कर्नाटक

Bengaluru पर टी.जे.एस. जॉर्ज की मशहूर किताब का कन्नड़ अनुवाद जारी

Kavita2
15 Jun 2026 11:09 AM IST
Bengaluru पर टी.जे.एस. जॉर्ज की मशहूर किताब का कन्नड़ अनुवाद जारी
x

Karnataka कर्नाटक: वरिष्ठ पत्रकार और लेखक टी.जे.एस. जॉर्ज की प्रसिद्ध किताब ‘एस्क्यू: अ शॉर्ट बायोग्राफी ऑफ बैंगलोर’ का कन्नड़ अनुवाद रविवार को बेंगलुरु में औपचारिक रूप से जारी किया गया। इस अवसर पर शहर के विकास, शहरी योजना और भविष्य की चुनौतियों को लेकर विस्तृत चर्चा भी की गई।

Bengaluru में आयोजित इस कार्यक्रम में कई साहित्यकार, विशेषज्ञ और शहर से जुड़े गणमान्य लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते महानगर को बेहतर शहरी योजना, समन्वित प्रशासन और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर किताब के कन्नड़ अनुवाद का भी अनावरण किया गया, जिसका शीर्षक ‘ओरे कोरे – दोड्डा बेंगलुरुविना सन्ना आत्मकथे’ रखा गया है। इस अनुवाद का कार्य प्रोफेसर के.ई. राधाकृष्ण ने किया है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस पुस्तक के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला और बताया कि यह केवल एक शहर का विवरण नहीं है, बल्कि उसकी सांस्कृतिक और सामाजिक यात्रा का दस्तावेज है।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने बेंगलुरु के अतीत को याद करते हुए उसके वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ती आबादी, ट्रैफिक दबाव, बुनियादी ढांचे की जरूरतें और पर्यावरणीय संतुलन जैसे मुद्दों पर गंभीर ध्यान देने की आवश्यकता है।

प्रो. के.ई. राधाकृष्ण ने कहा कि यह पुस्तक बेंगलुरु के उन लोगों, संस्थानों और सांस्कृतिक स्थलों को दर्ज करती है जिन्होंने इस शहर की पहचान को आकार दिया है। उनके अनुसार, यह कृति शहर की जीवंत स्मृतियों को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

उन्होंने यह भी कहा कि जहां अब तक बेंगलुरु के भौतिक विकास और इमारतों पर कई पुस्तकें लिखी गई हैं, वहीं टी.जे.एस. जॉर्ज का यह काम शहर को केवल संरचनात्मक दृष्टि से नहीं देखता, बल्कि उन लोगों की कहानियों को सामने लाता है जिन्होंने इसे एक जीवंत और विशिष्ट पहचान दी।

T. J. S. George की इस किताब को शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक आत्मा को समझने का एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जा रहा है। कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि इस तरह की रचनाएं न केवल इतिहास को दर्ज करती हैं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने में भी मदद करती हैं।

कुल मिलाकर, इस पुस्तक के कन्नड़ अनुवाद के विमोचन ने बेंगलुरु के शहरी विकास और सांस्कृतिक विरासत पर एक नई बहस को जन्म दिया है, जिसमें शहर के संतुलित और टिकाऊ विकास की आवश्यकता को प्रमुखता से उठाया गया।

Next Story