
बेल्लारी : कर्नाटक के पुरातात्विक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। बेल्लारी जिले के सांदूर वन क्षेत्र में स्थित एक गुफा को वैज्ञानिक जांच के बाद भारत में सबसे ऊंचाई पर स्थित प्राचीन मानव बस्ती के रूप में पहचाना गया है। अहमदाबाद की फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (PRL) और IIT गांधीनगर के सेंटर फॉर आर्कियोलॉजिकल साइंसेज द्वारा किए गए वैज्ञानिक अध्ययन से यह जानकारी सामने आई है।
जांच में पुष्टि हुई है कि समुद्र तल से करीब 850 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ‘रशीद पाडी’ गुफा लगभग 10,000 साल पुरानी मानव बस्ती रही है। इस खोज ने कर्नाटक के साथ-साथ भारत के प्राचीन मानव इतिहास को समझने के लिए एक नया आधार प्रदान किया है।
वैज्ञानिकों ने इस गुफा में मिले पुरातात्विक अवशेषों की कार्बन-14 डेटिंग के माध्यम से उनकी उम्र का पता लगाया। अध्ययन के दौरान गुफा के फर्श से मिले माइक्रोलिथ यानी छोटे पत्थर के औजारों और इंसानी हड्डियों के टुकड़ों पर मौजूद जैविक सामग्री की जांच की गई।
कार्बन डेटिंग एक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसके जरिए किसी पुरानी वस्तु या जैविक अवशेष की आयु का अनुमान लगाया जाता है। इस तकनीक के आधार पर शोधकर्ताओं ने पाया कि रशीद पाडी गुफा में मानव गतिविधियां हजारों साल पहले मौजूद थीं।
यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे पता चलता है कि पाषाण युग के मानव केवल मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी रहते थे और वहां अपने जीवन के लिए संसाधनों का उपयोग करते थे।
रशीद पाडी गुफा से मिले माइक्रोलिथ उस दौर की मानव जीवनशैली के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं। छोटे पत्थर के औजारों का इस्तेमाल शिकार, भोजन तैयार करने और दैनिक जरूरतों के लिए किया जाता था। इन अवशेषों से यह संकेत मिलता है कि उस समय के लोग प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहते हुए संगठित तरीके से जीवन जीते थे।
सांदूर क्षेत्र पहले से ही अपने प्राकृतिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। यहां पहाड़, जंगल और खनिज संपदा के साथ-साथ कई पुरातात्विक स्थल मौजूद हैं। रशीद पाडी गुफा की खोज ने इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को और बढ़ा दिया है।
पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इतनी पुरानी मानव बस्ती का प्रमाण मिलना भारत के प्रागैतिहासिक अध्ययन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि हजारों वर्ष पहले मानव समुदाय किस तरह अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में रहते थे और पर्यावरण के अनुसार खुद को ढालते थे।
PRL और IIT गांधीनगर की टीम ने वैज्ञानिक तरीकों से इस खोज की पुष्टि की है। शोधकर्ताओं ने गुफा में मिले विभिन्न अवशेषों का अध्ययन कर उनकी उम्र और महत्व का आकलन किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज भारत में पाषाण युग के मानव प्रवास और उनके जीवन के बारे में नई जानकारियां उपलब्ध करा सकती है। अब इस क्षेत्र में आगे भी विस्तृत पुरातात्विक अध्ययन की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
गुफा में मिले अवशेष यह संकेत देते हैं कि प्राचीन मानव समुदायों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी रहने के तरीके विकसित कर लिए थे। पहाड़ी और वन क्षेत्रों में उनकी मौजूदगी यह बताती है कि मानव इतिहास केवल नदियों और मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं था।
इस खोज के बाद सांदूर वन क्षेत्र का महत्व राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ सकता है। पुरातत्व विभाग और शोध संस्थानों के लिए यह क्षेत्र भविष्य में अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
रशीद पाडी गुफा की यह खोज न केवल कर्नाटक के लिए गौरव का विषय है, बल्कि पूरे भारत के प्राचीन इतिहास को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। करीब 10 हजार साल पुराने इस मानव निवास स्थल ने यह साबित किया है कि भारत में प्राचीन मानव सभ्यताओं का विस्तार बेहद व्यापक था।
वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर सामने आई यह खोज आने वाले समय में भारतीय पुरातत्व के क्षेत्र में कई नए अध्याय खोल सकती है। सांदूर की यह गुफा अब देश की प्राचीन मानव विरासत के महत्वपूर्ण स्थलों में शामिल हो गई है।





