कर्नाटक

Karnataka : जेल में रह रहे बच्चों के लिए देश का पहला सरकारी चाइल्ड केयर सेंटर शुरू

Kavita2
7 May 2026 12:19 PM IST
Karnataka : जेल में रह रहे बच्चों के लिए देश का पहला सरकारी चाइल्ड केयर सेंटर शुरू
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Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक सरकार ने जेल में अपनी मां के साथ रह रहे छोटे बच्चों की देखभाल और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल के महिला विंग में देश का पहला सरकारी स्पेशल चाइल्ड केयर सेंटर (GSCCI) शुरू किया गया है। यह पहल उन बच्चों को ध्यान में रखकर की गई है, जो अपनी मां के साथ जेल में रहने को मजबूर हैं, जबकि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया होता।

यह विशेष केंद्र छह साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बनाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य इन बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और भावनात्मक विकास (इमोशनल डेवलपमेंट) प्रदान करना है, ताकि उनका बचपन जेल की सीमित परिस्थितियों में प्रभावित न हो।

कर्नाटक चाइल्ड प्रोटेक्शन डायरेक्टरेट की डायरेक्टर सी.वी. स्नेहा के अनुसार, इस केंद्र में दो शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। बच्चों को शुरुआती शिक्षा जैसे लिटरेसी, नंबर, कविता (राइम्स), पेंटिंग और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सिखाया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें “सेफ टच-अनसेफ टच” जैसे महत्वपूर्ण विषयों के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है, ताकि वे सुरक्षा के प्रति समझ विकसित कर सकें।

इस सेंटर में बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्हें सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि व्यवहार और दैनिक जीवन की अच्छी आदतें भी सिखाई जा रही हैं। इसमें बड़ों का सम्मान करना, शिक्षकों का अभिवादन करना और खाने-पीने के सही तरीके जैसी बातें शामिल हैं।

अधिकारियों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट मानवीय दृष्टिकोण से शुरू किया गया है, क्योंकि जेल में रह रही महिलाएं अपने छोटे बच्चों को अलग नहीं कर सकतीं, जिससे बच्चे भी उसी वातावरण में बड़े होते हैं। ऐसे में यह केंद्र उन्हें एक सुरक्षित और सकारात्मक माहौल देने का प्रयास है।

सरकार का मानना है कि बच्चों को शुरुआती उम्र में सही शिक्षा और मानसिक विकास देना बेहद जरूरी है, ताकि उनका भविष्य प्रभावित न हो। यह पहल न केवल जेल सुधार व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मॉडल से जेल प्रणाली में मानवीय सुधार को बढ़ावा मिलेगा और बच्चों को बेहतर जीवन की दिशा मिलेगी, भले ही वे असामान्य परिस्थितियों में रह रहे हों।

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