कर्नाटक

Karnataka : मतदाता सूची प्रक्रिया को लेकर चिंता, ऑटोमेटेड वेरिफिकेशन पर उठे सवाल

Kavita2
19 Jun 2026 11:41 AM IST
Karnataka : मतदाता सूची प्रक्रिया को लेकर चिंता, ऑटोमेटेड वेरिफिकेशन पर उठे सवाल
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Karnataka कर्नाटक: कन्नड़ लेखकों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक समूह ने राज्य चुनाव आयोग (SEC) और राज्य सरकार को एक खुला पत्र लिखकर मतदाता सूची से जुड़े ऑटोमेटेड (स्वचालित) प्रक्रियाओं पर गंभीर चिंता जताई है। इस पत्र में कहा गया है कि तकनीक आधारित सत्यापन प्रणाली के कारण असली मतदाताओं के बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित होने का खतरा पैदा हो सकता है।

पत्र में विशेष रूप से उन सॉफ्टवेयर-आधारित वेरिफिकेशन प्रक्रियाओं का उल्लेख किया गया है, जिनका उपयोग कुछ राज्यों में मतदाता सूची सुधार के दौरान किया गया था। समूह का कहना है कि इस तरह की स्वचालित प्रणालियां, अगर सही तरीके से लागू न की जाएं, तो गरीब, हाशिए पर रहने वाले और ग्रामीण समुदायों के लोगों के वोट देने के मौलिक अधिकार को प्रभावित कर सकती हैं।

लेखकों और कार्यकर्ताओं का मानना है कि डिजिटल या ऑटोमेटेड प्रक्रियाएं प्रशासनिक दृष्टि से तेज और प्रभावी हो सकती हैं, लेकिन इनके कारण डेटा त्रुटियों, गलत डिलीशन और तकनीकी खामियों की संभावना भी बनी रहती है। यही कारण है कि मतदाता सूची जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में अत्यधिक तकनीकी निर्भरता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

पत्र में यह भी कहा गया है कि चुनावी प्रक्रिया लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण नींव है, और इसमें किसी भी प्रकार की गलती या चूक सीधे नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है। समूह ने आग्रह किया है कि किसी भी तरह की ऑटोमेटेड वेरिफिकेशन प्रणाली को लागू करने से पहले पारदर्शिता, मैनुअल जांच और स्थानीय स्तर पर सत्यापन को सुनिश्चित किया जाए।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में दस्तावेज़ों की कमी, नामों की वर्तनी में अंतर और डिजिटल रिकॉर्ड की असमानता के कारण योग्य मतदाताओं के नाम सूची से हटने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में पूरी तरह सॉफ्टवेयर-आधारित प्रक्रिया अपनाना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

समूह ने चुनाव आयोग से यह भी मांग की है कि मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में जनता की भागीदारी बढ़ाई जाए और किसी भी तकनीकी प्रणाली को लागू करने से पहले उसका व्यापक परीक्षण किया जाए। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक चुनावी प्रक्रियाओं को अधिक कुशल बना सकती है, लेकिन इसके साथ-साथ मानवीय निगरानी और पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी है। बिना उचित जांच के किसी भी ऑटोमेटेड सिस्टम का उपयोग गलत परिणाम दे सकता है।

फिलहाल राज्य चुनाव आयोग और सरकार की ओर से इस खुली चिट्ठी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि इस मुद्दे ने राज्य में मतदाता सूची सुधार और तकनीक के उपयोग को लेकर एक नई बहस जरूर शुरू कर दी है।

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