
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक राज्य सरकार ने शराब पर टैक्स लगाने के तरीके में बड़ा बदलाव करते हुए “अल्कोहल इन बेवरेज” (AIB) आधारित नई एक्साइज़ पॉलिसी का अंतिम नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यह नई व्यवस्था 11 मई से पूरे राज्य में लागू हो जाएगी। इसके लागू होने के साथ ही पिछले लगभग छह दशकों से चल रहा “बल्क लीटर” आधारित टैक्स सिस्टम पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
सरकार के अनुसार, यह फैसला शराब उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाने और टैक्स ढांचे को अधिक वैज्ञानिक बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। कर्नाटक देश का पहला राज्य बन गया है जिसने AIB आधारित टैक्स पॉलिसी को लागू किया है। इस नई प्रणाली के तहत अब टैक्स शराब की मात्रा के बजाय उसमें मौजूद अल्कोहल कंटेंट के आधार पर तय किया जाएगा।
इससे पहले 18 अप्रैल को सरकार ने इसका ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया था और जनता, उद्योग से जुड़े लोगों तथा अन्य हितधारकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे। प्राप्त सुझावों और प्रतिक्रियाओं पर विचार करने के बाद “कर्नाटक एक्साइज़ (एक्साइज़ ड्यूटी और चार्जेज़) (दूसरा संशोधन) नियम, 2026” को अंतिम रूप दिया गया।
नई नीति के तहत ब्रांडी, व्हिस्की, रम, जिन, बीयर और वाइन जैसी अलग-अलग शराब श्रेणियों पर अब उनके “अल्कोहल कंटेंट” के आधार पर टैक्स लगाया जाएगा। इसका मतलब है कि जिन उत्पादों में अल्कोहल की मात्रा अधिक होगी, उन पर टैक्स संरचना भी उसी आधार पर तय होगी।
इस बदलाव के साथ टैक्स स्लैब की संख्या भी कम कर दी गई है। पहले जहां 16 अलग-अलग एक्साइज़ स्लैब थे, अब उन्हें घटाकर 8 स्लैब कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे सिस्टम अधिक सरल और पारदर्शी बनेगा।
उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस नई पॉलिसी का सबसे ज्यादा असर कम कीमत वाली शराब श्रेणी पर पड़ सकता है, क्योंकि यही सेगमेंट एक्साइज़ विभाग के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देता है। ऐसे में कुछ उत्पादों की कीमतों में बदलाव की संभावना भी जताई जा रही है।
हालांकि सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना ही नहीं बल्कि टैक्स प्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाना भी है। अब निगरानी और गणना सीधे अल्कोहल कंटेंट पर आधारित होगी, जिससे सिस्टम में समानता लाई जा सके।
नई नीति लागू होने के बाद राज्य में शराब टैक्स संरचना में एक नया मॉडल देखने को मिलेगा, जिसे अन्य राज्य भी भविष्य में अपनाने पर विचार कर सकते हैं।





