
बेंगलुरु। कांग्रेस आलाकमान से राज्य कैबिनेट के विस्तार को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद कर्नाटक की डी.के. शिवकुमार सरकार में जल्द ही नए मंत्रियों की एंट्री होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह सोमवार शाम आयोजित किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार शाम नई दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। यह बैठक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर हुई, जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार, बैठक में राज्य मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर अंतिम चर्चा की गई और संभावित नामों पर सहमति बनाई गई।
बताया जा रहा है कि नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह सोमवार शाम 5 बजे विधान सौधा के ग्लास हाउस में आयोजित होने की संभावना है। हालांकि, अंतिम कार्यक्रम और मंत्रियों के नामों की आधिकारिक घोषणा कांग्रेस नेतृत्व की ओर से की जाएगी।
कर्नाटक सरकार के मंत्रिमंडल में लंबे समय से कई पद खाली पड़े हैं। सूत्रों के अनुसार, कुल 20 रिक्त मंत्री पदों में से 18 पदों को इस विस्तार में भरा जा सकता है। वहीं, दो पदों को फिलहाल खाली रखने की रणनीति बनाई गई है। माना जा रहा है कि इन पदों को भविष्य के राजनीतिक समीकरणों और पार्टी के अंदर संभावित असंतोष को संतुलित करने के लिए बचाकर रखा जाएगा।
कैबिनेट विस्तार को लेकर कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चर्चा चल रही थी। राज्य में क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण और वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक भूमिका को ध्यान में रखते हुए नए मंत्रियों के चयन की प्रक्रिया की गई है।
सूत्रों के मुताबिक, इस विस्तार में दो महिला विधायकों को भी मंत्री पद दिए जाने की संभावना है। कांग्रेस नेतृत्व राज्य में महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के संकेत पहले भी देता रहा है। ऐसे में नए मंत्रिमंडल में महिला विधायकों को जगह मिलना पार्टी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और कांग्रेस नेतृत्व के बीच हुई बैठक को कैबिनेट विस्तार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में राज्य सरकार के कामकाज, संगठन और आगामी राजनीतिक चुनौतियों को लेकर भी चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के गठन के बाद से ही मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पार्टी के अंदर कई स्तरों पर विचार-विमर्श चल रहा था। कई विधायक मंत्री पद की उम्मीद लगाए हुए थे। ऐसे में नए मंत्रियों के चयन में क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन बनाए रखना कांग्रेस नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती रही है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, मंत्री पद देने में विधायकों की वरिष्ठता, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, संगठन में योगदान और आगामी चुनावी रणनीति जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा गया है। कांग्रेस चाहती है कि विस्तार के बाद सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो।
राज्य सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिनमें विकास योजनाओं को गति देना, प्रशासनिक सुधार और जनता से जुड़े वादों को पूरा करना शामिल है। नए मंत्रियों के शामिल होने के बाद सरकार के कामकाज को और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
विपक्षी दल भाजपा और जेडीएस लगातार कांग्रेस सरकार पर मंत्रिमंडल विस्तार में देरी को लेकर निशाना साधते रहे हैं। विपक्ष का आरोप रहा है कि सरकार आंतरिक खींचतान के कारण निर्णय लेने में देरी कर रही है। हालांकि, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि विस्तार एक सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया है और सभी पहलुओं पर विचार के बाद फैसला लिया जा रहा है।
डी.के. शिवकुमार सरकार के लिए यह कैबिनेट विस्तार राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। नए चेहरों को शामिल कर पार्टी जहां क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश करेगी, वहीं असंतुष्ट नेताओं को संतुलित करना भी एक बड़ी चुनौती होगी।
अब सभी की नजर सोमवार को होने वाले संभावित शपथ ग्रहण समारोह पर है, जहां नए मंत्रियों के नामों के साथ कर्नाटक सरकार के अगले चरण की तस्वीर साफ हो जाएगी।





