक माना जा रहा है।





