कर्नाटक

Karnataka : अलंदा दंगों से जुड़े 52 केस वापस लेने के फैसले पर राजनीतिक विवाद तेज

Kavita2
23 May 2026 2:09 PM IST
Karnataka : अलंदा दंगों से जुड़े 52 केस वापस लेने के फैसले पर राजनीतिक विवाद तेज
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Karnataka कर्नाटक: राज्य कैबिनेट द्वारा 2022 में अलंदा तालुक में लाडले मशक दरगाह के पास हुए दंगों से जुड़े मामलों सहित कुल 52 आपराधिक मामलों को वापस लेने के फैसले के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस निर्णय को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना की है। पार्टी का कहना है कि दंगों और सार्वजनिक अशांति से जुड़े मामलों को वापस लेना कानून व्यवस्था के लिए सही संकेत नहीं है। BJP नेताओं का आरोप है कि इससे गलत संदेश जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के प्रयास कमजोर होंगे।

BJP के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि समाज में अशांति फैलाने वाले मामलों को वापस लेना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार इस तरह के फैसलों से क्या संदेश देना चाहती है।

यह मामला 2022 में अलंदा में लाडले मशक दरगाह के पास हुई घटना से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां कथित रूप से शिवलिंग को अपवित्र किए जाने के आरोप के बाद तनाव और दंगे की स्थिति उत्पन्न हुई थी। इसी घटना से जुड़े कई मामलों को अब राज्य कैबिनेट द्वारा वापस लेने का निर्णय लिया गया है।

BJP ने आरोप लगाया है कि सरकार वोट बैंक की राजनीति के तहत इस तरह के फैसले ले रही है। पार्टी का कहना है कि यह कदम समाज में विभाजन पैदा कर सकता है और कानून के शासन पर सवाल खड़े करता है।

विपक्षी दलों का यह भी कहना है कि ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करना उचित नहीं है और इससे पीड़ित पक्षों के विश्वास पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, सरकार की ओर से इस फैसले को लेकर अब तक विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है कि किन आधारों पर इन 52 मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया गया।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में तनाव बढ़ गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बहस तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

कुल मिलाकर, अलंदा दंगों से जुड़े मामलों की वापसी ने राज्य में राजनीतिक टकराव को और गहरा कर दिया है, जहां एक ओर सरकार के फैसले का समर्थन किया जा रहा है तो दूसरी ओर विपक्ष इसे कानून व्यवस्था और न्याय प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाला कदम बता रहा है।

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