
Karnataka कर्नाटक: ठोस नगरपालिका कचरे से टॉरीफाइड चारकोल बनाने वाला पहला प्लांट अब अपने संचालन के अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस परियोजना ने लगातार 36 घंटे तक सफल ट्रायल रन पूरा कर लिया है, जिसके बाद इसके जल्द पूरी तरह से शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
NTPC Vidyut Vyapar Nigam Limited की सब्सिडियरी इकाई द्वारा विकसित यह प्लांट कर्नाटक में कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसे NTPC Limited की एक सहयोगी परियोजना के रूप में स्थापित किया गया है, जिसका उद्देश्य सूखे कचरे को उपयोगी ऊर्जा संसाधन में बदलना है।
यह संयंत्र हुबली-धारवाड़ नगर निगम (HDMC) की 12 एकड़ जमीन पर शहर के बाहरी इलाके गब्बर के पास स्थापित किया गया है। Hubli-Dharwad के जुड़वां शहरों में यह परियोजना ठोस कचरा प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
प्लांट की क्षमता प्रतिदिन लगभग 200 टन सूखे, जलने योग्य नगरपालिका कचरे को संसाधित करने की है। यह कचरे को टॉरीफाइड चारकोल में बदलता है, जिसे ऊर्जा उत्पादन और औद्योगिक उपयोग के लिए एक वैकल्पिक ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस प्रक्रिया से न केवल कचरे का प्रभावी निस्तारण होता है, बल्कि पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को भी कम किया जा सकता है।
अधिकारियों के अनुसार, ट्रायल रन के दौरान प्लांट ने लगातार 36 घंटे तक बिना किसी बड़ी तकनीकी बाधा के काम किया, जिससे इसकी कार्यक्षमता और स्थिरता की पुष्टि हुई है। अब इसके पूर्ण संचालन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
इस परियोजना को हुबली-धारवाड़ के लिए एक बड़े समाधान के रूप में देखा जा रहा है, जहां शहरीकरण के साथ-साथ कचरे की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तकनीक भविष्य में शहरों के लिए कचरा प्रबंधन की एक टिकाऊ और आर्थिक रूप से व्यवहार्य व्यवस्था प्रदान कर सकती है।
स्थानीय प्रशासन और नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह प्लांट न केवल कचरे की समस्या को कम करेगा, बल्कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद करेगा।
परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, टॉरीफाइड चारकोल पारंपरिक कोयले की तुलना में अधिक स्वच्छ ईंधन विकल्प है और इसके उपयोग से कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, हुबली-धारवाड़ का यह टॉरीफाइड चारकोल प्लांट कर्नाटक में आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल कचरा प्रबंधन तकनीक की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में अन्य शहरों के लिए भी मॉडल बन सकता है।





